'मेरी खोज से पास आएंगे रोबोट और इंसान, जीवन स्तर सुधारना है मेरा लक्ष्य'
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कुदरती त्वचा की विशेषताएं लिए कृत्रिम या इलेक्ट्रॉनिक त्वचा सकारात्मक तरीके से मानव जीवन स्तर बदलने का माद्दा रखती है। मेरा काम इसी तकनीक की संकल्पना को मूर्त स्वरूप देना है।
मैं मूलतः हरियाणा से ताल्लुक रखता हूं, लेकिन फिलहाल ग्लासगो विश्वविद्यालय में इलेक्ट्रॉनिक्स और नैनोइंजीनियरिंग विषय के प्रोफेसर के तौर पर काम कर रहा हूं। कुंजपुरा, करनाल के सैनिक स्कूल से शुरुआती शिक्षा पूरी करने के बाद मैंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की।
आईआईटी दिल्ली से एमटेक करने के बाद मैं इटली आ गया, जहां के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय से मैंने पीएच.डी. उपाधि हासिल की। मैं भारत वापस लौटा और मैंने दिल्ली स्थित नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में काम किया, मगर मैं दोबारा इटली आ गया, जहां मैंने विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं। मुझे मलयेशिया तथा ब्रिटेन के कई विश्वविद्यालयों में भी अतिथि व्याख्याता बनने का मौका मिला है।
जीवन स्तर सुधारना है लक्ष्य
हेल्पिंग हैंड्स
इलेक्ट्रॉनिक त्वचा (एक तरह से कृत्रिम त्वचा) और माइक्रो/मैक्रोइलेक्ट्रॉनिक जैसे विषयों में मेरी शुरू से ही दिलचस्पी रही है। यही वजह है कि अब तक इन्हीं विषयों से जुड़े मेरे दो सौ से ज्यादा शोध पत्र विभिन्न जर्नल और किताबों में प्रकाशित हो चुके हैं। हाल ही में मैंने 'हेल्पिंग हैंड्स'- थ्रीडी प्रिंटेड सेंसिटिव प्रोस्थेटिक्स पर केंद्रित एक छात्र समूह की स्थापना की है। इस क्षेत्र से जुड़े नए लोगों की मदद करना ही इस क्लब का उद्देश्य है।
इलेक्ट्रॉनिक त्वचा का अर्थ सेंसरों के ऐसे सेट से है, जो कि एकाधिक मानकों को मापने के लिए प्रयुक्त होता है। सिलिकॉन आधारित वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी केवल सपाट और स्थिर आधार पर उपयोगी है। मेरी कोशिश है कि मैं सकारात्मक परिवर्तन करते हुए लोगों का जीवन स्तर सुधारने के लिए नई तकनीक ईजाद करूं। भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मैंने कई पुरानी तकनीकों को भी नए तरीकों से दोबारा परिभाषित किया है।
एनिमेटिंग द इनएनिमेट वर्ल्ड
ऊर्जा-स्वायत्त कृत्रिम अंग की अवधारणा
मेरा अब तक का काम बस एक शुरुआत भर है। मेरा अगला मकसद बिजली उत्पादन तकनीक को विकसित करना है, जिससे कि इसका उपयोग उन मोटरों को शक्ति देने के लिए किया जा सके, जो कृत्रिम हाथ को चलाते हैं। इसके बाद ऊर्जा-स्वायत्त कृत्रिम अंग की अवधारणा पूरी तरह से साकार हो सकती है।
-'ब्रेनी स्किन' जैसे रोबोटिक क्षेत्र में काम कर रहे वैज्ञानिक के साक्षात्कारों पर आधारित।