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Bihar Election Result : बिहार उपचुनाव में हश्र के बाद प्रशांत किशोर क्या कहलाएंगे? 'किंग मेकर' की रणनीति फेल

सार

Prashant Kishor : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी... ऐसे दिग्गजों के 'किंग मेकर' कहलाने का दावा करने वाले चुनावी रणनीतिकार पहली बार चुनावी मैदान में उतरे तो धड़ाम हो गए। 

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Bihar News : Bihar News : What Prashant Kishor PK called after bihar election result bihar upchunav result
उप चुनाव के पहले जन सुराज पार्टी की स्थापना से ताकत दिखाने वाले पीके की चुनावी हालत आई सामने। - फोटो : amar ujala digital

विस्तार

बिहार की चार सीटों पर उप चुनाव में एक बड़ा चर्चित नाम थे- प्रशांत किशोर। चुनाव में नहीं उतरे, लेकिन उनके जितनी चर्चा किसी प्रत्याशी की भी नहीं थी। क्यों? वह खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई दिग्गजों के लिए खुद को 'किंग मेकर' कहते थे, क्योंकि कभी इन लोगों की चुनावी रणनीति का हिस्सा रहे थे। उप चुनाव की सुगबुगाहट के बीच गांधी जयंती पर इस बार एक बड़ा कार्यक्रम करते हुए उन्होंने अपनी संस्था जन-सुराज को पार्टी के रूप में बदला। फिर बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चार सीटों पर हो रहे उप चुनाव में चारों पर जीत का दावा करते हुए प्रत्याशी दिए। चार में से दो प्रत्याशियों का हश्र और दो की भीषण हार सामने आ चुकी है। कहने को चार सीटें मिलाकर 10 प्रतिशत वोट हासिल हुआ, लेकिन सभी जीतने के दावे की हवा निकल चुकी है। वह विधानसभा चुनाव 2025 में पहले के एलान के हिसाब से सभी सीटों पर प्रत्याशी देंगे। ऐसे में अब बड़ा सवाल यही कि प्रशांत किशोर चुनावी रणनीतिकार भी बचे हैं या खांटी राजनेता कहलाएंगे, जो जीत-हार का अनुमान लगाए बगैर केवल जीतने के दावे करता है?

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नीतीश-तेजस्वी को आड़े हाथों लेते रहे, मगर दावे हवा
प्रशांत किशोर की अलग से चर्चा इसलिए, क्योंकि बिहार की चार सीटों पर हुए उप चुनाव में उन्होंने सबसे बड़े दावे किए थे। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कमजोर कहा। राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव पर हमलावर रहे। जन सुराज की जीत का दावा करने में अपने पुराने परफॉर्मेंस की चर्चा बार-बार करते रहे। खुद को बड़े-बड़े दिग्गजों का चुनावी रणनीतिकार बताने के साथ ही किंग मेकर कहलाने में भी गुरेज नहीं किया। जन सुराज पार्टी की स्थापना के समय पटना में बहुत बड़ा कार्यक्रम किया। मंच पर लाए लोगों को पढ़ा-लिखा और बाकी राजनीतिक दलों से अच्छा बताया। देश की राजनीति में प्रशांत किशोर का कद इस उपचुनाव में एक भी सीट जीतने पर बढ़ सकता था, लेकिन चार में से तीन सीटों पर पार्टी के प्रत्याशी तीसरे और एक सीट पर चौथे नंबर पर रहे। जहां तीसरे नंबर पर रहे, उन तीनों में से भी एक ही सीट पर सम्मानजनक या कहें कि तीसरे विकल्प के रूप में संतोषजनक वोट हासिल हुआ। 
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चारों सीटों पर जन सुराज की क्या स्थिति रही, यह देख लें
बिहार में चार सीटों पर हुए उप चुनाव के दौरान प्रशांत किशोर ने सबसे ज्यादा जातिवाद और परिवारवाद से दूर रहने की बात की, लेकिन कहीं वह जातिवाद के सामने ध्वस्त हुए तो कहीं परिवारवाद के आगे। उन्होंने मुसलमान वोटरों को साथ लाने का जो प्रयास किया, वह कुछ हद तक काम आया। नई पीढ़ी को साथ लाने का प्रयास काम आया, यह कह सकते हैं। इसके बावजूद वोटों की स्थिति सिर्फ एक ही जगह ठीक रही, जिसमें वहां के प्रत्याशी की भी अहम भूमिका मानी जा रही है। इमामगंज में जन सुराज के प्रत्याशी को 37 हजार से ज्यादा, जबकि बेलागंज में 17 हजार से ज्यादा वोट आए। बाकी, तरारी में 5522 और रामगढ़ में 6513 वोटों पर जन सुराज के प्रत्याशी को संतोष करना पड़ा।

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