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दुनिया का इकलौता ऐसा शहर, जिसपर 75 साल पहले चार देशों का था कब्जा

Mon, 20 Jan 2020 10:49 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Mon, 20 Jan 2020 10:49 AM IST
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Berlin city which was occupied by four countries 75 years ago
बर्लिन शहर - फोटो : Pixabay

द्वितीय विश्व युद्ध के खत्म होने के बाद बर्लिन शहर की अजीबोगरीब स्थिति बन गई थी। ये टापू जैसे एक शहर में तब्दील हो गया था जिस पर चार मुल्कों का कब्जा था। हर एक मुल्क ने बर्लिन को अपने-अपने सेक्टरों में बांट रखा था। ये चारों मुल्क थे सोवियत संघ, अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस।

Berlin city which was occupied by four countries 75 years ago
बर्लिन शहर - फोटो : Social media

साल 1948 में एक अलग देश वेस्ट जर्मनी को अस्तित्व में लाने की कोशिशें शुरू हुईं और स्टालिन को इस पर एतराज था। स्टालिन ने बदला लेने के लिए उसके सेक्टर से लगने वाले पश्चिमी बर्लिन के हिस्सों को वेस्ट जर्मनी से काट दिया। हालात ऐसे बन गए कि पूर्वी जर्मनी के आस-पास के इलाकों के लिए पश्चिमी बर्लिन स्थाई रूप से गले की हड्डी बन गया और 13 अगस्त, 1961 को पलक झपकते ही चीजें नाटकीय रूप से बदल गईं।  

Berlin city which was occupied by four countries 75 years ago
बर्लिन शहर - फोटो : Social media

वो सुबह के एक बजे का वक्त था, पूर्वी जर्मनी की सीमा पुलिस और सशस्त्र बल सोवियत सेक्टर की सीमाओं पर तैनात कर दिए गए। उनके सामने दूसरी तरफ अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और पश्चिमी बर्लिन की पुलिस थी। पूर्वी जर्मनी की तरफ बड़े पैमाने पर कंटीले तार लगाने का काम शुरू हो गया, कंक्रीट के पोल जल्दबाजी में खड़े कर दिए गए। यहां तक कि पहले से मौजूद लैंपपोस्ट भी घेराबंदी के काम आ रहे थे। चार दिनों बाद पश्चिमी जर्मनी की परवाह किए बिना पूर्वी जर्मनी में कंक्रीट से बने ज्यादा स्थाई ढांचे का निर्माण शुरू कर दिया गया। यही बर्लिन की दीवार थी।

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Berlin city which was occupied by four countries 75 years ago
बर्लिन शहर - फोटो : Social media

एक मुद्दा पूर्वी जर्मनी से पश्चिम की तरफ हो रहा पलायन भी था। पूर्वी जर्मनी का हर छठा आदमी पश्चिम जर्मनी चला गया था और ये पलायन बर्लिन के रास्ते हुआ था। डॉक्टर, प्रोफेसर और इंजीनियर जिस तरह से पूर्वी जर्मनी छोड़कर पश्चिम की तरफ जा रहे थे, इसे देखते हुए 1958 के बाद कम्युनिस्ट प्रशासन के कान खड़े होने शुरू हो गए। एक ही साथ सख्ती और नरमी बरतने की नीति पूर्वी जर्मनी छोड़ने वाले लोगों को रोकने से नाकाम हो गई थी। 

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Berlin city which was occupied by four countries 75 years ago
1960 में बर्लिन शहर - फोटो : Social media

बर्लिन को चला रहे चारों मुल्कों के बीच इस बात पर भी रजामंदी हुई थी कि शहर में उनके नियंत्रण वाले इलाकों की सीमाएं खुली रखी जाएंगी, लेकिन ये शर्त पूर्वी जर्मनी से पलायन को सहूलियत ही दे रही थी। मई, 1960 में पूर्वी जर्मनी की कुख्यात खुफिया पुलिस का गठन हुआ, लेकिन ये भी पलायन करने वाले पांच लोगों में से एक को ही पकड़ पा रही थी। और वे इस नतीजे पर पहुंचे, 'पश्चिमी बर्लिन को पूरी तरह से बंद किया जाना मुमकिन नहीं था, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को पूर्वी जर्मनी के भरोसे छोड़ा नहीं जा सकता था।' इसलिए एक क्रांतिकारी समाधान की जरूरत महसूस की जाने लगी थी, और वो था पश्चिमी बर्लिन का अलगाव। यानी वो तरीका जिससे पूर्वी जर्मनी के लोगों को पूर्वी इलाके में रखा जाए और पश्चिमी जर्मनी का पूर्वी जर्मनी से संपर्क भी बना रहे। 

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