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बिहार: आठ सीटों पर एमएलसी चुनाव में कहां, कौन चर्चा में? किन दिग्गजों की प्रतिष्ठा मतपेटी में कल होगी बंद
Thu, 22 Oct 2026 03:05 PM IST
आदित्य आनंद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: आदित्य आनंद
Updated Thu, 22 Oct 2026 03:05 PM IST
सार
Bihar MLC Election News: स्नातक की चार और शिक्षक की चार विधान परिषद सीटों के लिए शुक्रवार को मतदान होना है। कितने वोटर, किन सीटों पर किन दिग्गजों में से किनकी चर्चा कर रहे; हर सवाल का जवाब पढ़ें एक जगह।
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बिहार विधान परिषद चुनाव।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर प्रचार थम चुका है, लेकिन उम्मीदवार अपनी-अपनी जीत का दावा करते हुए अंतिम दौर में जनसंपर्क अभियान में जुटे हैं। चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में 23 अक्तूबर यानी कल मतदान होना है। इसके लिए सारी तैयारी पूरी हो चुकी है। इस बार मुकाबला सिर्फ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) बनाम महागठबंधन तक सीमित नहीं दिख रहा है। जन सुराज ने सभी आठ सीटों पर प्रत्याशी उतारकर मुकाबले को बहुकोणीय बनाया है। वहीं राजद-कांग्रेस के बीच कई सीटों पर अलग-अलग प्रत्याशी मैदान में हैं। कोसी स्नातक, दरभंगा स्नातक, पटना स्नातक और पटना शिक्षक पर तो राजद और कांग्रेस में सीधी टक्कर है। दूसरी ओर कुछ सीटों पर एनडीए गठबंधन के भीतर से ही अलग सुर सामने आए हैं। सबसे ज्यादा चर्चा पटना स्नातक सीट की है। इस सीट पर जदयू के प्रत्याशी नीरज कुमार का विरोध अनंत सिंह कर रहे हैं। वह जनसुराज के प्रत्याशी के समर्थन में वोट मांग रहे हैं। इतना ही नहीं सारण शिक्षक सीट पर आरएलएम के तीन विधायकों ने अलग रुख ने एनडीए के भीतर भी सवाल खड़े किए हैं। इधर, अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने भी इस बार अपने उम्मीदवारों को कुछ सीटों पर उतारा है।
चार स्नातक और चार शिक्षक सीटों पर कुल कितने मतदाता?
2026 के विधान परिषद चुनाव में में पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र तथा पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। 23 अक्तूबर को मतदान होगा। मतगणना 27 अक्तूबर को होगी। बता दें कि यह सामान्य विधानसभा चुनाव जैसा चुनाव नहीं है। स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में निर्धारित योग्यता वाले पंजीकृत स्नातक मतदाता और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में पात्र शिक्षक मतदाता मतदान करते हैं। चार स्नातक सीटों पर करीब 4.85 लाख मतदाता हैं, जबकि चार शिक्षक सीटों पर करीब 45,660 मतदाता हैं। इस तरह शुक्रवार को कुल 532847 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 386199 पुरुष और 146611 महिला हैं। स्नातक श्रेणी की सीटों के लिए कुल 492594 और शिक्षक श्रेणी की सीटों के लिए 40253 मतदाता हैं। इनमें 37 थर्ड जेंडर मतदाता हैं। कुल 933 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
पटना स्नातक: नीरज कुमार के सामने अनुज सिंह, अनंत सिंह फैक्टर से बदला समीकरण
पटना स्नातक सीट इस बार सबसे अधिक चर्चा में है। जदयू ने मौजूदा विधान पार्षद नीरज कुमार को फिर मैदान में उतारा है। उनके सामने जन सुराज के अनुज सिंह हैं। राजद ने दिलीप कुमार और कांग्रेस ने असदुल्लाह खान को प्रत्याशी बनाया है। आम आदमी पार्टी ने भी हिमांशु पटेल को मैदान में उतारा है। इस सीट का राजनीतिक पेंच सिर्फ प्रत्याशियों की संख्या तक सीमित नहीं है। जदयू के मोकामा विधायक अनंत सिंह ने जन सुराज प्रत्याशी अनुज सिंह के समर्थन का रुख अपनाया है। नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच पुराने मतभेद को लेकर हाल में जदयू नेतृत्व को हस्तक्षेप करना पड़ा। ललन सिंह ने एक दिन पहले ही कहा था कि अनंत सिंह नीरज कुमार के समर्थन में प्रचार नहीं करेंगे, हालांकि सार्वजनिक तौर पर उनके खिलाफ भी नहीं बोलेंगे। बता दें कि पटना स्नातक में 88,111 मतदाता हैं, जो चारों स्नातक सीटों में सबसे कम है। ऐसे में यहां प्रत्याशियों के बीच वोटों का बंटवारा चुनावी गणित का महत्वपूर्ण पहलू है। यानी यहां मुकाबले को केवल दो ध्रुवों का चुनाव मानना मुश्किल है। जदयू, जन सुराज, राजद और कांग्रेस के प्रत्याशी अलग-अलग मैदान में हैं और इनके बीच मतों का विभाजन महत्वपूर्ण होगा।
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पटना शिक्षक: नवल किशोर यादव के सामने राजद, कांग्रेस और जन सुराज
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा ने मौजूदा विधान पार्षद नवल किशोर यादव को फिर प्रत्याशी बनाया है। राजद ने पूर्व विधायक डॉ. संजीव कुमार को और कांग्रेस ने संजय यादव को मैदान में उतारा है। जन सुराज की ओर से दिव्या ज्योति प्रत्याशी हैं। इस सीट पर 16,689 मतदाता हैं, जो चारों शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा हैं। पटना शिक्षक सीट पर राजद और कांग्रेस के अलग-अलग प्रत्याशी होने के कारण महागठबंधन के भीतर भी चुनावी प्रतिस्पर्धा है। ऐसे में मुकाबले को केवल एनडीए बनाम विपक्ष के रूप में देखना तस्वीर को अधूरा छोड़ देगा।
दरभंगा स्नातक: एक ही सीट पर महागठबंधन के तीन दल से तीन उम्मीदवार
दरभंगा स्नातक सीट पर भाजपा ने सर्वेश कुमार को प्रत्याशी बनाया है। सर्वेश कुमार पिछली बार भाजपा से टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय चुनाव जीतकर विधान परिषद पहुंचे थे। इस बार भाजपा ने उन्हें अपने प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतारा है। राजद ने अनिल कुमार झा और कांग्रेस ने रजनीकांत पाठक को मैदान में उतारा है। इस सीट पर महागठबंधन पर तीन दलों के उम्मीदवार ही एक दूसरे को टक्कर दे रहे हैं। भाकपा माले से संदीप चौधरी ने राजद-कांग्रेस के उम्मीदवार को सीधी टक्कर देने का एलान किया है। जन सुराज की ओर से इम्तियाज नूरानी प्रत्याशी हैं। इसके अलावा अन्य प्रत्याशी भी मैदान में हैं। दरभंगा स्नातक सीट पर करीब 1.27 लाख मतदाता हैं। इस सीट पर बहुकोणीय मुकाबले की तस्वीर दिखाई दे रही है। महागठबंधन के भीतर तालमेल और स्थानीय स्तर पर समर्थन का सवाल भी चर्चा में है।
दरभंगा शिक्षक: कांग्रेस के मदन मोहन झा बनाम जदयू के घनश्याम राय
दरभंगा शिक्षक सीट पर कांग्रेस ने मौजूदा विधान पार्षद और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा को फिर मैदान में उतारा है। राजद ने शिक्षक नेता रहे वचन राउत को चुनावी मैदान में उतारा है। इधर, जदयू ने घनश्याम राय को प्रत्याशी बनाया है। जन सुराज की ओर से इस सीट पर सुरेश प्रसाद राय को प्रत्याशी बनाया गया है। दरभंगा शिक्षक सीट पर 8,967 मतदाता हैं, जो चारों शिक्षक सीटों में सबसे कम हैं।
तिरहुत स्नातक: निर्दलीय वंशीधर के सामने राजद-जदयू
तिरहुत स्नातक सीट पर जदयू ने अभिषेक झा को प्रत्याशी बनाया है। जन सुराज ने डॉ. विमोहन कुमार और राजद ने डॉ. रश्मि विनायक गौतम को मैदान में उतारा है। डॉ रश्मि विनायक गौतम को राजद ने स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया है। पूर्व प्रत्याशी डॉ विनायक गौतम की पत्नी है और खुद डॉक्टर है। इनके ससुर डॉ रामकुमार सिंह पूर्व एमएलसी रह चुके हैं। वहीं आम आदमी पार्टी ने भी रिषी अग्रवाल को प्रत्याशी घोषित किया है। वहीं निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर वंशीधर ब्रजवासी ने भी चुनावी मैदान हैं। वंशीधर निवर्तमान विधान परिषद सदस्य भी हैं। पिछली बार यह सीट जदयू के पास गई थी। तब यहां से देवेश चंद्र ठाकुर चुनाव जीते थे। हालांकि, उनके लोकसभा जाने के बाद इस सीट पर हुए उपचुनाव (2024) में वंशीधर ब्रजवासी ने बाजी मार ली। उन्होंने अभिषेक झा को हराया था। बता दें कि इस सीट पर करीब 1.35 लाख मतदाता हैं, जो चारों स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में सबसे अधिक हैं।
तिरहुत शिक्षक: महागठबंधन में भीतरघात, टॉपर्स घोटाले के मुख्य आरोपी भी मैदान में
तिरहुत शिक्षक सीट पर भाजपा ने नरेंद्र प्रसाद सिंह को प्रत्याशी बनाया है। जन सुराज ने श्याम नंदन यादव को मैदान में उतारा है। महागठबंधन की ओर से यह सीट भाकपा के मौजूदा विधान पार्षद संजय कुमार सिंह के हिस्से में है। संजय कुमार सिंह लगातार दो बार चुनाव जीत चुके है। लेकिन, यहां कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता राजेश राठौर के निर्दलीय मैदान में उतरने से गठबंधन के भीतर अतिरिक्त चुनौती की स्थिति बनी है। वहीं राजद ने अपना समर्थन निवर्तमान विधान परिषद सदस्य संजय सिंह को दिया है। खास बात यह है कि टॉपर्स घोटाले के मुख्य आरोपी बच्चा राय भी इस सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ चुके हैं। तिरहुत शिक्षक सीट पर 9,204 मतदाता हैं।
कोसी स्नातक सीट पर भाजपा ने मौजूदा विधान पार्षद डॉ. एनके यादव को फिर प्रत्याशी बनाया है। जदयू ने इस सीट पर प्रत्याशी नहीं उतारा है। राजद के नितेश कुमार, कांग्रेस के मनोज कुमार जायसवाल और जन सुराज के रजनीश रंजन भी मैदान में हैं। कोसी स्नातक में करीब 1.34 लाख मतदाता हैं। यहां एनडीए की ओर से भाजपा का एक प्रत्याशी है, जबकि विपक्षी खेमे में राजद और कांग्रेस अलग-अलग प्रत्याशी के साथ मैदान में हैं। जन सुराज की मौजूदगी इसे और बहुकोणीय बनाती है। इस सीट पर वोटों के विभाजन का सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि स्नातक मतदाताओं की संख्या बड़ी है और कई राजनीतिक दल अपने-अपने संगठन के जरिए समर्थन जुटाने में लगे हैं।
सारण शिक्षक: यहां एनडीए प्रत्याशी के खिलाफ रालोमो के तीन विधायक
सारण शिक्षक सीट इस चुनाव के नामांकन तक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के भीतर उभरे मतभेद के कारण चर्चा में रहा। यहां जदयू ने आनंद पुष्कर को प्रत्याशी बनाया है। इसी सीट पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा के तीन विधायक निर्दलीय उम्मीदवार रामपुकार सिन्हा के नामांकन कार्यक्रम में पहुंचे थे। रालोमो में टूट की बात सामने आई। हालांकि, रामपुकार सिन्हा ने अपना नामांकन वापस ले लिया और जदयू उम्मीदवार को समर्थन देने की बात कही। इधर, इस सीट पर जनसुराज से अफाक अहमद चुनाव लड़ रहे हैं। वह पिछले बार निर्दलीय जीते थे। जनसुराज ने उन्हें समर्थन दिया था। इनके अलावा राजद से जयराम यादव, जदयू से आनंद पुष्कर चुनावी मैदान में हैं। पुष्कर पिछली बार वामदल से चुनाव लड़े थे। इनके पिता स्व. केदार पांडेय इसी क्षेत्र से लंबे समय तक एमएलसी रहे थे। वहीं भाजपा के प्रदेश कमेटी में रहे राहुल राज भी निर्दलीय चुनावी मैदान में हैं। इनके अलावा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े रमेंद्र राय भी निर्दलीय ही चुनावी मैदान में हैं।
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चार स्नातक और चार शिक्षक सीटों पर कुल कितने मतदाता?
2026 के विधान परिषद चुनाव में में पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र तथा पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। 23 अक्तूबर को मतदान होगा। मतगणना 27 अक्तूबर को होगी। बता दें कि यह सामान्य विधानसभा चुनाव जैसा चुनाव नहीं है। स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में निर्धारित योग्यता वाले पंजीकृत स्नातक मतदाता और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में पात्र शिक्षक मतदाता मतदान करते हैं। चार स्नातक सीटों पर करीब 4.85 लाख मतदाता हैं, जबकि चार शिक्षक सीटों पर करीब 45,660 मतदाता हैं। इस तरह शुक्रवार को कुल 532847 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 386199 पुरुष और 146611 महिला हैं। स्नातक श्रेणी की सीटों के लिए कुल 492594 और शिक्षक श्रेणी की सीटों के लिए 40253 मतदाता हैं। इनमें 37 थर्ड जेंडर मतदाता हैं। कुल 933 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
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पटना स्नातक: नीरज कुमार के सामने अनुज सिंह, अनंत सिंह फैक्टर से बदला समीकरण
पटना स्नातक सीट इस बार सबसे अधिक चर्चा में है। जदयू ने मौजूदा विधान पार्षद नीरज कुमार को फिर मैदान में उतारा है। उनके सामने जन सुराज के अनुज सिंह हैं। राजद ने दिलीप कुमार और कांग्रेस ने असदुल्लाह खान को प्रत्याशी बनाया है। आम आदमी पार्टी ने भी हिमांशु पटेल को मैदान में उतारा है। इस सीट का राजनीतिक पेंच सिर्फ प्रत्याशियों की संख्या तक सीमित नहीं है। जदयू के मोकामा विधायक अनंत सिंह ने जन सुराज प्रत्याशी अनुज सिंह के समर्थन का रुख अपनाया है। नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच पुराने मतभेद को लेकर हाल में जदयू नेतृत्व को हस्तक्षेप करना पड़ा। ललन सिंह ने एक दिन पहले ही कहा था कि अनंत सिंह नीरज कुमार के समर्थन में प्रचार नहीं करेंगे, हालांकि सार्वजनिक तौर पर उनके खिलाफ भी नहीं बोलेंगे। बता दें कि पटना स्नातक में 88,111 मतदाता हैं, जो चारों स्नातक सीटों में सबसे कम है। ऐसे में यहां प्रत्याशियों के बीच वोटों का बंटवारा चुनावी गणित का महत्वपूर्ण पहलू है। यानी यहां मुकाबले को केवल दो ध्रुवों का चुनाव मानना मुश्किल है। जदयू, जन सुराज, राजद और कांग्रेस के प्रत्याशी अलग-अलग मैदान में हैं और इनके बीच मतों का विभाजन महत्वपूर्ण होगा।
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पटना शिक्षक: नवल किशोर यादव के सामने राजद, कांग्रेस और जन सुराज
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा ने मौजूदा विधान पार्षद नवल किशोर यादव को फिर प्रत्याशी बनाया है। राजद ने पूर्व विधायक डॉ. संजीव कुमार को और कांग्रेस ने संजय यादव को मैदान में उतारा है। जन सुराज की ओर से दिव्या ज्योति प्रत्याशी हैं। इस सीट पर 16,689 मतदाता हैं, जो चारों शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा हैं। पटना शिक्षक सीट पर राजद और कांग्रेस के अलग-अलग प्रत्याशी होने के कारण महागठबंधन के भीतर भी चुनावी प्रतिस्पर्धा है। ऐसे में मुकाबले को केवल एनडीए बनाम विपक्ष के रूप में देखना तस्वीर को अधूरा छोड़ देगा।
दरभंगा स्नातक: एक ही सीट पर महागठबंधन के तीन दल से तीन उम्मीदवार
दरभंगा स्नातक सीट पर भाजपा ने सर्वेश कुमार को प्रत्याशी बनाया है। सर्वेश कुमार पिछली बार भाजपा से टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय चुनाव जीतकर विधान परिषद पहुंचे थे। इस बार भाजपा ने उन्हें अपने प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतारा है। राजद ने अनिल कुमार झा और कांग्रेस ने रजनीकांत पाठक को मैदान में उतारा है। इस सीट पर महागठबंधन पर तीन दलों के उम्मीदवार ही एक दूसरे को टक्कर दे रहे हैं। भाकपा माले से संदीप चौधरी ने राजद-कांग्रेस के उम्मीदवार को सीधी टक्कर देने का एलान किया है। जन सुराज की ओर से इम्तियाज नूरानी प्रत्याशी हैं। इसके अलावा अन्य प्रत्याशी भी मैदान में हैं। दरभंगा स्नातक सीट पर करीब 1.27 लाख मतदाता हैं। इस सीट पर बहुकोणीय मुकाबले की तस्वीर दिखाई दे रही है। महागठबंधन के भीतर तालमेल और स्थानीय स्तर पर समर्थन का सवाल भी चर्चा में है।
दरभंगा शिक्षक: कांग्रेस के मदन मोहन झा बनाम जदयू के घनश्याम राय
दरभंगा शिक्षक सीट पर कांग्रेस ने मौजूदा विधान पार्षद और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा को फिर मैदान में उतारा है। राजद ने शिक्षक नेता रहे वचन राउत को चुनावी मैदान में उतारा है। इधर, जदयू ने घनश्याम राय को प्रत्याशी बनाया है। जन सुराज की ओर से इस सीट पर सुरेश प्रसाद राय को प्रत्याशी बनाया गया है। दरभंगा शिक्षक सीट पर 8,967 मतदाता हैं, जो चारों शिक्षक सीटों में सबसे कम हैं।
तिरहुत स्नातक: निर्दलीय वंशीधर के सामने राजद-जदयू
तिरहुत स्नातक सीट पर जदयू ने अभिषेक झा को प्रत्याशी बनाया है। जन सुराज ने डॉ. विमोहन कुमार और राजद ने डॉ. रश्मि विनायक गौतम को मैदान में उतारा है। डॉ रश्मि विनायक गौतम को राजद ने स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया है। पूर्व प्रत्याशी डॉ विनायक गौतम की पत्नी है और खुद डॉक्टर है। इनके ससुर डॉ रामकुमार सिंह पूर्व एमएलसी रह चुके हैं। वहीं आम आदमी पार्टी ने भी रिषी अग्रवाल को प्रत्याशी घोषित किया है। वहीं निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर वंशीधर ब्रजवासी ने भी चुनावी मैदान हैं। वंशीधर निवर्तमान विधान परिषद सदस्य भी हैं। पिछली बार यह सीट जदयू के पास गई थी। तब यहां से देवेश चंद्र ठाकुर चुनाव जीते थे। हालांकि, उनके लोकसभा जाने के बाद इस सीट पर हुए उपचुनाव (2024) में वंशीधर ब्रजवासी ने बाजी मार ली। उन्होंने अभिषेक झा को हराया था। बता दें कि इस सीट पर करीब 1.35 लाख मतदाता हैं, जो चारों स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में सबसे अधिक हैं।
तिरहुत शिक्षक: महागठबंधन में भीतरघात, टॉपर्स घोटाले के मुख्य आरोपी भी मैदान में
तिरहुत शिक्षक सीट पर भाजपा ने नरेंद्र प्रसाद सिंह को प्रत्याशी बनाया है। जन सुराज ने श्याम नंदन यादव को मैदान में उतारा है। महागठबंधन की ओर से यह सीट भाकपा के मौजूदा विधान पार्षद संजय कुमार सिंह के हिस्से में है। संजय कुमार सिंह लगातार दो बार चुनाव जीत चुके है। लेकिन, यहां कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता राजेश राठौर के निर्दलीय मैदान में उतरने से गठबंधन के भीतर अतिरिक्त चुनौती की स्थिति बनी है। वहीं राजद ने अपना समर्थन निवर्तमान विधान परिषद सदस्य संजय सिंह को दिया है। खास बात यह है कि टॉपर्स घोटाले के मुख्य आरोपी बच्चा राय भी इस सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ चुके हैं। तिरहुत शिक्षक सीट पर 9,204 मतदाता हैं।
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कोसी स्नातक: भाजपा के सामने राजद-कांग्रेस और जनसुराजकोसी स्नातक सीट पर भाजपा ने मौजूदा विधान पार्षद डॉ. एनके यादव को फिर प्रत्याशी बनाया है। जदयू ने इस सीट पर प्रत्याशी नहीं उतारा है। राजद के नितेश कुमार, कांग्रेस के मनोज कुमार जायसवाल और जन सुराज के रजनीश रंजन भी मैदान में हैं। कोसी स्नातक में करीब 1.34 लाख मतदाता हैं। यहां एनडीए की ओर से भाजपा का एक प्रत्याशी है, जबकि विपक्षी खेमे में राजद और कांग्रेस अलग-अलग प्रत्याशी के साथ मैदान में हैं। जन सुराज की मौजूदगी इसे और बहुकोणीय बनाती है। इस सीट पर वोटों के विभाजन का सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि स्नातक मतदाताओं की संख्या बड़ी है और कई राजनीतिक दल अपने-अपने संगठन के जरिए समर्थन जुटाने में लगे हैं।
सारण शिक्षक: यहां एनडीए प्रत्याशी के खिलाफ रालोमो के तीन विधायक
सारण शिक्षक सीट इस चुनाव के नामांकन तक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के भीतर उभरे मतभेद के कारण चर्चा में रहा। यहां जदयू ने आनंद पुष्कर को प्रत्याशी बनाया है। इसी सीट पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा के तीन विधायक निर्दलीय उम्मीदवार रामपुकार सिन्हा के नामांकन कार्यक्रम में पहुंचे थे। रालोमो में टूट की बात सामने आई। हालांकि, रामपुकार सिन्हा ने अपना नामांकन वापस ले लिया और जदयू उम्मीदवार को समर्थन देने की बात कही। इधर, इस सीट पर जनसुराज से अफाक अहमद चुनाव लड़ रहे हैं। वह पिछले बार निर्दलीय जीते थे। जनसुराज ने उन्हें समर्थन दिया था। इनके अलावा राजद से जयराम यादव, जदयू से आनंद पुष्कर चुनावी मैदान में हैं। पुष्कर पिछली बार वामदल से चुनाव लड़े थे। इनके पिता स्व. केदार पांडेय इसी क्षेत्र से लंबे समय तक एमएलसी रहे थे। वहीं भाजपा के प्रदेश कमेटी में रहे राहुल राज भी निर्दलीय चुनावी मैदान में हैं। इनके अलावा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े रमेंद्र राय भी निर्दलीय ही चुनावी मैदान में हैं।