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Bihar News: तिलकुट और अनारसा से जुड़े लघु उद्योग के कारोबारियों को बजट से बड़ी उम्मीदें, जानें उनकी मांगें

Sun, 14 Jul 2024 05:27 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Sun, 14 Jul 2024 05:27 PM IST
सार

Gaya News: बिहार राज्य मिष्ठान भोजन विक्रेता संघ के कार्यकारी अध्यक्ष लालजी प्रसाद ने बताया कि बजट में सरकार की ओर से खाद्य सामग्री को अगर सस्ता नहीं किया गया तो इसका असर हम लोगों के रोजगार पर भी पड़ सकता है, क्योंकि हम लोगों का कोई मुख्य भोजन नहीं है।

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Gaya News: Small scale businessmen associated with Tilkut and Anarsa have high expectations from budget
कारोबारियों ने महंगाई और परिवहन दर घटाने की मांग की - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर भारत की सांस्कृतिक नगरी गया जी मौसमी मिठाइयों के लिए मशहूर है। तिलकुट और अनारसा को गया की प्रमुख पारंपरिक मिठाई के रूप में देश-विदेश में जाना जाता है। बरसात में अनारसा और जाड़े में तिलकुट इन सब में गया की अलग विशेषता है। गया का तिलकुट और अनारसा बिहार और झारखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश में प्रसिद्ध है। गया शहर में लगभग 100 से भी अधिक घरों में यह कारोबार किया जाता है। इस कारोबार में 10 हजार से भी ज्यादा लोग जुड़े हैं। इस कारोबार की शुरुआत करीब डेढ़ सौ वर्ष पूर्व शुरू किया गया था, जो आज के दौर में एक खानदानी कारोबार के रूप में पेशा बन गया है। गया का खस्ता तिलकुट और अनारसा झारखंड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों में भेजा जाता है। इसके अलावा नेपाल, भूटान, बंगलादेश, यूके, मॉरसिस और यूएस समेत कई देशों में यह पसंद किया जाता है।

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Gaya News: Small scale businessmen associated with Tilkut and Anarsa have high expectations from budget
तिलकुट और अनारसा से जीएसटी हटाने तथा जीआई टैग जारी करने की मांग - फोटो : अमर उजाला

इस संबंध में श्रीराम तिलकुट भंडार के प्रोपराइटर धीरेंद्र कुमार केसरी ने बताया कि बजट से यही उम्मीद है कि थोड़ी सी महंगाई जो है, आज कल हर चीजों में थोड़ी महंगाई ज्यादा बढ़ गई है। हम लोग चाहते हैं कि थोड़ा नीचे आए। अब मिठाई बहुत बेसिक जरूरत हो गई है और सरकार ने इसको लक्जरी आइटम में रखा है। लेकिन आज कल इसको छोटे-छोटे घरों में भी मिठाइयों की जरूरत होती है। चाहे छोटा पर्व हो या बड़ा पर्व हो हर जगह थोड़ी मिठाइयों की जरूरत होती है। इस पर जो जीएसटी पांच प्रतिशत का लगा हुआ है। सरकार से हम चाहते हैं कि यह जीएसटी से बाहर आए। मिठाई तो खाने-पीने की चीज है। इस पर जो जीएसटी लगा हुआ है, इसे जीएसटी के दायरे से बाहर रखा जाए। दूसरा यह है कि अगर परिवहन (ट्रांसपोर्टेशन) दर (रेट) बढ़ती है तो सारी चीजों का दाम बढ़ जाता है। उस पर भी ध्यान देने की बात है ताकि जो भी सामान आता है उसका कीमत कम हो जाए। इस तरह से हम आशा करते हैं कि जो नई सरकार बनी है, उनका यह तीसरा टर्म है तो कुछ हम लोगों के लिए करें। यही उम्मीद लगाए हुए है।
 

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Gaya News: Small scale businessmen associated with Tilkut and Anarsa have high expectations from budget
श्रीराम तिलकुट भंडार के प्रोपराइटर धीरेंद्र कुमार केसरी - फोटो : अमर उजाला

उन्होंने बताया कि इस रोजगार में काफी लोग लगे हुए हैं और यह काफी छोटे स्तर पर होता है, क्योंकि सूक्ष्म उद्योग है। इसमें तकरीबन 600 से 800 परिवार के लोग गया शहर में लगे हुए हैं। इसका उद्योग बहुत बड़ा है, लेकिन राज्य या केंद्र सरकार का इस पर ध्यान नहीं जा रहा है। चूंकि इसको उद्योग के रूप में नहीं देख रहे हैं। अगर हम इसको एक तरीके से करें और इस कार्य में जो कारीगर जुड़े हुए हैं, उनको हम प्रशिक्षण दें और उनके बारे में सोचें तो इस रोजगार को आगे ले जा सकते हैं। इसकी पैकेजिंग भी है, क्योंकि यहां से जब लोग ले जाते हैं बाहर तो टूटने का डर होता है। अगर इस पर भी ध्यान दिया जाए तो इसको और भी ऊपर ले जाया जा सकता है।
 

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बिहार राज्य मिष्ठान भोजन विक्रेता संघ के कार्यकारी अध्यक्ष लालजी प्रसाद - फोटो : अमर उजाला

वहीं, बिहार राज्य मिष्ठान भोजन विक्रेता संघ के कार्यकारी अध्यक्ष लालजी प्रसाद ने बताया कि बजट में सरकार की ओर से खाद्य सामग्री (खाने पीने की चीज) को अगर सस्ता नहीं किया गया तो इसका असर हम लोगों के रोजगार पर भी पड़ सकता है, क्योंकि हम लोगों का कोई मुख्य भोजन नहीं है। ऐसे रोजगार को बढ़ाने के लिए सरकार से निवेदन करेंगे कि वह महंगाई पर अंकुश लगाए और खाद्य सामग्री में तो जीएसटी एकदम खत्म कर दे। खाद्य सामग्री में जीएसटी लेना कहीं से भी उचित नहीं लगता है। यही निवेदन है और हम लोगों की बहुत पुरानी मांग है। हम लोग 2017 से जीआई टैग की मांग कर रहे हैं। अब हम लोग नाबाद के माध्यम से आवेदन दिए हुए हैं, लेकिन आज तक हम लोगों को जीआई टैग नहीं मिला है। जबकि हम लोगों के बगल में खाजा है, उसको जीआई टैग मिला गया है। लेकिन पता नहीं तिलकुट, अनारसा और लाई को जीआई टैग मिलने में कहां रुकावट है? यह समझ में नहीं आ रहा है। अगर सरकार इस बजट में हमारी इस मांग को पूरा कर देती है तो बहुत अच्छा होगा और सरकार को धन्यवाद देंगे।

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