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खतरनाक हुआ अल नीनो! क्या भारत में आसमान से बरसेगी आग? पहली बार प्रशांत महासागर में मची ऐसी हलचल

Sun, 25 Oct 2026 03:40 PM IST
धर्मेंद्र कुमार सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: धर्मेंद्र कुमार सिंह Updated Sun, 25 Oct 2026 03:40 PM IST
सार

अमेरिकी संस्था नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) ने बताया है कि 22 अक्तूबर को मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर की सतह का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इससे साफ है कि अब अल नीनो बेहद शक्तिशाली हो गया है। 

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El Nino Effect Pacific Ocean Temperature Touch 30c For First Time Why India Worried
खतरनाक हुआ अल नीनो! क्या भारत में आसमान से बरसेगी आग? - फोटो : AI

विस्तार

खतरनाक अल नीनो की वजह से पूरी दुनिया में बड़ा संकट मंडरा रहा है। अल नीनो के प्रभाव से प्रशांत महासागर की सतह का तापमान इतिहास के सबसे उच्च स्तर पर पहुंच चुका है। अमेरिका की संस्था नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) ने जानकारी दी है कि 22 अक्तूबर को मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर की सतह का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। अल नीनो के असामान्य रूप से शक्तिशाली होने से दुनियाभर में मौसम का पैटर्न प्रभावित होगा, जिससे असर को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। भारत में इसके तेज होने की वजह से मौसम संबंधी चिंता बढ़ी है। 

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विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने संभावना जताई है कि अक्तूबर से दिसंबर के बीच मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। दिसंबर के आसपास अल नीनो अपने चरम पर पहुंच सकता है। इससे दुनिया के बड़े इलाके में मौसम पर असामान्य प्रभाव दिखाई दे सकता है।
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क्यों चिंता की बात है प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ना? 

अल नीनो प्राकृतिक मौसमी घटना है। इस दौरान मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर की सतह का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, जो हवाओं और बारिश वाले बादलों को प्रभावित करता है। इसका महासागर से बहुत दूर के इलाकों में भी मौसम के पैटर्न में बदलाव होता है। इस बार यह खास तौर बेहद शक्तिशाली है। 
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विश्व मौसम विज्ञान संगठन के मुताबिक, नीनो 3.4 नाम के इलाके में जून में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 1.6 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था, जो अगस्त में 2.5 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। अक्तूबर से दिसंबर के बीय यह तापमान 3.7 डिग्री सेल्सियस अधिक हो सकता है। भारत को अल नीनो सीधे तौर पर प्रभावित करेगा। भारत की खेती और जल संसाधन मानसून पर निर्भर है, जिसे अल नीनो प्रभावित करेगा। भारत के लिए अल नीनो का शक्तिशाली होना बारिश और बढ़ते तापमान को लेकर चिंताएं बढ़ा सकता है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, 2026 में इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून से होने वाली बारिश सामान्य से 13 फीसदी कम हुई।


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विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अक्तूबर के पूर्वानुमान में संकेत मिला है कि आने वाले महीनों दक्षिण एशिया के बड़े इलाके में तापमान सामान्य से ज्यादा रह सकता है। इस इलाके में बारिश की संभावनाएं अलग-अलग हैं। अक्तूबर से दिसंबर के दौरान दक्षिण एशिया के मध्य और दक्षिणी प्रायद्वीपीय के बड़े इलाके में बारिश कम हो सकती है। 

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अली नीनो का भारत के मौसम पर प्रभाव 

भारत के मौसम को अकेले अल नीनो प्रभावित नहीं करता है। जलवायु पैटर्न और स्थानीय स्थितियां भी बारिश और तापमान पर असर डालती हैं। प्रशांत महासागर में असामान्य रूप से तापमान बढ़ने से खतरा पैदा हो सकता है। इसमें भीषण गर्मी और बारिश के पैटर्न में बदलाव हो सकता है। 

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