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चमत्कार या चालबाजी?: ठाकुरबाड़ी से बेशकीमती मूर्तियां चोरी, नौ महीने बाद पेड़ के नीचे मिली; कैसे घिर गई पुलिस
Tue, 09 Sep 2025 01:26 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,बेगूसराय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,बेगूसराय
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Tue, 09 Sep 2025 01:26 PM IST
सार
बेगूसराय जिले के मंझौल थाना क्षेत्र के पबरा गांव में नौ महीने पहले ठाकुरबाड़ी से चोरी हुई भगवान की दो मूर्तियां अचानक एक फूल के पेड़ के नीचे प्रकट हुईं। पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन बिना किसी वैज्ञानिक जांच के मूर्तियों को हाथ से उठाकर कपड़े में लपेट ले गई।
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चोरी के 9 महीने बाद मिली मूर्तियां
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बेगूसराय जिले के मंझौल थाना क्षेत्र के पबरा गांव में एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। करीब नौ महीने पहले ठाकुरबाड़ी से चोरी हुई भगवान की दो मूर्तियां अचानक एक फूल के पेड़ के नीचे प्रकट हो गईं। घटना से ग्रामीणों में उत्सुकता और धार्मिक आस्था का माहौल है। लेकिन इस बीच पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है। मौके पर पहुंची टीम ने बिना किसी वैज्ञानिक जांच और सावधानी के मूर्तियों को खुले हाथों से उठाया और कपड़े में लपेटकर अपने साथ ले गई। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से चोरों तक पहुंचने का सुराग हाथ से निकल गया।
गौरतलब है कि 13 जनवरी 2025 की रात पबरा ब्राह्मण टोला स्थित ठाकुरबाड़ी से कई बेशकीमती और प्राचीन मूर्तियां चोरी हुई थीं। इस मामले में पुजारी रामविलास झा ने अज्ञात चोरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। चोरी हुई मूर्तियों की कीमत करोड़ों में आंकी गई थी।
पढ़ें: वैशाली में ऑनलाइन ठगी का खुलासा, दो आरोपी गिरफ्तार; थाने में शिकायत करने पर देते थे धमकी
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ग्रामीणों का आरोप है कि ऐसी बड़ी बरामदगी पर पुलिस को एफएसएल या डॉग स्क्वायड टीम को बुलाना चाहिए था, लेकिन बिना जांच के मूर्तियों को उठा ले जाना गैर-जिम्मेदाराना कदम है। लोगों ने मांग की है कि न केवल बरामदगी की वैज्ञानिक जांच हो, बल्कि दोषियों की गिरफ्तारी कर हिंदू धर्म की आस्था से खिलवाड़ करने वालों को सजा दिलाई जाए।
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गौरतलब है कि 13 जनवरी 2025 की रात पबरा ब्राह्मण टोला स्थित ठाकुरबाड़ी से कई बेशकीमती और प्राचीन मूर्तियां चोरी हुई थीं। इस मामले में पुजारी रामविलास झा ने अज्ञात चोरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। चोरी हुई मूर्तियों की कीमत करोड़ों में आंकी गई थी।
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ग्रामीणों का आरोप है कि ऐसी बड़ी बरामदगी पर पुलिस को एफएसएल या डॉग स्क्वायड टीम को बुलाना चाहिए था, लेकिन बिना जांच के मूर्तियों को उठा ले जाना गैर-जिम्मेदाराना कदम है। लोगों ने मांग की है कि न केवल बरामदगी की वैज्ञानिक जांच हो, बल्कि दोषियों की गिरफ्तारी कर हिंदू धर्म की आस्था से खिलवाड़ करने वालों को सजा दिलाई जाए।