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70 साल पुरानी कारोबारी नीतियों से बेहतर परिणाम नहीं : भार्गव
Thu, 27 Aug 2020 12:51 AM IST
Amit Mandal
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Thu, 27 Aug 2020 12:51 AM IST
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Maruti Suzuki India Ltd Chairman RC Bhargava
- फोटो : PTI
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मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) के चेयरमैन आरसी भार्गव ने उद्योग जगत में लागू 70 साल पुरानी नीतियों की निंदा करते हुए कहा कि इससे अभी तक देश को वांछित परिणाम नहीं मिल सका है। मौजूदा सरकार ने पिछले 5-6 साल में कई बदलाव किए हैं, जिनसे विनिर्माण क्षेत्र ज्यादा प्रतिस्पर्धी बना है।
कंपनी की सालाना महासभा में भार्गव ने कहा, कोरोना महामारी ने विनिर्माण क्षेत्र को सबसे ज्यादा जागरूक किया है, जो तेजी से बदलाव के लिए प्रेरित है। अर्थव्यवस्था की वृद्धि और रोजगार सृजन के लिए विनिर्माण क्षेत्र में तेजी सबसे जरूरी है। मेरी समझ और जानकारी के हिसाब से मौजूदा सरकार भारतीय उद्योग जगत की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाने के लिए बेहद जागरूक है और सभी जरूरी कदम उठा रही है। उन्होेंने कहा कि महामारी ने लोगों में जागरूकता का स्तर काफी बढ़ा दिया है और यह समय तेज बदलाव के लिए व्यापक कदम उठाने का है। हमें ऐसे अवसर बनाने होंगे जो देश की अर्थव्यवस्था को तेजी से आगे बढ़ाने के साथ विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती दे।
समय के साथ बदलाव जरूरी
भार्गव ने कहा, भारत सहित दुनियाभर के कई देशों ने उद्योगों में सोवियत नीतियों को अपनाया है। इससे वांछित परिणाम नहीं मिल सके। हमें समय के साथ बदलाव करना होगा। मौजूदा समय प्रतिस्पर्धा का है और जो उद्योग इन मानकों पर खरे उतरने के बजाए सरकारी सब्सिडी पर बने रहना चाहते हैं। उन्हें लागत के मोर्चे पर चुनौतियों का समाना करना पड़ेगा।
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कंपनी की सालाना महासभा में भार्गव ने कहा, कोरोना महामारी ने विनिर्माण क्षेत्र को सबसे ज्यादा जागरूक किया है, जो तेजी से बदलाव के लिए प्रेरित है। अर्थव्यवस्था की वृद्धि और रोजगार सृजन के लिए विनिर्माण क्षेत्र में तेजी सबसे जरूरी है। मेरी समझ और जानकारी के हिसाब से मौजूदा सरकार भारतीय उद्योग जगत की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाने के लिए बेहद जागरूक है और सभी जरूरी कदम उठा रही है। उन्होेंने कहा कि महामारी ने लोगों में जागरूकता का स्तर काफी बढ़ा दिया है और यह समय तेज बदलाव के लिए व्यापक कदम उठाने का है। हमें ऐसे अवसर बनाने होंगे जो देश की अर्थव्यवस्था को तेजी से आगे बढ़ाने के साथ विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती दे।
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समय के साथ बदलाव जरूरी
भार्गव ने कहा, भारत सहित दुनियाभर के कई देशों ने उद्योगों में सोवियत नीतियों को अपनाया है। इससे वांछित परिणाम नहीं मिल सके। हमें समय के साथ बदलाव करना होगा। मौजूदा समय प्रतिस्पर्धा का है और जो उद्योग इन मानकों पर खरे उतरने के बजाए सरकारी सब्सिडी पर बने रहना चाहते हैं। उन्हें लागत के मोर्चे पर चुनौतियों का समाना करना पड़ेगा।
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