समस्तीपुर में बनेगा 110 फीट ऊंचा दुर्गापूजा पंडाल, 26 फीट की होंगी मां दुर्गा; वृंदावन की झांकी भी सजेगी
समस्तीपुर के शिव काली दुर्गा हनुमान मंदिर में दक्षिणेश्वर काली मंदिर की तर्ज पर 110 फीट ऊंचा पंडाल बन रहा है। यहां 26 फीट की मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित होगी। अष्टमी से विसर्जन तक वृंदावन की झांकी भी सजेगी।
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शारदीय नवरात्र के अवसर पर समस्तीपुर के शिव काली दुर्गा हनुमान मंदिर में इस बार श्रद्धालुओं को भव्य धार्मिक नजारा देखने को मिलेगा। यहां कोलकाता के प्रसिद्ध दक्षिणेश्वर काली मंदिर की तर्ज पर 110 फीट ऊंचा पूजा पंडाल तैयार किया जा रहा है। पंडाल में मां दुर्गा की 26 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इसके साथ ही अष्टमी से लेकर प्रतिमा विसर्जन तक श्रद्धालुओं को वृंदावन की झांकी के दर्शन भी होंगे। भव्य पंडाल, विशाल प्रतिमा और धार्मिक झांकी को लेकर पूजा समिति तैयारियों में जुटी है।
पंडाल को आकर्षक रूप देने के लिए 15 कारीगर पिछले एक महीने से लगातार काम कर रहे हैं। वहीं, मां दुर्गा की विशाल प्रतिमा को अंतिम रूप देने में करीब 10 कारीगर जुटे हैं। मंदिर परिसर में निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। आयोजकों का प्रयास है कि नवरात्र के दौरान यहां आने वाले श्रद्धालुओं को भव्य सजावट के साथ धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव मिले।
अष्टमी से विसर्जन तक वृंदावन की झांकी बनेगी आकर्षण
इस बार पूजा की खासियत केवल 110 फीट ऊंचा पंडाल और मां दुर्गा की 26 फीट ऊंची प्रतिमा ही नहीं होगी। श्रद्धालुओं के लिए अष्टमी से लेकर प्रतिमा विसर्जन तक वृंदावन की झांकी भी सजाई जाएगी। पूजा समिति के सदस्य महेंद्र प्रधान के अनुसार, इस आयोजन के माध्यम से श्रद्धालुओं को धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
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नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु पंडाल की भव्यता के साथ वृंदावन की झांकी का भी आनंद ले सकेंगे। इसके लिए समिति की ओर से तैयारियां की जा रही हैं। पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों को परंपरागत तरीके से संपन्न कराने की व्यवस्था भी की जा रही है।
1990 से हो रहा आयोजन, हर साल कुछ नया करने की कोशिश
शिव काली दुर्गा हनुमान मंदिर में वर्ष 1990 से दुर्गापूजा का आयोजन किया जा रहा है। पूजा समिति के सदस्य महेंद्र प्रधान ने बताया कि ग्रामीणों के सहयोग से प्रत्येक वर्ष दुर्गापूजा आयोजित की जाती है। हर साल आयोजन को और आकर्षक बनाने के लिए कुछ नया करने का प्रयास किया जाता है। इसी क्रम में इस बार दक्षिणेश्वर काली मंदिर की तर्ज पर 110 फीट ऊंचा पंडाल बनाया जा रहा है और मां दुर्गा की 26 फीट ऊंची प्रतिमा तैयार कराई जा रही है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष पूजा आयोजन पर करीब 15 से 20 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। पंडाल और प्रतिमा निर्माण के साथ अन्य धार्मिक व्यवस्थाओं पर भी राशि खर्च की जाएगी। आयोजन में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रहती है और उनके सहयोग से ही पूजा की तैयारियां पूरी की जाती हैं।
प्राचार्य राम सजीवन झा के पुरोहितत्व में होंगे धार्मिक अनुष्ठान
पूजा समिति की ओर से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना विधि-विधान से संपन्न कराने की तैयारी की गई है। संस्कृत महाविद्यालय, हसुआ के प्राचार्य राम सजीवन झा के पुरोहितत्व में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए जाएंगे। समिति का प्रयास है कि पूजा की परंपराओं का निर्वहन करते हुए श्रद्धालुओं को मां के दर्शन करने और धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर मिले।
कारीगरों की मेहनत, ग्रामीणों का सहयोग
पंडाल निर्माण से लेकर मां दुर्गा की प्रतिमा तैयार करने तक कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। ग्रामीण भी आयोजन को सफल बनाने में सहयोग कर रहे हैं। भव्य पंडाल, विशाल प्रतिमा और वृंदावन की झांकी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनने की उम्मीद है।
वर्ष 1990 से चली आ रही दुर्गापूजा की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस बार आयोजन को नया स्वरूप देने की तैयारी है। नवरात्र नजदीक आने के साथ ही क्षेत्र में पूजा को लेकर उत्साह बढ़ रहा है। अब श्रद्धालुओं को पंडाल के तैयार होने और मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा के दर्शन का इंतजार है।