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Bihar Flood News:  बाढ़ का पानी घट रहा, पर इन गांवों तबाही का मंजर जारी; अब कटाव के खतरे से सहमे लोग

Thu, 03 Oct 2024 02:23 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोपालगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोपालगंज Published by: आदित्य आनंद Updated Thu, 03 Oct 2024 02:23 PM IST
सार

नेपाल के तराई इलाके में भारी बारिश के बाद वाल्मीकिनगर बराज से 5.62 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने पर गंडक नदी में बाढ़ आ गयी थी। जिले के लगभग पांच दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में आ गये थे। अब निचले इलाके में फैला बाढ़ का पानी भी गांवों से उतरने लगा है।

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Bihar: Flood water is receding in Gopalganj, scene of devastation continues in villages, danger of erosion
बाढ़ से लोग परेशान हैं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोपालगंज में गंडक नदी का जल स्तर लगातार घट रहा है। रविवार को नेपाल के तराई इलाके में भारी बारिश के बाद वाल्मीकिनगर बराज से 5.62 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने पर गंडक नदी में बाढ़ आ गयी थी। जिले के लगभग पांच दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में आ गये थे। अब निचले इलाके में फैला बाढ़ का पानी भी गांवों से उतरने लगा है। पानी के घटने के साथ ही गांवों में अभी तबाही का मंजर बरकरार है। पानी के घटने के साथ ही कटाव का खतरा भी गंभीर हो गया है। सदर प्रखंड के कुछ गावों जगीरीटोला, कठघरवां, मेहंदिया में नदी खेतों को काटते हुए बह रही है। कटाव से गांव के लोगों में नाराजगी दिख रही है। इधर, प्रशासन द्वारा तटबंधों पर निगरानी लगातार किया जा रहा है। बुधवार को अपर समाहर्ता आपदा शादुल हसन, एसडीपीओ डॉ. प्रदीप कुमार रामनगर, पतहारा, जगीरीटोला से लेकर बांसघाट मंसुरिया, बंगरा घाट तक निरीक्षण कर स्थिति का आकलन कर सरकार को रिपोर्ट देते रहे। इतना ही नहीं, जहां भी कोई कमी दिखी, तत्काल मुख्य अभियंता संजय कुमार, बाढ़ संघर्षात्मक बल के अध्यक्ष नवल किशोर सिंह, कार्यपालक अभियंता प्रमोद कुमार को सूचना देकर उसे दुरुस्त कराते दिखे।

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छतों पर कभी धूप, कभी छांव से हालात बिगड़ रहे हैं
तटबंधों पर टंडसपुर में इंजीनियर बिक्रम, पतहरा में ऋषभ राज, विशंभरपुर में सहायक इंजीनियर एकता कुमारी की टीम मुस्तैद रही। गांवों में पानी के कम होने से गंडक नदी का पानी अब गांवों से निकलने लगा है। पानी के घटने के बाद भी गांवों में तबाही कम नहीं हो रही है। लोगों के घरों में पानी के घुसने के कारण लोगों के घरों के अनाज, कपड़ा, ओढ़ना-बिछावन नदी में बह चुका है। लोगों का चूल्हा-चाकी भी डूब गया है। लोग ऊंचे स्थल व छतों पर शरण ले रखे हैं। छतों पर कभी धूप, कभी छांव से हालात बिगड़ रहे हैं।
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उफनाती लहरें तो अब धीरे-धीरे शांत हो रही हैं
वहीं जिले के कुचायकोट प्रखंड के काला मटिहनियां, दुर्ग मटिहनियां, सलेहपुर, टोला सिपाया व धूपसागर, भगवानपुर, धर्मपुर, विशंभरपुर, सदर प्रखंड के कटघरवां, विशुनपुर पूर्वी, विशनुपुर पश्चिमी, बरइपट्टी, जादोपुर दु:खहरण, रामपुर टेंगराही व जगीरी टोला, मकसूदपुर, मलाही टोला, कटघरवा, रामनगर, खाप, कमल चौधरी का टोला। बरौली प्रखंड के सोनबरसा, मोहम्मदपुर पकड़िया, देवापुर, हसनपुर, रामपुर, सलेमपुर पूर्वी, सलेमपुर पश्चिमी, बतरदेह व सरफरा, सिधवलिया प्रखंड के अमरपुरा, बंजरियां, डुमरिया व काशी टेंगराही। बैकुंठपुर प्रखंड के परसौनी, बासघाट मंसुरिया, उसरी, गम्हारी, फैजुल्लाहपुर, प्यारेपुर, बखरी व बंगरा समेत जिले के पांच दर्जन गांवों में तबाही का आलम है। भूख-प्यास से लोग बिलबिला रहे हैं। उफनाती लहरें तो अब धीरे-धीरे शांत हो रही हैं, लेकिन तबाही का मंजर देखकर दिल दहल जाता है।

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