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पितृपक्ष महोत्सव 2026: गयाजी से पहले यहां होता है पहला पिंडदान, दो दिन मनेगा महोत्सव

Tue, 15 Sep 2026 01:00 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 15 Sep 2026 01:00 PM IST
सार

औरंगाबाद के जम्होर स्थित विष्णुधाम मंदिर परिसर में 25 और 26 सितंबर को दो दिवसीय पितृपक्ष महोत्सव 2026 का आयोजन होगा। महोत्सव की तैयारियों को लेकर डीएम अभिलाषा शर्मा ने पुनपुन-बटाने संगम क्षेत्र का निरीक्षण किया और श्रद्धालुओं के लिए साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश, सुरक्षा, यातायात और पिंडदान स्थल की व्यवस्थाएं बेहतर करने के निर्देश दिए।

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Pitripaksh 2026: 2 days pitripaksh festival held on 25 26th september aurangabad bihar news today
महोत्सव आयोजन स्थल का निरीक्षण करती डीएम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार का गयाजी पितृपक्ष के दौरान पिंडदान के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। पुराणों में वर्णित है कि गयाजी में पितरों को पिंडदान करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी वजह से गयाजी को मोक्षनगरी भी कहा जाता है। पितरों के पिंडदान की परंपरा का जुड़ाव औरंगाबाद से भी है। मान्यता है कि यहीं से पुराणों में आदि गंगा के रूप में वर्णित पुनपुन नदी निकलती है। इसे गयाजी श्राद्ध का प्रवेश द्वार माना जाता है। पुराणों के अनुसार पुनपुन नदी में पितरों को पहला पिंडदान किए बिना गयाजी में किया गया श्राद्ध अधूरा माना जाता है और उसका फल पितरों को प्राप्त नहीं होता। यही वजह है कि देश-विदेश से आने वाले पिंडदानी और श्रद्धालु पहले औरंगाबाद पहुंचकर पुनपुन नदी में पिंडदान करते हैं और इसके बाद गयाजी जाकर पितरों के श्राद्ध-तर्पण का विधान पूरा करते हैं।

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पितरों को मोक्ष दिलाने वाले पितृपक्ष की महत्ता को लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से जम्होर के स्थानीय लोगों ने पितृपक्ष महोत्सव की शुरुआत की थी। अब यह आयोजन सरकारी महोत्सव का रूप ले चुका है। इस बार बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से 25 और 26 सितंबर को दो दिवसीय पितृपक्ष महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। महोत्सव को सफल बनाने के लिए औरंगाबाद जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं।

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महोत्सव की तैयारी को लेकर डीएम ने किया स्थल निरीक्षण

इसी कड़ी में सोमवार को औरंगाबाद की जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने पितृपक्ष महोत्सव 2026 के सफल, सुव्यवस्थित और गरिमापूर्ण आयोजन को लेकर सदर प्रखंड के जम्होर स्थित विष्णुधाम मंदिर परिसर और पुनपुन-बटाने संगम क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने आयोजन स्थल का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को सभी जरूरी तैयारियां समय पर पूरी करने का निर्देश दिया।

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निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने श्रद्धालुओं की सुविधा को सबसे अधिक प्राथमिकता देने को कहा। उन्होंने आयोजन स्थल पर साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, घाट और पिंडदान स्थल समेत अन्य जरूरी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि महोत्सव में आने वाले श्रद्धालुओं और आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं आयोजन से पहले ही पूरी कर ली जाएं। आयोजन स्थल और आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई के साथ पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था रखने पर भी उन्होंने विशेष जोर दिया।

विष्णुधाम मंदिर न्यास समिति को नियमित समीक्षा का निर्देश

जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों और विष्णुधाम मंदिर न्यास समिति के सदस्यों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और आयोजन से जुड़ी सभी तैयारियों की नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पितृपक्ष महोत्सव धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है। इसलिए इसकी गरिमा और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सभी व्यवस्थाएं बेहतर तरीके से सुनिश्चित की जानी चाहिए।

डीएम ने विष्णुधाम मंदिर परिसर में हाईमास्ट लाइट लगाने का भी निर्देश दिया। इसके अलावा संगम तट पर स्थित पिंडदान स्थल के पास श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जिला परिषद के माध्यम से घाट निर्माण कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा। घाट और प्रकाश की बेहतर व्यवस्था होने से श्रद्धालुओं को पिंडदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान काफी सुविधा मिलेगी। निरीक्षण के दौरान अपर समाहर्ता अनुग्रह नारायण सिंह, सदर अनुमंडल पदाधिकारी गौरव सिंह, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी कुमार पप्पू राज, विष्णुधाम मंदिर न्यास समिति के सदस्य सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

पितृपक्ष के दौरान ही होगा दो दिवसीय महोत्सव

पितृपक्ष महोत्सव 2026 का आयोजन 25 और 26 सितंबर को दो दिवसीय कार्यक्रम के रूप में किया जाएगा। यह आयोजन सदर प्रखंड के जम्होर और बारुण के बीच पुनपुन और बटाने नदियों के संगम पर स्थित विष्णुधाम मंदिर परिसर में होगा। महोत्सव में धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं के साथ स्थानीय कला और संस्कृति को भी प्रमुखता दी जाएगी। दो दिनों तक चलने वाले महोत्सव में निर्गुण और भजन गायन सहित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति होगी। इससे श्रद्धालुओं और आम लोगों को धार्मिक आस्था के साथ स्थानीय कला-संस्कृति से जुड़ा आध्यात्मिक वातावरण भी देखने और अनुभव करने का अवसर मिलेगा।

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