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बिहार: 20 हजार किताबों से सजा छपरा का अनोखा पूजा पंडाल, गुरुकुल से एआई तक की दिखी झलक

Mon, 19 Oct 2026 08:28 PM IST
सारण ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा Published by: सारण ब्यूरो Updated Mon, 19 Oct 2026 08:28 PM IST
सार

बिहार के छपरा में महावीर पूजा सेवा समिति ने करीब 20 हजार किताबों से अनोखा पूजा पंडाल तैयार किया है। गुरुकुल से एआई तक की झलक दिखाता यह पंडाल शिक्षा, पढ़ने की संस्कृति और मोबाइल के संतुलित इस्तेमाल का संदेश देता है।

 

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Chhapra's unique puja pandal decorated with 20,000 books in Chhapra, Bihar:
बिहार के छपरा में अनोखा पूजा पंडाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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किताबों से बढ़ती दूरी और मोबाइल की बढ़ती लत के बीच बिहार के छपरा में एक अनोखा पूजा पंडाल लोगों को शिक्षा और वास्तविक जीवन का महत्व समझा रहा है। शहर के इंदिरा नगर स्थित महावीर पूजा सेवा समिति ने करीब 20 हजार पुस्तकों से पंडाल तैयार किया है। यह पहल अपनी रचनात्मकता के साथ बच्चों और युवाओं को किताबों से जुड़ने का संदेश भी दे रही है। पंडाल में धार्मिक आस्था के साथ शिक्षा, तकनीक और सामाजिक जागरूकता को भी प्रमुखता दी गई है।

तकनीक से दूरी नहीं, उसके सही इस्तेमाल पर जोर
समिति की पहल मोबाइल के इस्तेमाल का विरोध करने के बजाय उसके संतुलित उपयोग का संदेश देती है। मोबाइल के माध्यम से ऑनलाइन पढ़ाई, नई जानकारियां हासिल करने और कौशल विकसित करने के अवसर मिलते हैं। जरूरत इस बात की है कि तकनीक का इस्तेमाल ज्ञान बढ़ाने और लक्ष्य हासिल करने के लिए किया जाए, न कि वह जीवन का अधिकांश समय अपने में समेट ले।

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गुरुकुल से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक की झलक
पंडाल में शिक्षा की प्राचीन परंपरा से लेकर आधुनिक तकनीक तक के सफर को कलात्मक ढंग से दर्शाया गया है। गुरुकुल की शिक्षा व्यवस्था से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दौर तक की झलक लोगों को ज्ञान की बदलती दुनिया से परिचित कराती है। पेंसिल, बॉल पेन और पढ़ाई में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्रियों को भी सजावट का हिस्सा बनाया गया है। पुस्तकों से तैयार पंडाल की संरचना लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
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यह परिकल्पना बताती है कि तकनीक कितनी भी विकसित क्यों न हो जाए, ज्ञान हासिल करने, विचारों को समझने और व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षा की भूमिका हमेशा अहम रहेगी। किताबें केवल परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे सोचने-समझने की क्षमता विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।



मोबाइल की लत छोड़ो, आज संभलोगे तो कल संवर जाएगा
पंडाल का सबसे प्रभावशाली संदेश मोबाइल की बढ़ती लत को लेकर है। मोबाइल और सोशल मीडिया पर जरूरत से ज्यादा समय बिताने की आदत बच्चों और युवाओं की पढ़ाई, नींद, दिनचर्या और पारिवारिक संवाद को प्रभावित कर सकती है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए समिति ने मोबाइल के दुरुपयोग से होने वाले नुकसान को अलग-अलग कलात्मक माध्यमों से सामने रखा है।

ध्यान भटकने, समय की बर्बादी, तनाव, नींद में परेशानी और अपनों से बढ़ती दूरी जैसे मुद्दों के जरिए लोगों को अपनी आदतों पर विचार करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। पंडाल का संदेश है कि समय रहते अपनी आदतों में सुधार कर लिया जाए, तो भविष्य को बेहतर बनाया जा सकता है।
 

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