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Hybrid Tax: टाटा मोटर्स ने सरकार से हाइब्रिड टैक्स बनाए रखने का किया आग्रह, टोयोटा की कटौती की मांग
Thu, 18 Jan 2024 04:36 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 18 Jan 2024 04:36 PM IST
सार
भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रदूषण को कम करने के अभियान के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दे रहा है और उन पर सिर्फ 5 प्रतिशत टैक्स लगाता है। जबकि हाइब्रिड कारों पर 43 प्रतिशत तक का टैक्स लगाता है, जो पेट्रोल कारों पर लगाए जाने वाले 48 प्रतिशत टैक्स से थोड़ा ही कम है।
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Toyota Prius
- फोटो : For Reference Only
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विस्तार
तीन सूत्रों और कंपनी द्वारा लिखे गए एक पत्र से मिली जानकारी के मुताबिक, भारत की शीर्ष इलेक्ट्रिक कार निर्माता टाटा मोटर्स (Tata Motors) सरकार से हाइब्रिड कारों (hybrid Cars) पर टैक्स नहीं घटाने का आग्रह कर रही है, क्योंकि उनका दावा है कि ये प्योर इलेक्ट्रिक कारों की तुलना में ज्यादा प्रदूषणकारी हैं। हालांकि टोयोटा हाइब्रिड कारों पर कम टैक्स लगाने की मांग कर रही है।
भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रदूषण को कम करने के अभियान के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दे रहा है और उन पर सिर्फ 5 प्रतिशत टैक्स लगाता है। जबकि हाइब्रिड कारों पर 43 प्रतिशत तक का टैक्स लगाता है, जो पेट्रोल कारों पर लगाए जाने वाले 48 प्रतिशत टैक्स से थोड़ा ही कम है।
इस प्रसंग ने जापानी वाहन निर्माता Toyota (टोयोटा) जैसे दिग्गजों को परेशान कर दिया है। जिसने Prius (प्रियस) के साथ हाइब्रिड कारों को लोकप्रिय बनाया था और पिछले साल से भारत से इन पर टैक्स में कटौती करने का आग्रह कर रहा है। उनका कहना है कि गैसोलीन कारों की तुलना में हाइब्रिड कारें कार्बन उत्सर्जन कम करती हैं। भारत के व्यापार विभाग ने पिछले महीने एक आंतरिक नोट में हाइब्रिड कारों पर टैक्स को तर्कसंगत बनाने का आग्रह किया था, जो टोयोटा के पक्ष में जाता है।
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हालांकि, टाटा ने अधिकारियों से मुलाकात की और भारत के व्यापार विभाग को लिखा है। जिसमें कहा गया है कि देश स्वास्थ्य पर असर डालने वाले शहरी वायु गुणवत्ता के संकट का सामना कर रहा है, और हाइब्रिड कारों को प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि उन पर पहले से ही गैसोलीन कारों की तुलना में कम टैक्स लगाया जाता है। तीन सूत्रों ये बातें बताईं, जो इस मामले में हो रही चर्चाओं से अच्छी तरह से परिचित हैं।
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भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रदूषण को कम करने के अभियान के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दे रहा है और उन पर सिर्फ 5 प्रतिशत टैक्स लगाता है। जबकि हाइब्रिड कारों पर 43 प्रतिशत तक का टैक्स लगाता है, जो पेट्रोल कारों पर लगाए जाने वाले 48 प्रतिशत टैक्स से थोड़ा ही कम है।
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इस प्रसंग ने जापानी वाहन निर्माता Toyota (टोयोटा) जैसे दिग्गजों को परेशान कर दिया है। जिसने Prius (प्रियस) के साथ हाइब्रिड कारों को लोकप्रिय बनाया था और पिछले साल से भारत से इन पर टैक्स में कटौती करने का आग्रह कर रहा है। उनका कहना है कि गैसोलीन कारों की तुलना में हाइब्रिड कारें कार्बन उत्सर्जन कम करती हैं। भारत के व्यापार विभाग ने पिछले महीने एक आंतरिक नोट में हाइब्रिड कारों पर टैक्स को तर्कसंगत बनाने का आग्रह किया था, जो टोयोटा के पक्ष में जाता है।
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हालांकि, टाटा ने अधिकारियों से मुलाकात की और भारत के व्यापार विभाग को लिखा है। जिसमें कहा गया है कि देश स्वास्थ्य पर असर डालने वाले शहरी वायु गुणवत्ता के संकट का सामना कर रहा है, और हाइब्रिड कारों को प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि उन पर पहले से ही गैसोलीन कारों की तुलना में कम टैक्स लगाया जाता है। तीन सूत्रों ये बातें बताईं, जो इस मामले में हो रही चर्चाओं से अच्छी तरह से परिचित हैं।
Tata Nexon EV Facelift
- फोटो : Tata Motors
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा ने विभाग को एक गोपनीय पत्र लिखा था, जिसके मुताबिक, "हाइब्रिड कारों को आगे का कोई भी प्रोत्साहन जलवायु लक्ष्यों और राष्ट्र की अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक होगा।"
यह लॉबिंग टाटा द्वारा अपने प्रमुख ईवी बाजार हिस्सेदारी की रक्षा करने के लिए की गई ताजा कोशिश है। रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा टेस्ला द्वारा आयातित ईवी पर कम टैक्स लगाने के प्रयासों का भी विरोध कर रहा है।
भारत के व्यापार विभाग ने टिप्पणी के लिए अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि टाटा के प्रतिद्वंद्वियों, भारत की महिंद्रा एंड महिंद्रा और दक्षिण कोरिया की ह्यूंदै मोटर ने भी नई दिल्ली से हाइब्रिड कारों पर टैक्स में किसी भी कमी को हतोत्साहित करते हुए मौजूदा नीति को बनाए रखने का आग्रह किया है।
टाटा ने एक बयान में कहा कि सरकार के साथ संवाद करना उसके नियमित व्यापारिक आचरण का हिस्सा है और उनका मानना है कि "भारत के शहरी वायु प्रदूषण के महामारी से लड़ने का एकमात्र व्यावहारिक समाधान और साथ ही तेल आयात को कम करना है।"
महिंद्रा और ह्यूंदै ने टिप्पणी के अनुरोधों का तुरंत जवाब नहीं दिया।
महिंद्रा के प्रबंध निदेशक अनिश शाह ने इस हफ्ते कहा कि कंपनी ने सरकार को बताया है कि घरेलू और विदेशी ईवी कंपनियों के बीच एक समान प्लेइंग फील्ड होना चाहिए और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
यह लॉबिंग टाटा द्वारा अपने प्रमुख ईवी बाजार हिस्सेदारी की रक्षा करने के लिए की गई ताजा कोशिश है। रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा टेस्ला द्वारा आयातित ईवी पर कम टैक्स लगाने के प्रयासों का भी विरोध कर रहा है।
भारत के व्यापार विभाग ने टिप्पणी के लिए अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि टाटा के प्रतिद्वंद्वियों, भारत की महिंद्रा एंड महिंद्रा और दक्षिण कोरिया की ह्यूंदै मोटर ने भी नई दिल्ली से हाइब्रिड कारों पर टैक्स में किसी भी कमी को हतोत्साहित करते हुए मौजूदा नीति को बनाए रखने का आग्रह किया है।
टाटा ने एक बयान में कहा कि सरकार के साथ संवाद करना उसके नियमित व्यापारिक आचरण का हिस्सा है और उनका मानना है कि "भारत के शहरी वायु प्रदूषण के महामारी से लड़ने का एकमात्र व्यावहारिक समाधान और साथ ही तेल आयात को कम करना है।"
महिंद्रा और ह्यूंदै ने टिप्पणी के अनुरोधों का तुरंत जवाब नहीं दिया।
महिंद्रा के प्रबंध निदेशक अनिश शाह ने इस हफ्ते कहा कि कंपनी ने सरकार को बताया है कि घरेलू और विदेशी ईवी कंपनियों के बीच एक समान प्लेइंग फील्ड होना चाहिए और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।