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News Impact: गया DM की स्वास्थ्य विभाग संग बैठक, डेंगू पुष्टि के लिए JPN और मगध में एलिसा टेस्ट के दिए निर्देश
Tue, 27 Aug 2024 08:42 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, गया
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, गया
Published by: अरविंद कुमार
Updated Tue, 27 Aug 2024 08:42 PM IST
सार
बिहार के गया जिले में अमर उजाला की खबर का असर देखने को मिला है। दरअसल, गया शहर में डेंगू के बढ़ते प्रकोप को लेकर खबर प्रकाशित की गई थी। ऐसे में गया डीएम ने स्वास्थ्य विभाग के साथ बैठक कर इन अस्पतालों में डेंगू जांच के निर्देश दिए।
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खबर का असर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अमर उजाला पर 'गया शहर में डेंगू से हड़कंप' शीर्षक से खबर प्रकाशित की गई थी। इस खबर का अब असर हुआ है। दरअसल, गया कलेक्टर त्यागराजन एसएम ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों संग बैठक कर कई दिशा-निर्देश दिए।
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बता दें कि गया शहर में डेंगू के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय है। आमजन में डेंगू से बचाव के बारे में जागरुकता लाने के साथ-साथ चिकित्सकों को भी इलाज संबंधी प्रशिक्षण दिया गया है। इसी क्रम में मंगलवार को शहर के जेपीएन सदर अस्पताल सभागार कक्ष में सभी सामुदायिक तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों तथा संस्थान के एक एमबीबीएस डॉक्टर को डेंगू उपचार पर प्रशिक्षण दिया गया। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. एमई हक ने नेशनल गाइड लाइन फॉर क्लीनिकल मैनेजमेंट आफ डेंगू फीवर का जिक्र करते हुए बताया, डेंगू होने पर सुरक्षात्मक उपाय अपनाना आवश्यक है। इस दौरान सिविल सर्जन डॉ. रंजन कुमार सिंह भी मौजूद रहे।
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नवंबर तक सचेत रहने की जरूरत
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. रंजन सिंह ने बताया कि डेंगू रोग एडिज मच्छर के काटने से होता है। डेंगू का मच्छर साफ पानी में पनपता है और दिन में काटता है। इसलिए घर में या घर के आसपास पानी का जमाव न होने दें। आठ से दस दिन में लार्वा मच्छर का रूप ले लेता है। कूलर, गमला या ऐसी जगह जहां पर पानी जमा होता है, उसकी सफाई करते रहें। डेंगू का मच्छर चार सौ मीटर की ऊंचाई तक उड़ सकता है। अगस्त से नवंबर तक इस बीमारी को लेकर सचेत रहने की अत्यंत आवश्यकता है। डेंगू का मच्छर 16 डिग्री से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच अधिक निकलता है। यह तब अधिक सक्रिय होता है, जब 70 फीसदी से अधिक ह्यूमिडिटी होती है। तापमान घटने के साथ इसका असर भी कम होता जाता है।
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डेंगू की पुष्टि के लिए एलिसा टेस्ट
डॉ. हक ने बताया कि मच्छर से बचाव के लिए फुल बांह वाले कपड़ा पहनें। दिन में भी मच्छरदानी लगाकर सोएं तथा मच्छर भगाने वाली क्रीम या धुंआ आदि का उपयोग करें। इसके लक्षण में हड्डी तोड़ बुखार, शरीर पर चकता उभर आना, उल्टी, भूख नहीं लगना, आंख के पीछे वाले हिस्से में दर्द आदि हैं। ऐसा होने पर सरकारी अस्पताल में चिकित्सक से मिलें। यहां पर आरडीटी किट उपलब्ध है। इससे स्क्रीनिंग की जाती है। पुष्टि के लिए जेपीएन सदर अस्पताल तथा मगध मेडिकल अस्पताल में एलिसा टेस्ट किया जाता है। तीन से चार दिन तक बुखार रहता है। बुखार घटने के दौरान ही सबसे जोखिम भरा समय होता है। इसी दौरान शरीर के अंदर या बाहर रक्तस्राव होने की संभावना बढ़ जाती है।
डॉ. हक ने बताया कि डेंगू बुखार में प्लेटलेट्स कम हो जाता है। लेकिन इसके लिए बहुत अधिक परेशान नहीं होना है। यह जानकारी रखें कि प्लेटलेट्स दस हजार प्रति क्यूबिक मिलीलीटर से नीचे होने पर इसे चढ़ाया जाना चाहिए। बच्चे, गर्भवती महिलाएं और बूढ़े तथा दूसरी गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को सबसे अधिक बचाव के लिए ध्यान रखना है। बुखार होने पर ब्लड प्रेशर काफी नीचे जा रहा है, पेशाब नहीं हो रहा है या सामान्य से कम हो रहा है या उल्टी होने पर अस्पताल में मरीज को भर्ती कराना है। सभी प्राथमिक तथा सामुदायिक अस्पताल में दो बेड डेंगू मरीजों के लिए सुरक्षित रखा गया है और यहां सभी चिकित्सकों को डेंगू चिकनगुनिया से बचाव के लिए प्रशिक्षित किया गया है।