पिता वेल्डर, बेटे को माइक्रोसॉफ्ट ने दी 1.02 करोड़ की जॉब
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बिहार के खगड़िया में वेल्डिंग की एक छोटी सी दुकान करने वाले चन्द्रकांत सिंह की जिंदगी कुछ ही घंटों के अंतराल में पूरी तरह बदल गई है। नाते रिश्तेदारों की बधाइयों के लगातार फोन तो आ ही रहे हैं मीडिया के कैमरों ने भी उनके मकान की चमक बढ़ा दी है।
वजह भी कुछ ऐसी ही है, वेल्डिंग करके परिवार की गुजर बसर करने वाले चन्द्रकांत सिंह के बेटे वात्सल्य को दुनिया की दिग्गज साफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने 1.02 करोड़ की जॉब ऑफर की है। वात्सल्य ने माइक्रोसॉफ्ट के इस ऑफर को स्वीकार कर लिया है हालांकि वह अक्टूबर के आसपास कंपनी ज्वाइन करेंगे।
वात्सल्य आईआईटी खड़गपुर से बीटेक अंतिम वर्ष के छात्र हैं। माइक्रोसॉफ्ट के इस ऑफर की जानकारी आईआईटी के निदेशक पार्थ चक्रवर्ती ने अपने फेसबुक पेज पर दी। इसके बाद से ही वात्सल्य चर्चाओं के केन्द्र में आ गए, जो आईआईटी से होते हुए खगड़िया के उनके छोटे से घर तक पहुंच गई।
आईआईटी खड़गपुर के छात्र हैं वात्सल्य
खगड़िया से माइक्रोसॉफ्ट तक का वात्सल्य का सफर देखने में जितना चकाचौंध भरा दिखता है उसके पीछे उतना ही संघर्ष छिपा है। वात्सल्य ने 12वीं तक की पढ़ाई बिहार बोर्ड से ही की है। बकौल वात्सल्य 10वीं तक वह आईआईटी के बारे में कुछ नहीं जानते थे।
लेकिन 12वीं पास करते ही उन्होंने आईआईटी में जाने की ठान ली और जेईईई का एग्जाम दिया, लेकिन तैयारी न होने के कारण नंबर नहीं आया। हालांकि इस झटके ने उनके मन में आईआईटी में एडमिशन की इच्छा बलवती कर दी।
इसके बाद उन्होंने तैयारी के लिए कोटा जाने का मन बनाया, लेकिन घर की हालत ऐसी नहीं थी कि उनका खर्चा उठाया जा सके। बेटे के मन की उलझन को पिता ने समझा और जैसे तैसे कर उन्हें तैयारी के लिए कोटा भेज दिया।
वात्सल्य ने भी पिता को निराश नहीं किया और एक साल की तैयारी के बाद ही आईआईटी खड़गपुर में प्रवेश कर लिया। जहां उन्हें पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप भी मिल गई। काबिल बेटे ने पिता की मेहनत को वसूल करते हुए खुद को साबित कर दिखाया। बेटे के माइक्रोसॉफ्ट में चयन पर पिता चन्द्रकांत सिंह का कहना है कि उनकी 20 साल की मेहनत का फल उन्हें मिल गया।