राजनीतिक जमीन मजबूत करने को सड़क पर उतरे लालू
बिहार में विधानपरिषद चुनावों में पटखनी खाने के दो दिन बाद ही लालू ने भाजपा और केन्द्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। अपने राजनीतिक वारिस दोनों बेटों और पूरे दलबल के साथ पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव पटना की सड़कों पर उतरे।
मौका था, जनगणना के जातिगत आंकडों को सार्वजनिक करने की मांग को लेकर केन्द्र सरकार के खिलाफ मार्च निकालने का और निशाना था आगामी विधानसभा चुनावों में अपनी जमीन मजबूत करने का। दोनों ही मोर्चों पर लालू यादव ने दमदार उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास किया।
हालांकि इस दौरान लालू के नए साझीदार और राजनीतिक सखा नीतीश कुमार और उनका दल इस पूरे मार्च से दूर ही रहा। बताया जा रहा है कि नीतीश दिल्ली में होने वाली सोनिया गांधी की इफ्तार पार्टी में भाग लेने के लिए राजधानी पहुंचने वाले हैं।
जेडीयू-भाजपा के मुकाबले सुस्त पड़ा है राजद
वहीं उनकी उपस्थिति में लालू ने मार्च का नेतृत्व करते हुए केन्द्र सरकार से जातिगत आंकडे जारी करने की मांग की। लालू का कहना था कि केन्द्र सरकार को पिछली जनगणना में जुटाए गए जातिगत आंकडों को सार्वजनिक करना चाहिए।
जिससे पता चल सके कि देश में किस जाति की कितनी भागीदारी है। राजद का सुबह से शुरू हुआ मार्च दोपहर बाद तक चला। इस दौरान उनके दोनों बेटे तेज प्रताप और तेजस्वी यादव मौजूद रहे।
वहीं माना जा रहा है कि बिहार विधान परिषद चुनाव में शिकस्त खाने के बाद लालू ने जल्द से जल्द राजनीतिक जमीन पुख्ता करने के लिए कवायद तेज कर दी है।
दूसरा, लालू के सामने दिक्कत ये भी है कि नीतीश कुमार जहां लगातार राजनीतिक स्तर पर अपनी सक्रियता बढ़ाए हुए हैं वहीं लालू इसमें पिछड़ते जा रहे हैं। नीतीश कुमार ने बीते दो महीने में ही मतदाताओं से जुड़ने के लिए छोटे बड़े तीन अभियान शुरू कर दिए हैं वहीं लालू और उनकी पार्टी इस मामले में सुस्त पड़ी हुई है।