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बिहार: बायसी से रेफर नवजात की पूर्णिया जीएमसीएच में मौत, परिजनों का आरोप- बुजुर्ग की पर्ची पर चलता रहा इलाज

Tue, 13 Oct 2026 08:10 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्णिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्णिया Published by: शबाहत हुसैन Updated Tue, 13 Oct 2026 08:10 PM IST
सार

पूर्णिया जीएमसीएच में नवजात की मौत के बाद परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि बच्चे के नाम के बजाय 60 वर्षीय बुजुर्ग की पर्ची पर तीन घंटे तक एक्स-रे और अन्य प्रक्रियाएं होती रहीं। उन्होंने कार्रवाई मांगी।

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Bihar: Newborn referred dies at Purnia GMCH family alleges treatment continued elderly person's medical slip.
परिजन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पूर्णिया के राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (जीएमसीएच) में कथित लापरवाही के कारण एक नवजात की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि इमरजेंसी वार्ड में बच्चे के इलाज के बजाय करीब तीन घंटे तक 60 वर्षीय बुजुर्ग के नाम की पर्ची पर एक्स-रे और अन्य प्रक्रियाएं की जाती रहीं। घटना से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा किया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए अस्पताल अधीक्षक को लिखित आवेदन सौंपा।

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पीड़ित परिवार जिले के बायसी प्रखंड के फुटानी चौक के पास का रहने वाला है। परिजनों के अनुसार, बच्चे का जन्म बायसी स्वास्थ्य केंद्र में हुआ था। जन्म के समय बच्चा नहीं रोया, जिसके बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए उसे पूर्णिया जीएमसीएच रेफर कर दिया।

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परिजनों का आरोप है कि वे बच्चे को लेकर शाम को जीएमसीएच के इमरजेंसी वार्ड पहुंचे, जहां तैनात डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने बिना समुचित जांच किए 60 वर्षीय बुजुर्ग के नाम से पर्ची बना दी और एक्स-रे कराने को कहा। आरोप है कि एक्स-रे कक्ष में मौजूद तकनीकी कर्मियों ने भी मरीज की उम्र और पहचान का मिलान नहीं किया। इसके बाद करीब तीन घंटे तक उसी गलत पर्ची पर बच्चे का एक्स-रे और अन्य प्रक्रियाएं की जाती रहीं।

परिजनों का कहना है कि इस कथित कागजी और चिकित्सकीय लापरवाही के कारण नवजात के इलाज में बहुमूल्य समय बर्बाद हो गया। उनका आरोप है कि बच्चे को समय पर उचित नवजात देखभाल, ऑक्सीजन और आवश्यक चिकित्सकीय सहायता नहीं मिल सकी, जिसके कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई।

घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से मामले की जांच कराने और जिम्मेदार डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते बच्चे की सही पहचान कर उसका उचित इलाज शुरू किया जाता, तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी। हालांकि, मामले में अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आने पर ही लापरवाही के आरोपों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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