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बिहार में राजद ने जदयू से छीनी सीट, तेजस्वी ने बताया लालूवाद की जीत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Updated Thu, 31 May 2018 02:20 PM IST
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तेजस्वी यादव
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बिहार की अररिया लोकसभा सीट पर करारी हार के बाद अब जिले की जोकीहाट विधानसभा सीट पर भी नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) को मुंह की खानी पड़ी है। लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रत्याशी शहनवाज आलम ने जदयू उम्मीदवार मुर्शिद आलम को 41 हजार 244 वोटों के अंतर से हरा दिया है। जीत के बाद बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोला।
तेजस्वी का कहना है कि यह अवसरवाद पर लालूवाद की जीत है। लालू विचार नहीं बल्कि विज्ञान हैं। यह जीत अमन की बात करने वालों की जीत है। नीतीश कुमार को पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। जोकीहाट सीट पर साल 2005 से ही जेडीयू का कब्जा रहा था। ताजा चुनाव परिणाम से साफ है कि मुस्लिम वोटरों का जेडीयू से मोह भंग हो रहा है। तेजस्वी ने नीतीश पर बार-बार अपनी बात से पलटने का आरोप लगाया है। तेजस्वी का कहना है कि भाजपा के साथ जाने की वजह से जदयू की लगातार तीसरी बार हार हुई है।
साल 2005 में बिहार के अंदर लालू विरोधी लहर आई जिसकी वजह से नीतीश को सत्ता मिली थी। इसके बाद उन्होंने मुस्लिम वोटरों में सेंध लगाना शुरू किया। जिसमें वह सफल भी रहे। चुनावों में भाजपा के साथ रहने के बावजूद मुस्लिम वोटरों ने नीतीश को वोट दिया था। मगर साल 2014 में भाजपा से अलग होने की वजह से उन्हें अपने दम पर चुनाव लड़ना पड़ा और करारी हार मिली। बता दें कि इस सीट पर पहले तस्लीमुद्दीन परिवार का कब्जा था। उनके निधन के बाद उनके बेटे सरफराज आलम यहां से विधायक थे। इसी साल मार्च में उन्होंने जदयू से इस्तीफा देकर राजद के टिकट पर अररिया की लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी। उनके इस्तीफे की वजह से ही यह सीट खाली हुई थी।
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तेजस्वी का कहना है कि यह अवसरवाद पर लालूवाद की जीत है। लालू विचार नहीं बल्कि विज्ञान हैं। यह जीत अमन की बात करने वालों की जीत है। नीतीश कुमार को पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। जोकीहाट सीट पर साल 2005 से ही जेडीयू का कब्जा रहा था। ताजा चुनाव परिणाम से साफ है कि मुस्लिम वोटरों का जेडीयू से मोह भंग हो रहा है। तेजस्वी ने नीतीश पर बार-बार अपनी बात से पलटने का आरोप लगाया है। तेजस्वी का कहना है कि भाजपा के साथ जाने की वजह से जदयू की लगातार तीसरी बार हार हुई है।
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साल 2005 में बिहार के अंदर लालू विरोधी लहर आई जिसकी वजह से नीतीश को सत्ता मिली थी। इसके बाद उन्होंने मुस्लिम वोटरों में सेंध लगाना शुरू किया। जिसमें वह सफल भी रहे। चुनावों में भाजपा के साथ रहने के बावजूद मुस्लिम वोटरों ने नीतीश को वोट दिया था। मगर साल 2014 में भाजपा से अलग होने की वजह से उन्हें अपने दम पर चुनाव लड़ना पड़ा और करारी हार मिली। बता दें कि इस सीट पर पहले तस्लीमुद्दीन परिवार का कब्जा था। उनके निधन के बाद उनके बेटे सरफराज आलम यहां से विधायक थे। इसी साल मार्च में उन्होंने जदयू से इस्तीफा देकर राजद के टिकट पर अररिया की लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी। उनके इस्तीफे की वजह से ही यह सीट खाली हुई थी।
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The number of votes JDU got, is less than our victory margin. People of Bihar are continuing to avenge the uturn taken by Nitish Kumar: Tejashwi Yadav on RJD won Jokihat assembly bypoll #Bihar pic.twitter.com/ljVXanHJ06
— ANI (@ANI) May 31, 2018