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Bihar News: थानाध्यक्ष पर रंगदारी और मारपीट का आरोप, FIR दर्ज और आवास सील; पीड़ित युवक ने सुनाई आपबीती

Fri, 23 May 2025 02:53 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहरसा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहरसा Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Fri, 23 May 2025 02:53 PM IST
सार

Saharsa News: पीड़ित युवक का आरोप है कि उसे स्कॉर्पियो में जबरन बैठाकर मुसहनियां और पथराहा की ओर ले जाया गया, रास्ते भर गाली-गलौज और धमकियां दी गईं। कहा गया कि अगर एक लाख रुपये नहीं दिए तो बैग में स्मैक और कोरेक्स डालकर जेल भेज दिया जाएगा। पढ़ें पूरी खबर...।

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Saharsa: SHO accused of extortion and assault, FIR registered and residence sealed; victim narrated his ordeal
आरोपी एसएचओ अमर ज्योति के खिलाफ एफआईआर दर्ज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार पुलिस की छवि को धक्का पहुंचाने वाला एक गंभीर मामला सहरसा जिले से सामने आया है। जहां बैजनाथपुर थाना के थानाध्यक्ष अमर ज्योति पर एक युवक को बेवजह उठाकर थाने में बंद करने, मारपीट करने और 79 हजार रुपये अवैध रूप से वसूलने का आरोप लगा है। आरोप सही पाए जाने के बाद थानाध्यक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उनका सरकारी आवास सील कर दिया गया है।

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एसपी के निर्देश पर जांच के बाद की गई कार्रवाई
मामले की शिकायत मिलने के बाद सहरसा एसपी हिमांशु ने पूरे मामले की जांच सदर एसडीपीओ आलोक कुमार से कराई थी। जांच रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि होने पर एसपी ने बुधवार को थानाध्यक्ष अमर ज्योति को लाइन हाजिर कर दिया। वहीं, गुरुवार को दंडाधिकारी की उपस्थिति में उनके आवास की तलाशी ली गई और उसे सील कर दिया गया। इसके साथ ही बैजनाथपुर थाना में ही थानाध्यक्ष सहित अन्य पुलिसकर्मियों और कथित बिचौलियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मामले की जांच की जिम्मेदारी अब सिमरी बख्तियारपुर एसडीपीओ मुकेश कुमार ठाकुर को सौंपी गई है।
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युवक ने लगाए गंभीर आरोप
मूल रूप से मधेपुरा जिले के परमानंदपुर पथराहा गांव निवासी अविनाश कुमार पटना में रहकर बीपीएससी की तैयारी करते हैं। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी एक लिखित आवेदन के माध्यम से एसपी को दी थी। उन्होंने बताया कि तीन मई को वे राज्यरानी एक्सप्रेस से पटना से सहरसा आए थे और वहां से मधेपुरा जाने वाली ट्रेन का टिकट लिया।


 
जब वह प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर ट्रेन का इंतजार कर रहे थे, तभी 5-6 अजनबी लोगों ने उन्हें जबरन पकड़ लिया और प्लेटफॉर्म नंबर 4 की ओर ले गए। उनका मोबाइल भी छीन लिया गया। युवक ने विरोध किया तो धमकाते हुए पूछने लगे कि तेरे पास कितना है? युवक का कहना है कि डर के मारे वह कुछ समझ नहीं पा रहा था और इस बीच ट्रेन छूट गई। फिर उसे स्टेशन से बाहर पैदल ले जाया गया और प्रशांत मोड़ के पास पहुंचने पर एक स्कॉर्पियो वाहन मंगवाया गया, जिसमें पुलिस का बोर्ड लगा था। वाहन में मौजूद व्यक्ति ने अपना नाम मुकेश पासवान बताया और यह कहा कि साथ में बैजनाथपुर थानाध्यक्ष अमर ज्योति बाबू, एक रूपेश और अन्य लोग हैं।
 
‘स्मैक के साथ फंसा देंगे’ की धमकी देकर मांगी गई मोटी रकम
अविनाश का आरोप है कि उसे स्कॉर्पियो में जबरन बैठाकर मुसहनियां और पथराहा की ओर ले जाया गया, रास्ते भर गाली-गलौज और धमकियां दी गईं। कहा गया कि अगर एक लाख रुपये नहीं दिए तो बैग में स्मैक और कोरेक्स डालकर जेल भेज दिया जाएगा। उसके बाद युवक को बैजनाथपुर थाने लाकर एक कमरे में बंद कर दिया गया और फिर बाहर निकाल कर बेरहमी से पीटा गया। उसके परिवार वालों से एक लाख रुपये मंगाने को कहा गया। किसी तरह से चौकीदार के फोन से उसने परिजनों से संपर्क किया।


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परिजनों से पैसे लेने के बाद छोड़ा, मोबाइल अब भी नहीं मिला
पीड़ित युवक ने आगे बताया कि उसके पिता ने 29 हजार रुपये नकद दिए और शेष 50 हजार रुपये दो अलग-अलग पेफोन नंबरों पर अपने मित्र मोहम्मद सद्दाम के जरिए ट्रांसफर कराए। थानाध्यक्ष ने बताया कि यह डीआईयू (डिटेक्टिव इन्वेस्टिगेशन यूनिट) का मामला है और डीआईयू के सिपाही को भी हिस्सा देना होगा। पैसे देने के बाद युवक को छोड़ तो दिया गया, लेकिन उसका मोबाइल फोन अभी तक नहीं लौटाया गया है।
 
पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में थाने के कुछ पुलिसकर्मियों और बिचौलियों की मिलीभगत भी सामने आई है। सवाल यह भी उठता है कि आखिर कैसे पुलिस की वर्दी और गाड़ी का इस्तेमाल कर युवक को स्टेशन से उठाया गया और एक थाने में ले जाकर घंटों बंद रखा गया, प्रताड़ित किया गया, और फिर मोटी रकम लेकर छोड़ा गया।

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