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बिहार: 90 फीट के रावण और 80 फीट के मेघनाथ का होगा दहन, 'लोकल फॉर वोकल' की पहल से स्थानीय कलाकारों को मिला मौका

Tue, 20 Oct 2026 02:42 PM IST
सारण ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा Published by: सारण ब्यूरो Updated Tue, 20 Oct 2026 02:42 PM IST
सार

शहर के राजेंद्र स्टेडियम में 90 फीट ऊंचे रावण और 80 फीट ऊंचे मेघनाथ के पुतलों का निर्माण अंतिम चरण में चल रहा है। वहीं पीएम मोदी की ‘लोकल फॉर वोकल’ की ख्याल को रखते हुए विशालकाय पुतलों के निर्माण स्थानीय कलाकारों द्वारा किया जा रहा है।

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90 feet tall Ravana and 80 feet tall Meghnath will be burnt in Chhapra.
पुतला दहन की तैयारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार
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बिहार के छपरा में दशहरा का उत्सव इस बार विशालकाय पुतलों, रंगीन रोशनी और ई- पटाखों के आकर्षण के साथ सामाजिक सौहार्द का संदेश भी देगा। शहर के राजेंद्र स्टेडियम में 90 फीट ऊंचे रावण और 80 फीट ऊंचे मेघनाथ के पुतलों का दहन किया जाएगा। आयोजन की खास बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘लोकल फॉर वोकल’ की भावना को ध्यान में रखते हुए इस बार विशालकाय पुतलों के निर्माण की जिम्मेदारी स्थानीय कलाकारों को सौंपी गई है। वहीं, हिंदुओं के प्रमुख पर्व दशहरा के इस आयोजन की अध्यक्षता मुस्लिम समुदाय के सलीम परवेज कर रहे हैं। यह परंपरा छपरा की गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे को रेखांकित करती है।

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धार्मिक उत्सव से आगे, सामाजिक एकता की पहचान
छपरा का रावण पतन कार्यक्रम केवल रावण और मेघनाथ के पुतलों के दहन तक सीमित नहीं है। इसकी पहचान विभिन्न समुदायों की साझा भागीदारी और सामाजिक सौहार्द से भी जुड़ी हुई है। रावण पतन समिति की अध्यक्षता बिहार मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष एवं बिहार विधान परिषद के पूर्व सभापति शमीम परवेज कर रहे हैं। दशहरा जैसे प्रमुख हिंदू पर्व के आयोजन में उनकी भूमिका धार्मिक सद्भाव और साझा सांस्कृतिक विरासत का संदेश देती है।
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बताया जाता है कि इस आयोजन की शुरुआत में भी मुस्लिम समुदाय के लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। मोहम्मद ईशा को समिति का संस्थापक अध्यक्ष बताया जाता है। समय के साथ यह आयोजन छपरा की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन गया, जिसमें विभिन्न समुदायों के लोग मिलकर भाग लेते हैं। ऐसे आयोजन त्योहारों को सामाजिक मेलजोल, आपसी विश्वास और भाईचारे का माध्यम बनाते हैं।
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स्थानीय हुनर को बढ़ावा, ‘लोकल फॉर वोकल’ पर जोर
इस बार राजेंद्र स्टेडियम में रावण पतन कार्यक्रम को आकर्षक बनाने के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आयोजन समिति ने बाहर से कलाकार बुलाने के बजाय स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर दिया है। छपरा के कलाकार 90 फीट ऊंचे रावण और 80 फीट ऊंचे मेघनाथ के पुतले तैयार कर रहे हैं। स्थानीय सैंड आर्टिस्ट अशोक कुमार भी अपने हुनर से इन विशालकाय आकृतियों को आकर्षक रूप देने में जुटे हैं। स्थानीय कलाकारों को अवसर देने का उद्देश्य उनके हुनर को पहचान दिलाने के साथ क्षेत्रीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना है। ‘लोकल फॉर वोकल’ की भावना के अनुरूप यह पहल स्थानीय कला और कारीगरों को मंच देने का प्रयास है। इससे त्योहार के आयोजन में स्थानीय लोगों की भागीदारी भी बढ़ती है।

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रावण पतन समिति के अध्यक्ष वरुण प्रकाश ने बताया कि इस बार कार्यक्रम में ई- पटाखों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका उद्देश्य पारंपरिक पटाखों से होने वाले प्रदूषण को कम करते हुए दर्शकों को रंग- बिरंगी रोशनी और आकर्षक आतिशबाजी का अनुभव देना है। आईपीएल की तर्ज पर रंगीन आतिशबाजी भी कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होगी। वहीं समिति के संयोजक राजेश फैशन के अनुसार, स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता देना आयोजन की अहम विशेषता है। समिति को उम्मीद है कि कलाकारों के हुनर से तैयार पुतले अपनी भव्यता और कलात्मकता से लोगों का ध्यान आकर्षित करेंगे।

रोशनी और आतिशबाजी के बीच बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश
राजेंद्र स्टेडियम में होने वाले इस आयोजन को लेकर शहरवासियों में काफ़ी उत्साह है। विशालकाय पुतलों के दहन के साथ रंगीन रोशनी और ई- पटाखों का नजारा दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहेगा। दशहरा जहां बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, वहीं छपरा का रावण पतन सामाजिक एकता और साझा सांस्कृतिक परंपरा का संदेश भी देता है। सबसे अहम बात यह है कि स्थानीय कलाकारों को अवसर और विभिन्न समुदायों की भागीदारी इस आयोजन को विशिष्ट बनाती है। छपरा में रावण दहन की परंपरा एक बार फिर यह संदेश देगी कि त्योहारों की वास्तविक खूबसूरती केवल उनकी भव्यता में नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ने और आपसी सद्भाव मजबूत करने में भी है।

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