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Vat Savitri Vrat 2025: पति के लिए अखंड सौभाग्य की कामना, बिहार में वट सावित्री पर सुहागिनों ने किया व्रत

Mon, 26 May 2025 10:18 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना/ शिवहर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना/ शिवहर Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Mon, 26 May 2025 10:18 AM IST
सार

Bihar News: सोमवार को शहर और गांव की महिलाएं वट सावित्री व्रत रखकर अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की दुआ मांगी। सुहागिनें दुल्हन की तरह सजी-संवरी होकर बरगद के पेड़ के नीचे पहुंचीं और पूरी विधि से पूजा की।
 

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Bihar News vat savitri festival women celebrate husband wellbeing
जहानाबाद में वट सावित्री पूजा के दौरान लगी भीड़। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पटना, वैशाली, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, अररिया, सहरसा, सीतामढ़ी और शिवहर समेत लगभग सभी जिलों में सोमवार को महिलाओं ने वट सावित्री व्रत रखकर अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख शांति की कामना की। सुहागिनें दुल्हन की तरह सज धज कर वट (बरगद) के पेड़ के नीचे पहुंचीं और पूरे विधि विधान से पूजा की। शहर के कई हिस्सों में सुबह से ही वट वृक्ष के पास महिलाओं की भीड़ जुटी रही। पूजा के बाद सुहागिनों ने पेड़ की परिक्रमा की और वट सावित्री की पूजा पूरी श्रद्धा से की। इस व्रत में वट पेड़ और सावित्री दोनों का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश  तीनों देवताओं का वास होता है, ठीक वैसे ही जैसे पीपल के पेड़ में होता है।

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महिलाओं ने सुनी सावित्री सत्यवान की कथा
वट सावित्री व्रत के मौके पर महिलाओं ने बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर पूजा की और सावित्री सत्यवान की कथा सुनी। मान्यता है कि इस दिन व्रत कथा सुनने और पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मान्यता है कि इसी दिन सावित्री ने वट वृक्ष की पूजा करके अपने पति सत्यवान के प्राणों को यमराज से छुड़ा लिया था, बस तभी से ये व्रत रखा जाता है। इस दिन महिलाएं खूब सज-संवर कर अपने पति की तरक्की और लंबी उम्र के लिए पूजा-अचर्ना करती हैं। एक और कथा के अनुसार, मार्कण्डेय ऋषि को भगवान शिव के वरदान से वट के पत्ते पर बाल मुकुंद (भगवान विष्णु) के दर्शन हुए थे। तभी से वट वृक्ष की पूजा का महत्व बढ़ गया। माना जाता है कि वट वृक्ष की पूजा करने से घर में सुख शांति और धन समृद्धि आती है।

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सहरसा में वट वृक्ष की पूजा करतीं व्रती। - फोटो : अमर उजाला

नवविवाहित महिलाओं में दिखा जोश
वट सावित्री व्रत को सुहाग पर्व के रूप में पूरे जिले में धूमधाम से मनाया गया। खासकर नवविवाहित महिलाओं में इस व्रत को लेकर काफी उत्साह देखा गया। नई नई दुल्हनें सोलह श्रृंगार कर, नई साड़ी और गहनों के साथ सज धजकर वट वृक्ष की पूजा करने पहुंचीं। उन्होंने विधिपूर्वक पूजा की, पेड़ की परिक्रमा की और कच्चे सूत से पेड़ को लपेटा। पूजा में चना, पकवान, मौसमी फल और सुहाग की चीजें अर्पित की गईं। कई महिलाओं ने बताया कि उन्होंने अपनी मां, चाची और मामी को यह व्रत करते देखा था और अब वे खुद यह व्रत रखकर पति की लंबी उम्र और अच्छे जीवन के लिए आशीर्वाद मांग रही हैं।
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मांगा सुहाग का आशीर्वाद
बरगद के पेड़ के नीचे सुहागिनों ने भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की। उन्होंने अपने सुहाग की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना भी की। पूजा में फल, पूड़ी, भीगे हुए चने और बरगद के पत्ते अर्पित किए गए। महिलाएं पूजा के लिए सिंदूर, दर्पण, मौली, काजल, मेहंदी, चूड़ी, माथे की बिंदी, नई साड़ी, सात तरह के अनाज और सत्यवान सावित्री की मूर्ति लेकर आई थीं।

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