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Election 2024: वोट का रिकॉर्ड बाद में टूटेगा, फिलहाल बिहार के इन नेताओं की सभा में कुर्सियां कैसे टूट रहीं

Wed, 10 Apr 2024 07:03 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद Published by: शबाहत हुसैन Updated Wed, 10 Apr 2024 07:03 PM IST
सार

Election 2024: पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को करीब से देखने के लिए रफीगंज में आरजेडी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में होड़ लग गयी। सब के सब कुर्सियों पर चढ़ गए। नतीजतन बेचारी प्लास्टिक की बेजान दर्जनों कुर्सियां न केवल टूट गई बल्कि मर भी गई। 

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Tejashwi Yadav meeting in rafiganj chairs were broken hindi
बिखरी कुर्सियां - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रफीगंज में आरजेडी कार्यकर्ताओं ने तेजस्वी यादव की सभा में कुर्सियां तोड़ दी। मरी हुई कुर्सियों पर चढ़कर कार्यकर्ता तेजस्वी यादव जिंदाबाद के नारे लगाते रहे। शोर शराबा होता रहा। शोर शराबें के बीच तेजस्वी कार्यकर्ताओं में जोश भरते रहे। विरोधियों पर निशाना साधते रहे। अपने उम्मीदवार अभय कुशवाहा को जिताने की हामी भराते रहे। सबकुछ हो गया। कार्यकर्ताओं में जोश भी भर गया पर कुर्सियों का क्या दोष? दोष यह कि वें छोटी कुर्सियां ठहरी और बड़ी कुर्सी तक जाने का रास्ता छोटी-छोटी कुर्सियों को रौंद कर ही बनता है। 

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कुर्सियों का रौंदा जाना कोई नई बात नही है। खासकर तेजस्वी यादव के मामले में। तेजस्वी की सभा में कुर्सियां बलि का बकरा बनती ही है। याद कर लीजिए जब तेजस्वी लोकसभा चुनाव के पहले जब जन विश्वास यात्रा पर औरंगाबाद आए थे, तब भी गांधी मैदान में दर्जनों कुर्सियां टूटी थी। रफीगंज में भी बेचारी कुर्सियां टूट गई तो नया क्या हुआ? राजनीति में कुर्सियों का टूटना और उखड़ना नई बात नही है। पुरानी बात है। पुराना ढर्रा है। पुराना ट्रेंड है। कुर्सियां टूटती ही नही अदला बदली भी होती है।
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कुर्सी के लिए सारा बम बखेड़ा और झमेला
शाम में जिस कुर्सी का त्याग करते है। सुबह होते ही फिर से उसी कुर्सी पर बैठ जाते है। कुर्सियां इसी के लिए बनी है। जिस काम के लिए बनी है, वही काम उनके साथ हो रहा है तो दोष क्यो ? इसलिए कुर्सियां अपना काम करती रहो। टूटती रहो। बनती बिगड़ती रहो पर दोष किसी को मत दो। दोष देकर पाप की भागी न बनो क्योंकि कुर्सी है तो देश है, जनता है, नेता है, दल है, दलदल है, कार्यकर्ता है, वोट है और वोटर है। कुर्सी ही सबकुछ है। कुर्सी के लिए सारा बम बखेड़ा और झमेला है। 

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