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Bihar: बिस्कोमान उर्वरक बिक्री केंद्र पर यूरिया खाद के लिए किसानों में भिड़ंत, जमकर चले लात-घूसे
Tue, 16 Sep 2025 05:30 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,औरंगाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,औरंगाबाद
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Tue, 16 Sep 2025 05:30 PM IST
सार
औरंगाबाद जिले में यूरिया खाद की किल्लत और कालाबाजारी को लेकर बिस्कोमान उर्वरक बिक्री केंद्र पर मंगलवार को किसानों के बीच जमकर मारपीट और धक्का-मुक्की हुई।
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खाद के लिए किसानों में झगड़ा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
धान के मिनी कटोरे कहे जाने वाले औरंगाबाद जिले में उर्वरक की किल्लत और कालाबाजारी ने किसानों को बेहाल कर दिया है। स्थिति यह हो गई कि मंगलवार को डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक परिसर स्थित बिस्कोमान उर्वरक बिक्री केंद्र पर यूरिया खाद के लिए किसानों के बीच जमकर मारपीट और धक्का-मुक्की हुई। इस दौरान बिक्री केंद्र का पूरा परिसर रणभूमि में तब्दील हो गया।
सुबह से ही सहकारी केंद्र पर सैकड़ों किसान भूखे-प्यासे कतार में खड़े थे। जैसे ही स्टॉक कम होने की जानकारी मिली, वैसे ही किसानों का सब्र टूट गया और "पहले मैं, पहले मैं" की होड़ में लात-घूंसे चलने लगे। नौबत सिर फुटौव्वल तक पहुंच गई और मौके पर मौजूद बिक्री केंद्र के कर्मी मूकदर्शक बने रहे। गनीमत रही कि कुछ समझदार किसानों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया, वरना बड़ी घटना हो सकती थी।
टॉप ड्रेसिंग के लिए किसानों को जरूरी यूरिया
धान की फसल अब बालियां देने की तैयारी में है और इस चरण में टॉप ड्रेसिंग यानी यूरिया खाद का छिड़काव बेहद जरूरी होता है। यदि किसान समय पर खाद नहीं डाल पाए तो पैदावार पर असर पड़ेगा। यही कारण है कि यूरिया के लिए किसानों की बेताबी बढ़ गई है। जहां सक्षम किसान कालाबाजारी से महंगे दामों पर खाद खरीद रहे हैं, वहीं बाकी किसान सहकारी संस्थाओं के केंद्रों का रुख कर रहे हैं, जहां उन्हें लंबी कतारों और अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है।
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बिस्कोमान केंद्र पर सुबह से लगी लंबी कतारें स्टॉक कम होने की खबर सुनते ही बेकाबू हो गईं। किसान आपस में भिड़ गए और स्थिति हिंसक हो गई। धक्का-मुक्की, मारपीट और बांस तक से हमला करने की नौबत आ गई। इस बीच, बिक्री केंद्र के अधिकारी और कर्मचारी सिर्फ तमाशा देखते रहे। औरंगाबाद के जिलाधिकारी श्रीकांत शास्त्री ने खाद संकट की खबरों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि अच्छी बारिश के कारण इस बार अधिक रकबे में धान की खेती हुई है, जिससे अस्थायी दिक्कत आई। अब तक जिले में दो लाख बोरी यूरिया वितरित किया जा चुका है। मंगलवार को 8 हजार बैग की आपूर्ति की जा रही है और दो दिनों में 27 हजार और बोरी पहुंचेगी। डीएम ने आश्वासन दिया कि किसानों को जरूरत के अनुसार खाद उपलब्ध कराया जाएगा और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई जारी है।
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सुबह से ही सहकारी केंद्र पर सैकड़ों किसान भूखे-प्यासे कतार में खड़े थे। जैसे ही स्टॉक कम होने की जानकारी मिली, वैसे ही किसानों का सब्र टूट गया और "पहले मैं, पहले मैं" की होड़ में लात-घूंसे चलने लगे। नौबत सिर फुटौव्वल तक पहुंच गई और मौके पर मौजूद बिक्री केंद्र के कर्मी मूकदर्शक बने रहे। गनीमत रही कि कुछ समझदार किसानों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया, वरना बड़ी घटना हो सकती थी।
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टॉप ड्रेसिंग के लिए किसानों को जरूरी यूरिया
धान की फसल अब बालियां देने की तैयारी में है और इस चरण में टॉप ड्रेसिंग यानी यूरिया खाद का छिड़काव बेहद जरूरी होता है। यदि किसान समय पर खाद नहीं डाल पाए तो पैदावार पर असर पड़ेगा। यही कारण है कि यूरिया के लिए किसानों की बेताबी बढ़ गई है। जहां सक्षम किसान कालाबाजारी से महंगे दामों पर खाद खरीद रहे हैं, वहीं बाकी किसान सहकारी संस्थाओं के केंद्रों का रुख कर रहे हैं, जहां उन्हें लंबी कतारों और अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है।
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स्टॉक की कमी से बिगड़ा माहौलबिस्कोमान केंद्र पर सुबह से लगी लंबी कतारें स्टॉक कम होने की खबर सुनते ही बेकाबू हो गईं। किसान आपस में भिड़ गए और स्थिति हिंसक हो गई। धक्का-मुक्की, मारपीट और बांस तक से हमला करने की नौबत आ गई। इस बीच, बिक्री केंद्र के अधिकारी और कर्मचारी सिर्फ तमाशा देखते रहे। औरंगाबाद के जिलाधिकारी श्रीकांत शास्त्री ने खाद संकट की खबरों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि अच्छी बारिश के कारण इस बार अधिक रकबे में धान की खेती हुई है, जिससे अस्थायी दिक्कत आई। अब तक जिले में दो लाख बोरी यूरिया वितरित किया जा चुका है। मंगलवार को 8 हजार बैग की आपूर्ति की जा रही है और दो दिनों में 27 हजार और बोरी पहुंचेगी। डीएम ने आश्वासन दिया कि किसानों को जरूरत के अनुसार खाद उपलब्ध कराया जाएगा और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई जारी है।