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20 साल तक खुद को जहरीले सांपों से कटवाया, वैज्ञानिकों ने शख्स के खून से किया ऐसा प्रयोग, दुनिया भी हुई हैरान
Sat, 03 May 2025 05:19 PM IST
धर्मेंद्र सिंह
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Published by: धर्मेंद्र सिंह
Updated Sat, 03 May 2025 05:19 PM IST
सार
Zara Hatke:टिम फ्राइड सांपों के जहर से खुद को इम्युन बनाना चाहता था। उसकी चाहत थी कि दुनिया को ऐसा एंटीवेनम (सांप के जहर को बेसर करने वाली दवा) मिले, जो सभी जहरीले सांप के जहर को बेअसर कर दे।
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20 साल तक खुद को जहरीले सांपों से कटवाया, वैज्ञानिकों ने शख्स के खून से किया ऐसा प्रयोग, दुनिया भी ह
- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
Zara Hatke: दुनिया में कई अजीबोगरीब लोगों के बारे में आपने सुना और पढ़ा होगा, लेकिन एक अमेरिकी शख्स ने ऐसा काम किया, जिसके बारे में कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। जहां लोग सांप को दूर भाग जाते हैं, तो वहीं शख्स ने खुद को 200 बार कोबरा जैसे सापों से कटवाया है। अमेरिका के रहने वाले इस शख्स का नाम टिम फ्राइड है।
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दरअसल, टिम फ्राइड सांपों के जहर से खुद को इम्युन बनाना चाहता था। उसकी चाहत थी कि दुनिया को ऐसा एंटीवेनम (सांप के जहर को बेसर करने वाली दवा) मिले, जो सभी जहरीले सांप के जहर को बेअसर कर दे। सांप से कटवाने के बाद टिम एक बार कोमा में भी पहुंच गया, लेकिन उसके इस कारनामे ने कमाल कर दिया है।
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अब टिम फ्राइड के खून से सांप के जहर को बेसर करने वाली दवा बनाने का दावा किया गया है। टिम ने 20 सालों में 200 बार खुद को सांपों से कटवाया है। इसकी वजह से उसके खून में सांप के जहर को बेअसर करने की क्षमता बन गई। अब उसके खून का इस्तेमाल कर दवा बनाई गई है। वैज्ञानिकों ने कहा कि टिम के खून में ऐसे एंटीबॉडीज हैं, जो कई तरह के जहरीले सांपों से बची सकती हैं। इन एंटीबॉडीज जानवरों पर टेस्ट किया गया है, जो जानलेवा जहर से बचाने में सफल रही हैं।
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एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अभी जो एंटीवेनम मौजूद हैं वे सिर्फ खास तरह के सांपों के जहर पर ही काम करते हैं। जबकि टिम फ्राइड की 20 साल की मेहनत से ऐसा एंटीवेनम बनाया गया है, जो किसी भी सांप के काटने पर काम आए।
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टिम ने सांपों का जहर शरीर में उतारा
टिम फ्राइड ने दुनिया के सबसे खतरनाक सांपों में शामिल मांबा, कोबरा, ताइपन और क्रेट से जहर लेकर खुद को 700 से ज्यादा इंजेक्शन लगाए। टिम पहले ट्रक मैकेनिक थे। उन्होंने एक न्यूज चैनल से बताया कि एक बार दो कोबरा सांपों ने उन्हें बहुत जल्दी-जल्दी काटा। इसकी वजह से वह कोमा में चले गए थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उनका दुनिया के लोगों के लिए बेहतर इलाज विकसित करने का मकसद था और वह इसके लिए कोशिश करते रहे।
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अभी तक एंटीवेनम बनाने के लिए घोड़े जैसे जानवरों में थोड़ा सा सांप का जहर इंजेक्ट किया जाता रहा है। उनका इम्युनिटी सिस्टम एंटीबॉडीज बनाकर जहर से लड़ता है और फिर उन्हें निकालकर इलाज किया जाता है। हालांकि, जहर और एंटीवेनम का मिलना जरूरी है, क्योंकि जहरीले सांप के काटने पर जहर एक प्रजाति से दूसरी प्रजाति में अलग होता है। सबसे बड़ी बात यह है कि एक प्रजाति में भी अंतर होता है। जैसे भारत में सांपों से बनाया गया एंटीवेनम श्रीलंका में उसी प्रजाति के सांपों पर कम असरदार होता है।
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टिम ने कैसे किया मदद
शोधकर्ताओं की एक टीम ने खास इम्युनिटी डिफेंस की खोज शुरू की। इसे ब्रॉडली न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडीज कहा जाता है। इस दौरान बायोटेक कंपनी सेंटिवैक्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉक्टर जैकब ग्लानविले को टिम फ्राइड के बारे में जानकारी मिली। जैकब ने बताया कि मैंने सोचा अगर दुनिया में किसी ने इन ब्रॉडली न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडीज को विकसित किया है तो वह टिम ही होगा। इसलिए मैंने उससे संपर्क साधा और वह राजी हो गए।
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फिलहाल शोधकर्ताओं की टीम एंटीबॉडीज को और बेहतर बनाने की कोशिश में लगी है। वह जानने की कोशिश कर रही है कि चौथा कंपोनेंट जोड़ने से इलापिड सांप के जहर से पूरी तरह से सुरक्षा मिल सकती है। सेल जर्नल में शोधकर्ताओं के प्रकाशित निष्कर्ष में दो व्यापक रूप से बेअसर करने वाले एंटीबॉडीज की पहचान होने के बारे में बताया गया है, जो न्यूरोटॉक्सिन के दो वर्गों को लक्षित कर सकते हैं।