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Bihar: ट्रेन के शौचालय में छुपा था शराब का जखीरा, उत्पाद विभाग ने किया खुलासा; सात डिलीवरी बॉय गिरफ्तार

Wed, 25 Jun 2025 04:55 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुज्जफरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुज्जफरपुर Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो Updated Wed, 25 Jun 2025 04:55 PM IST
सार

Bihar: फिलहाल पकड़े गए सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और विभाग इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान में जुटा है। शुरुआती जांच में यह एक अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह प्रतीत हो रहा है, जिसमें असम और बिहार के कई लोग शामिल हैं।

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Muzaffarpur Bihar news: excise team decode wine supplier code in train toilet seven arrest muzaffarpur
ट्रेन से अनोखी तस्करी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्पाद विभाग की टीम ने शराब तस्करी के एक ऐसे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जो लंबे दूरी की ट्रेनों के शौचालय के डैशबोर्ड में शराब छुपाकर एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचा रहा था। इस मामले में विभाग ने सात डिलीवरी बॉय को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से असम निर्मित अवैध शराब की बड़ी खेप बरामद की गई है।

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गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे गुवाहाटी से चलने वाली अवध-असम एक्सप्रेस ट्रेन के थर्ड एसी कोच के शौचालय के भीतर बने डैशबोर्ड को खोलकर शराब की बोतलें उसमें छुपाते थे। ये काम ट्रेन के गुवाहाटी यार्ड में ही कर लिया जाता था ताकि स्टेशन पर किसी को शक न हो। फिर ट्रेन के बिहार पहुंचते ही, खासकर समस्तीपुर स्टेशन पर, गिरोह के सदस्य तय कोड के आधार पर शराब निकाल लेते थे।
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समस्तीपुर में होती थी डिलीवरी, मुजफ्फरपुर में होती थी सप्लाई
गिरोह के सदस्य समस्तीपुर में ट्रेन से शराब निकालकर उसे ‘पिट्टू बैग’ में भरकर मुजफ्फरपुर के डिलीवरी बॉयज़ को सौंप देते थे। हर खेप के लिए इन्हें 800 से 1000 रुपये कमीशन मिलता था। इस तस्करी को इतने सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया जाता था कि किसी को संदेह न हो। उत्पाद विभाग की टीम के मुताबिक, असम में मौजूद गिरोह का मास्टरमाइंड पहले शराब को ट्रेन में छुपाता था और फिर कोडवर्ड के जरिए बिहार के धंधेबाजों को उसकी जानकारी देता था। यही कोड आगे डिलीवरी बॉयज तक पहुंचता था।
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शौचालय के डैशबोर्ड से मिले स्क्रू और औजार
जब टीम ने ट्रेन की जांच की तो शौचालय के डैशबोर्ड से स्क्रू और उपकरण भी बरामद हुए, जिनसे शराब छुपाने का इंतजाम किया जाता था। इससे साफ है कि ये लोग लंबे समय से इस नेटवर्क को चला रहे थे। इस कार्रवाई का नेतृत्व कर रहे उत्पाद निरीक्षक दीपक कुमार सिंह ने बताया कि गिरोह पिछले कई महीनों से ट्रेन के इसी पैटर्न का इस्तेमाल कर रहा था। अब विभाग अन्य ट्रेनों की भी जांच कर रहा है, जिससे पता चल सके कि क्या इसी तरीके से और ट्रेनों का भी उपयोग हो रहा है।

गिरफ्तारी और जब्ती के बाद आगे की कार्रवाई जारी
फिलहाल पकड़े गए सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और विभाग इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान में जुटा है। शुरुआती जांच में यह एक अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह प्रतीत हो रहा है, जिसमें असम और बिहार के कई लोग शामिल हैं।

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