फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   Bihar News : Congress party ex bihar state president anil sharma resigned before lok sabha election 2024

Congress Party : खरगे को रिमोट से चलने वाला अध्यक्ष बताया, फिर बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने छोड़ी पार्टी

Sun, 31 Mar 2024 05:11 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: कृष्ण बल्लभ नारायण Updated Sun, 31 Mar 2024 05:11 PM IST
सार

Election 2024 : बिहार में कांग्रेस अपनी नौ सीटों पर प्रत्याशी घोषित नहीं कर पा रही है। कुछ चुनिंदा के लिए राजद से बेतुका समझौते का आरोप लगाते हुए एक और दिग्गज कांग्रेसी ने इस्तीफा दे दिया। प्रदेश अध्यक्ष रह चुके नेता ने खरगे को ही नाकाबिल बता दिया।

विज्ञापन
Bihar News : Congress party ex bihar state president anil sharma resigned before lok sabha election 2024
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अनिल शर्मा। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार

बिहार में कांग्रेस पार्टी को बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अनिल शर्मा ने कांग्रेस के 39 वर्षों का साथ छोड़ते हुए पार्टी को अलविदा कह दिया। अनिल शर्मा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा है कि “मैं राजद से गठबंधन का विरोधी हूं। कांग्रेस का राजद से गठबंधन आत्मघाती है। कांग्रेस ने राजद से गठबंधन कर अक्षम अपराध किया है।”

विज्ञापन


राष्ट्रीय अध्यक्ष को ‘बेचारा’ और ‘रिमोट कंट्रोल से कंट्रोल’ होने वाला बताया
इस्तीफा देते हुए अनिल शर्मा ने सबसे पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड्गे पर हमला किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड्गे एक बेचारा अध्यक्ष हैं। कोई छोटे बड़े फैसले खड्गे जी नहीं ले सकते हैं। उनसे कोई मिलने जाता है तो वह कहते हैं आप राहुल जी से बात करो, आप वेणु गोपाल से बात करो। अब आप इससे अच्छी तरह से समझ सकते हैं कि खड्गे जी रिमोट कंट्रोल से कंट्रोल हो रहे हैं बेचारे खड्गे जी।
विज्ञापन


कांग्रेस के कथनी और करनी में अंतर
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अनिल शर्मा ने कहा कि कांग्रेस की कार्यशैली को देखकर ऐसा लगता है कि इनके कथनी और करनी में बहुत अंतर है। उन्होंने कहा कि नाम का तो लोकतांत्रिक चुनाव हुआ, लेकिन सच्चाई में वह चुनाव नहीं हुआ। कम से कम सीताराम केसरी जी बिहार के थे, वह तो 92% वोट से जीते थे, लेकिन आंतरिक लोकतंत्र जिस पार्टी का खुद नहीं है, वह लोकतंत्र बचाने की लड़ाई करती है या लड़ाई लड़ती है। स्वाभाविक है इस बात को जनता समझेगी कि कांग्रेस के कथनी और करनी में कितना अंतर है।
विज्ञापन
विज्ञापन


राहुल गांधी के मोहब्बत की दूकान पर जमकर बोले
 कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अनिल शर्मा ने राहुल गांधी के मोहब्बत की दूकान पर भी खूब बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा नाम देकर कन्याकुमारी से यात्रा शुरू किये। इस यात्रा के दौरान एक नारा निकला मोहब्बत की दुकान। मैं समझता हूं कि अगर सचमुच में राहुल गांधी जी  मोहब्बत की दुकान का असर देखना चाहते थे और उसे जनता को लाभान्वित करना चाहते हैं या चाहते थे तो राहुल गांधी जी को जम्मू कश्मीर, जहां आतंक की पराकाष्ठा है, जहां एक समुदाय सिर्फ और सिर्फ घृणा की राजनीति करता है नफरत की राजनीति करता है, ऐसी सोच रखता है, वहां जाकर राहुल गांधी जी को मोहब्बत की दुकान लगानी चाहिए थी। अनिल शर्मा ने कहा कि अगर एक साल भी कोई आतंकी गतिविधि ना हो, किसी की हत्या नहीं हो तो मुझे लगता है कि एक राज्य में मोहब्बत की दुकान का सामान बेचने से राहुल गांधी को नोबेल प्राइज मिल सकता है। लेकिन सड़क पर मोहब्बत की दुकान का कोई असर दिखना चाहिए ना। जैसे अभी मणिपुर से शुरू हुआ, हमें तो लगता है कि अभी मणिपुर से मुंबई जाने के बजाय राहुल गाँधी को मणिपुर में कैंप करना चाहिए था। जिन दोनों पक्षों में जिनके बीच झगड़ा हो, उनके बीच अपनी मोहब्बत की दुकान लगानी चाहिए थी। मोहब्बत की दुकान का मतलब है दोनों के बीच विश्वास जीतना। दोनों को एक दूसरे के प्रति मोहब्बत पैदा करना और जोड़ना, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।


कांग्रेस ने किया पलटवार
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अनिल शर्मा ने कांग्रेस के बड़े नेताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए पार्टी के प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनके त्यागपत्र देने पर कांग्रेस ने पटवार किया है। इस संबंध में पार्टी प्रवक्ता राजेश राठौर ने कहा कि आज हमारे पार्टी का कमजोर सिपाही रणछोड़ सिंह निकाला। उन्होंने कहा कि अनिल शर्मा को पार्टी ने इतना सम्मान दिया कि 2000 में पटना जिले के विधानसभा से उन्हें टिकट देकर चुनाव लड़वाया,  जिसमें उन्हें मात्र 3 हजार वोट मिले। अनिल शर्मा को पार्टी ने कई अहम पदों पर भी रखा, उनको कई जिम्मेदारियां दी। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के इतिहास में पहली बार वह किसी भी सदन का सदस्य नहीं थे और पार्टी ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष जैसी बड़ी जिम्मेदारी भी दी। 2009 में जब कांग्रेस पार्टी बिहार में सभी चालीसों सीट पर लोकसभा का चुनाव लड़ने का विचार बना तो उस वक्त अनिल शर्मा कांग्रेस पार्टी के किसी भी सदस्य को टिकट नहीं दिया बल्कि दूसरे दूसरे दल के बाहुबलियों को बुलाकर पार्टी को टिकट दी। उसमें से कुछ अभी तो पार्टी में रह गए और पार्टी का काम कर रहे हैं लेकिन कुछ लोग पार्टी छोड़कर चले भी गए। अनिल शर्मा को आज तक पार्टी सम्मान देती रही लेकिन आज उन्होंने उस सम्मान को दरकिनार करते हुए पार्टी इसलिए छोड़ दी क्योंकि वह पार्टी पर दबाव बना रहे थे कि उन्हें राज्यसभा भेजा जाए। उन्होंने कहा कि अनिल शर्मा को चुनाव लड़ने से डर लगता है, क्योंकि उनके पास ना तो लोग हैं और ना ही जन आधार है। अनिल शर्मा अब वैसे हमारे पार्टी के सिर्फ नेतृत्व पर आरोप लगा रहे हैं, जिन्होंने पार्टी के लिए देश के लिए कुर्बानी दी है। अनिल शर्मा आज कई दिनों से कोप भवन में थे। सत्ता की लालच के लिए कांग्रेस से त्यागपत्र देकर अब वह नरेंद्र मोदी भाजपा की गोद में चले जाएंगे।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed