मांझी ने भी मोदी के आगे किया 'सरेंडर'
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बिहार में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को एक बड़ी राहत मिलती दिख रही है सीटों के बंटवारे पर तलवार ताने खड़े केन्द्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने इस बात की घोषणा कर दी है कि उन्हें गठबंधन के तहत जितनी सीटें मिलेंगी वो उतने पर ही लड़ लेंगे।
इस घटनाक्रम की शुरूआत उस समय हुई जब सुबह केन्द्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने अपने रुख में नरमी लाते हुए कहा कि सीटों के बंटवारे के मुद्दे पर उनकी भाजपा से कोई तकरार नहीं है गठबंधन में उन्हें जितनी सीटें मिलेंगी उनकी पार्टी उतनी सीटों पर ही चुनाव लड़ लेगी।
कुशवाहा का ये बयान इस मायने में भी खास माना जा रहा है क्योंकि गठबंधन में सीटों के मुद्दे पर सबसे ज्यादा मुखर वो और उनकी पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ही बनी हुई थी।
कुशवाहा की पार्टी गठबंधन में कम से कम 60-65 सीटों की मांग कर रही थी और मुख्यमंत्री उम्मीदवार के चेहरे के तौर पर भी जब तब उपेन्द्र कुशवाहा का नाम बढ़ाने का दबाव बनाया जा रहा था।
भाजपा की मुश्किल हुई आसान
इसके चलते भाजपा की दुविधा बढ़ी हुई थी क्योंकि कुशवाहा की देखा देखी पासवान की पार्टी भी इतनी ही सीटों पर अड़ती दिख रही थी जबकि मांझी पहले ही कह चुके थे कि पासवान को जिनती सीटें दी जाएंगी उतनी ही सीटें वो भी मांगेंगे।
ऐसे में अचानक कुशवाहा का बैकफुट पर आना भाजपा के लिए काफी राहत भरा हो सकता है जो बिहार में 150-160 सीटों पर लड़ने की तैयारी कर रही है। जबकि अभी तक सहयोगी दलों के अडियल रुख के चलते उसके लिए 120 से ज्यादा सीट पाना भी मुश्किल होता दिख रहा था।
कुशवाहा के रुख में आया ये परिवर्तन बुधवार शाम राजग के घटक दलों की हुई बैठक के बाद सामने आया है। जिसमें सीटों के बंटवारे की चर्चा तो हुई लेकिन कोई निर्णय नहीं निकल पाया।
बोले मांझी जितनी सीटें देंगे उतनी पर ही लड़ लेंगे
वहीं शाम होते होते कुशवाहा के बाद सबसे ज्यादा बागी मूड में दिख रहे पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने भी हथियार डाल दिए। उन्होंने भी इस बात की घोषणा कर दी कि उनकी पार्टी को गठबंधन में जितनी सीटें मिलेंगी उतने पर पार्टी चुनाव लड़ लेगी।
कुशवाहा के बाद मांझी के रुख ने भाजपा को भारी राहत दे दी है क्योंकि सीटों के बंटवारे के मुद्दे पर ये दोनों नेता ही भाजपा को सबसे ज्यादा आंख दिखा रहे थे। यही कारण था कि चुनावों की घोषणा होने के बावजूद भी अभी तक राजग में सीटों के बंटवारे की घोषणा नहीं हो सकी थी। जबकि विपक्षी जेडीयू-आरजेडी का गठबंधन काफी पहले अपनी सीटों की घोषणा कर चुका है।
मांझी और कुशवाहा के रुख में आए परिवर्तन के बाद अब इस बात की उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही राजग में सीटों के बंटवारे का ऐलान हो सकता है।