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आखिर कैसा है वो शहर, जहां ईसा मसीह को सूली पर लटकाया गया था

Wed, 26 Feb 2020 11:38 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Wed, 26 Feb 2020 11:38 AM IST
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Jerusalem city where Jesus Christ was crucified
ईसा मसीह (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

ईसा मसीह को ईसाई धर्म का प्रवर्तक माना जाता है। ईसाई लोग उन्हें परमपिता परमेश्वर का पुत्र और ईसाई त्रिएक परमेश्वर का तृतीय सदस्य मानते हैं, लेकिन कट्टरपंथियों ने उन्हें सूली पर लटका दिया था। ईसाइयों का मानना है कि सूली पर मरते समय ईसा मसीह ने सभी इंसानों के पाप स्वयं पर ले लिए थे और इसलिए जो भी ईसा में विश्वास करेगा, उसे ही स्वर्ग मिलेगा। हालांकि कहा यह भी जाता है कि मृत्यु के तीन दिन बाद ईसा मसीह वापस जी उठे थे और 40 दिन बाद सीधे स्वर्ग चले गए थे। क्या आप जानते हैं कि वो कौन सी जगह थी, जहां उन्हें सूली पर लटकाया गया था?

Jerusalem city where Jesus Christ was crucified
यरुशलम - फोटो : Pixabay

कहा जाता है कि ईसा मसीह को यरुशलम में सूली पर लटकाया गया था और वही पर उनकी मृत्यु हुई थी। यरुशलम को इजरायल की राजधानी माना जाता है, लेकिन कुछ देशों में इसको लेकर विवाद है। यरुशलम एक प्राचीन शहर है। यहीं यहूदियों का परम पवित्र सोलोमन मंदिर हुआ करता था, जिसे रोमनों ने नष्ट कर दिया था। इस शहर को ईसा मसीह की कर्मभूमि माना जाता है। 

Jerusalem city where Jesus Christ was crucified
यरुशलम - फोटो : Pixabay

यह शहर मुस्लिम धर्म के लिए भी एक पवित्र जगह माना जाता है। कहते हैं कि यहीं से मुस्लिम धर्म के संस्थापक हजरत मुहम्मद स्वर्ग गए थे। आपको जानकर हैरानी होगी कि ईसा मसीह को इस्लाम के भी महानतम पैगम्बरों में से एक माना जाता है। उन्हें इस्लामी परंपरा में भी एक महत्वपूर्ण पैगम्बर माना गया है और कुरान में भी उनका जिक्र है। 

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Jerusalem city where Jesus Christ was crucified
यरुशलम - फोटो : Pixabay

कहते हैं कि इस शहर में 158 गिरजाघर और 73 मस्जिदें स्थित हैं। यहां के अल अक्सा मस्जिद से इस्लाम धर्म की उत्पति मानी जाती है। यह प्राचीन मस्जिदों में से एक है जिसका नाम अभी तक अक्सा मस्जिद ही है, जो कि कुरान शरीफ में भी मौजूद है। 

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Jerusalem city where Jesus Christ was crucified
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

यहां के सोलोमन टेंपल का उल्लेख बाइबिल में प्रथम मंदिर के नाम से मिलता है। इस मंदिर का निर्माण 10वीं शताब्दी ईसा पूर्व में हुआ था, लेकिन बेबीलोन के शासकों ने 586 ई. में इसे तोड़ डाला था। बाद में इस मंदिर का पुर्नर्निमाण किया गया। आज भी इस मंदिर के अवशेषों को देखा जा सकता है। यह मंदिर हिब्रू संप्रदाय से संबंधित है। 

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