धरोहर: पिता के सपनों को पूरा कर रही बिहार की बेटी, लोकगीत में पहचान बना पारंपरिक संस्कृति को सहेजने में जुटी
Anjali Thakur: लोक गायिका अंजलि बताती हैं कि उन्होंने बचपन से एक बड़े मंच पर पहुंचने का सपना दिल में संजो कर रखा था। एक दोस्त के पापा का सहयोग रहा है। पीजी की पढ़ाई भी म्यूजिक से ही पूरी की। आज के दौर में शॉर्टकट के चक्कर में लोग आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन मैं उससे थोड़ा हटकर काम कर रही हूं।
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पाश्चात्य संस्कृति के कारण जहां हम एक ओर अपनी पुरानी और महान पारंपरिक संस्कृति के लोकगीतों को भूल रहे हैं। वहीं, इन दिनों भोजपुरी में बढ़ती अश्लीलता से समाज में उपेक्षा का भाव भी पैदा हो रहा है। ऐसे में बिहार के मुजफ्फरपुर की बेटी अंजली अपनी पारंपरिक संस्कृति को आधार बनाकर लोकगीतों को एक नई दिशा और गति देने में जुटी हुई हैं। आज अपनी आवाज से बिहार ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों में भी बिहार की पारंपरिक संस्कृति की पहचान मानी जाने वाली शैली मैथिली और भोजपुरी के संगीत से अपनी गीत के माध्यम से आयाम देने में लगी हैं। अंजली कहती हैं कि उनके पिता का सपना था कि वह भोजपुरी की महान लोक गायिका शारदा सिन्हा को आदर्श मान गायकी में अपना भविष्य बनाएं।
अंजली पिता को मानती हैं आदर्श और मार्गदर्शक
मुजफ्फरपुर निवासी अंजली ठाकुर अपनी गायकी से अपने क्षेत्र में खूब नाम कमा रही हैं। वह बिहार ही नहीं बल्कि दूसरे राज्य में भी जाकर बिहार की परंपरा की खुशबू गाने के माध्यम से बिखेर कर बिहार की पहचान को सहेजने में लगी हुई हैं। अंजली बताती हैं कि वह बचपन से ही पारंपरिक मैथिली और भोजपुरी के गीत से शुरू हुआ संगीत का सफर को आज एक नए मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया है।
वह इसका श्रेय अपने पिता को देती हैं और कहती हैं कि पिता चाहते थे कि उनकी बेटी बिहार की पहचान और संस्कृति को जीवंत रखने का काम करे। खुद पिता शारदा सिन्हा और उनकी भाव वत्सल करने वाले गीतों को लेकर बेहद गंभीर थे। अब बेटी भी उनके कदम पर चले और इस क्षेत्र में ही अपना मुकाम हासिल करे। लिहाजा अंजली हिंदी के अलावा भोजपुरी और मैथिली में भी गाती हैं। उनकी मधुर आवाज को लोग भी खूब पसंद करते हैं। उनके मैथली गाने की धुन को सुनकर लोग मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। हाल ही में प्रसिद्ध हुआ उनका एक ऐसा भजन है जिसे शायद ही कोई होगा जिसने नहीं सुना होगा। 'मेरी झोपड़ी के भाग, आज खुल जाएंगे, राम आएंगे, राम आएंगे… राम आएंगे तो अंगना सजाऊंगी' इस गीत को अंजली बेहतरीन तरीके से गाती हैं।
गांव-शहर के लोगों के सहयोग ने दी प्रेरणा
अंजली ठाकुर पीजी की छात्रा रह चुकी हैं। इनकी पढ़ाई-लिखाई जिले के सकरा इलाके से हुई है और इनके पापा पेशे से डॉक्टर हैं। बचपन से ही अंजली की आवाज में एक अलग सा जादू था। गांव के अंदर कोई भी समारोह में अंजली को ही बुलाया जाता, जहां वह अपनी आवाज से चार चांद लगा देती थीं।
अंजलि बताती हैं कि उन्होंने बचपन से एक बड़े मंच पर पहुंचने का सपना दिल में संजो कर रखा था। एक दोस्त के पापा का सहयोग रहा है। पीजी की पढ़ाई भी म्यूजिक से ही पूरी की। आज के दौर में शॉर्टकट के चक्कर में लोग आगे बढ़ना चाहते हैं। लेकिन मैं उससे थोड़ा हटकर काम कर रही हूं। हमारे द्वारा गाए गाने को परिवार के साथ सभी लोग बैठकर सुनते हैं।