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Zara Hatke: नासा की चेतावनी, दुनिया के सबसे तेजी से धंसते शहरों में भारत के ये 5 शहर भी हैं शामिल, जानें

Mon, 09 Jun 2025 12:18 PM IST
दीक्षा पाठक फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: दीक्षा पाठक Updated Mon, 09 Jun 2025 12:18 PM IST
सार

Zara Hatke: नासा का कहना है कि 2100 तक मुंबई 1.90 फीट तक डूब सकता है। इसकी वजह है, समुद्र का बढ़ता जलस्तर और जमीन के नीचे से पानी निकालना। मुंबई में पहले से ही बाढ़ की समस्या रहती है और अब यह और बढ़ सकती है।

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NASA warning these 5 cities of India are also included in the worlds fastest sinking cities know more
डूब रहे हैं दुनिया के ये शहर - फोटो : freepik.com

विस्तार

जैसा कि आप जानते हैं कि दुनिया के कई बड़े शहर अब धीरे-धीरे जमीन में धंसते जा रहे हैं। भारत के भी कई शहर इस खतरे का सामना कर रहे हैं। जमीन धंसने की सबसे बड़ी वजह जमीन के नीचे से ज्यादा पानी निकालना और जलवायु परिवर्तन है। इससे बाढ़ और भूकंप का खतरा भी बढ़ गया है। साल 2014 से 2020 के बीच कोलकाता में हर साल जमीन 0.01 से लेकर 2.8 सेंटीमीटर तक नीचे गई है। सबसे ज्यादा धंसाव भाटपारा में देखा गया, जहां यह 2.6 सेंटीमीटर प्रति साल है। कोलकाता में करीब 90 लाख लोग ऐसे इलाकों में रहते हैं जहां अब बाढ़ और भूकंप का खतरा बढ़ गया है। नासा कहा कहना है कि 2024 में समुद्र के पानी का लेवल भी 0.59 सेंटीमीटर बढ़ गया है। हाल ही में, नासा ने चेतावनी भी दी है कि समुद्र का जल स्तर बढ़ने से यह खतरा मंडरा सकता है। आइए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है।

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चेन्नई जमीन के नीचे से ज्यादा पानी निकालने का असर
चेन्नई में भी जमीन तेजी से नीचे जा रही है। हर साल 0.01 से 3.7 सेंटीमीटर तक। थरमनी इलाका सबसे ज्यादा प्रभावित है। यहां 14 लाख लोग रहते हैं। यहां की सबसे बड़ी समस्या जमीन के नीचे से जरूरत से ज्यादा पानी निकालना है, जिससे जमीन कमजोर हो गई है। अहमदाबाद में 2014 से 2020 के बीच हर साल जमीन 0.01 से 5.1 सेंटीमीटर तक नीचे गई है। पिपलाज में सबसे ज्यादा 4.2 सेंटीमीटर धंसाव हुआ है। यहां 51 लाख लोग प्रभावित हो सकते हैं। भूजल यानी जमीन के नीचे का पानी ज्यादा निकालने और समुद्र के जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
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मुंबई समुद्र के किनारे बसा शहर खतरे में
नासा का कहना है कि 2100 तक मुंबई 1.90 फीट तक डूब सकता है। इसकी वजह है, समुद्र का बढ़ता जलस्तर और जमीन के नीचे से पानी निकालना। मुंबई में पहले से ही बाढ़ की समस्या रहती है और अब यह और बढ़ सकती है। सूरत भी उन शहरों में है जो तेजी से डूब रहे हैं। एनटीयू की रिपोर्ट में कहा गया है कि जमीन के पानी का ज्यादा उपयोग और जलवायु परिवर्तन इसके पीछे बड़ी वजहें हैं। सूरत एक बड़ा इंडस्ट्रियल शहर है। इसलिए इसके डूबने से भारी नुकसान हो सकता है।
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यह है दुनिया का सबसे तेजी से डूबता शहर
इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता का आधा हिस्सा पहले ही समुद्र तल से नीचे चला गया है। 1970 से अब तक कुछ इलाकों में जमीन 4 मीटर तक नीचे जा चुकी है। लोग बार-बार आने वाली बाढ़ से परेशान हैं। बीबीसी और एनटीयू की रिपोर्टों के अनुसार ज्यादातर शहरों में जमीन धंसने की सबसे बड़ी वजह भूजल का जरूरत से ज्यादा दोहन यानी जमीन के नीचे से जरूरत से ज्यादा पानी निकालना है। कोलकाता, चेन्नई और अहमदाबाद जैसे शहरों में यही कारण सामने आया है। दुनिया भर में ऐसे 48 शहर हैं, जहां कुल 16 करोड़ लोग रहते हैं और ये खतरे में हैं। जलवायु परिवर्तन और ज्यादा बारिश ने स्थिति और बिगाड़ दी है।


बचाव के उपाय क्या हैं?
कुछ शहरों ने बाढ़ से बचने के लिए बांध और दीवारें बनाई हैं । जैसे जकार्ता, अलेक्जेंड्रिया और हो ची मिन्ह सिटी। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इससे ‘बाउल इफेक्ट’ हो सकता है। यानी बारिश का पानी बाहर निकलने की जगह वहीं फंस जाता है और बाढ़ का खतरा और बढ़ जाता है। अगर हम अब भी नहीं जागे तो करोड़ों लोगों का जीवन और करोड़ों रुपये की संपत्ति खतरे में पड़ सकती है। जरूरत है सख्त कानूनों और जिम्मेदार जल प्रबंधन की है। ताकि हम आने वाले समय में इस बड़े संकट से बच सकें।




 

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