भाजपा के लिए करो या मरो वाला है चौथा चरण, जानिए क्यों?
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बिहार चुनावों में जीत के लिए एडी चोटी के जोर लगा रही भारतीय जनता पार्टी और उसके प्रबंधकों के लिए मतदान का कल होने वाला चौथा चरण काफी महत्वपूर्ण हो चला है।
पहले दो चरणों में पिछड़ने की आशंकाओं के बाद भाजपा गठबंधन ने तीसरे चरण में वापसी की कुछ कोशिश तो की लेकिन वह अभी नाकाफी दिखाई दे रही हैं।
ऐसे में भाजपा की उम्मीद चौथे चरण की 55 सीटों पर टिकी हुई हैं क्योंकि पांचवे और अंतिम चरण में उसके पास पाने के लिए बहुत ज्यादा कुछ नहीं है।
गौरतलब है पांचवे चरण में बिहार के सीमांचल इलाके में चुनाव होना है जो मुस्लिम बहुल माना जाता है, ऐसे में उस चरण से भाजपा को बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं होगी क्योंकि मौजूदा चुनावों में मुस्लिम वोटर पूरी तरह लालू-नीतीश के महागठबंधन के साथ मजबूती से खड़ा दिख रहा है।
इस बात का एहसास भाजपा को भी है इसलिए उसने चौथे चरण के चुनाव के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी शुक्रवार को प्रचार के अंतिम दिन दो-दो रैली कर बिहार के वोटरों को लुभाने का पूरा प्रयास किया।
पांचवे चरण में मुस्लिम बहुल सीमांचल में होने हैं चुनाव
असल में पहले दो चरणों के चुनावों में मतदान प्रतिशत बढ़ने के बाद भी इस बात की आशंकाएं जताई जा रही हैं कि वोटरों का रुझान भाजपा के प्रति उत्साहजनक नहीं रहा।
इसकी एक बड़ी वजह ये भी रही कि इस दौरान देशभर की राजनीति में काफी उथल पुथल रही, जिसमें भाजपा और केन्द्र सरकार को लगातार बैकफुट पर रहना पड़ा। खासकर दादरी कांड और आरक्षण के मुद्दे को विरोधियों ने जिस तरह काफी तेजी से हवा दी उससे भाजपा के रणनीतिकारों की सांसे अटक गईं।
रही सही कसर दाल की आसमान छूती कीमतों ने पूरी कर दी जिसके चलते भाजपा विरोधियों ही नहीं अपनों के भी निशाने पर रही। ऐसे में बिहार चुनावों के बीच ही भाजपा को लगातार कई मोर्चों पर जूझना पड़ा।
चौथे चरण में सबसे ज्यादा सीटें भी भाजपा के पास
ये शुरूआती दोनों चरणों में पिछड़ने का ही असर था कि बाद के तीनों चरणों में डेमेज कंट्रोल के लिए भाजपा ने आक्रामक रणनीति अपनाई और अपने सबसे बड़े मोहरे प्रधानमंत्री मोदी की नौ दिनों में 17 रैलियों के साथ एक बार फिर पूरे दमखम के साथ मैदान में उतार दिया।
इसका असर तीसरे चरण में दिखाई भी दिया। अब भाजपा की सारी निगाहें चौथे चरण पर हैं। भाजपा के लिए यह चरण इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि तीसरे चरण की 55 सीटों में से भाजपा के पास सबसे ज्यादा 26 सीटें हैं, जबकि जेडीयू के पास 24 और निर्दलियों के पास तीन सीटें हैं।
ऐसे में अगर भाजपा को इस चरण में झटका लगता है तो उसके लिए अगले चरण में इसकी भरपाई करना किसी भी हाल में संभव नहीं होगा।