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Hindi News ›   Automobiles News ›   Tata Harrier EV: Consumer Forum Orders Dealer to Refund Rs 27.98 Lakh and Pay Rs 65000 Compensation for Defect

बार-बार खराब हुई टाटा हैरियर ईवी: कंज्यूमर फोरम का आदेश- डीलर ₹27.98 लाख रिफंड और ₹65,000 का मुआवजा दे

Tue, 15 Sep 2026 04:30 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Tue, 15 Sep 2026 04:30 PM IST
सार

हैदराबाद जिला उपभोक्ता आयोग ने Tata Harrier EV से जुड़े एक मामले में Tata Select Motors को वाहन वापस लेने और उसकी कीमत रिफंड करने का निर्देश दिया है। उपभोक्ता अदालत ने डीलर को कार वापस लेकर रिफंड देने का आदेश क्यों दिया?

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Tata Harrier EV: Consumer Forum Orders Dealer to Refund Rs 27.98 Lakh and Pay Rs 65000 Compensation for Defect
Defective Tata Harrier EV - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

हैदराबाद जिला उपभोक्ता आयोग ने 'टाटा सिलेक्ट मोटर्स' को एक टाटा हैरियर ईवी (Tata Harrier EV) वापस लेने और 10 प्रतिशत मूल्यह्रास काटकर उसकी पूरी कीमत लौटाने का सख्त निर्देश दिया है। अदालत ने पाया कि बार-बार मरम्मत के बावजूद गाड़ी में स्मार्ट-की और सेंट्रल-लॉकिंग से जुड़ी परेशानियां लगातार आ रही थीं। इसके साथ ही फोरम ने ग्राहक को 50,000 रुपये का मुआवजा और 15,000 रुपये मुकदमों के खर्च के रूप में देने का आदेश सुनाया। हालांकि, फोरम ने दंडात्मक हर्जाने की मांग को खारिज कर दिया। यह आदेश 7 सितंबर 2026 को जारी किया गया।
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खरीदार को कंज्यूमर कमीशन का दरवाजा क्यों खटखटाना पड़ा?

  • आयोग के आदेश के अनुसार, पार्टनर पवन बागरेचा के प्रतिनिधित्व वाली पार्टनरशिप फर्म 'मेसर्स रेफ्रिजरेशन इक्विपमेंट एंड सॉल्यूशंस' ने 1 अगस्त 2025 को टाटा सिलेक्ट मोटर्स से ₹27.98 लाख में टाटा हैरियर EV (Empowered + 75 APC वेरिएंट) खरीदी थी। इस गाड़ी के लिए कुछ राशि लोन के जरिए ली गई थी।
  • शिकायतकर्ता का आरोप था कि डिलीवरी के कुछ ही दिनों के भीतर कार बार-बार स्टार्ट होने में विफल रहने लगी और स्मार्ट-की कनेक्टिविटी तथा सेंट्रल लॉकिंग में खराबी आने लगी। शिकायत में कहा गया कि एक महीने के भीतर यह समस्या चार बार आई और गाड़ी कई मौकों पर बीच रास्ते में ही बंद हो गई।
  • डीलर ने शुरुआत में इस खराबी की वजह सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी को बताया। बार-बार शिकायतों और मरम्मत के बावजूद जब समस्याएं खत्म नहीं हुईं, तो खरीदार ने कार बदलने की मांग की। बाद में ग्राहक ने फोरम में याचिका दायर कर 29,29,395 रुपये का रिफंड, मानसिक उत्पीड़न के लिए 10 लाख रुपये का मुआवजा और डीलर की लापरवाही व अनुचित व्यापार पद्धतियों के लिए ₹10 लाख के दंडात्मक हर्जाने की मांग की।
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डीलर ने अपना पक्ष रखते हुए क्या दलीलें दीं?

डीलर ने सेवाओं में किसी भी तरह की कमी से इनकार किया और तर्क दिया कि किसी विशेषज्ञ या ऑटोमोबाइल इंजीनियर की रिपोर्ट से कोई मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट साबित नहीं हुआ है। डीलर ने यह भी कहा कि वह केवल एक अधिकृत डीलर और सर्विस सेंटर है और इस मामले में कार निर्माता कंपनी को पक्षकार नहीं बनाया गया है। डीलर का दावा था कि उसने समस्या पर तुरंत प्रतिक्रिया दी, सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए तकनीकी खराबी दूर की और वारंटी के तहत लॉक को बदला।
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Tata Harrier EV: Consumer Forum Orders Dealer to Refund Rs 27.98 Lakh and Pay Rs 65000 Compensation for Defect
Tata Harrier EV - फोटो : Tata Motors

मामले की सुनवाई के दौरान उपभोक्ता आयोग ने क्या अवलोकन किया?

अध्यक्ष बी उमा वेंकट सुब्बा लक्ष्मी और सदस्य सी लक्ष्मी प्रसन्ना व बी राजी रेड्डी की पीठ ने दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत संवाद, जॉब कार्ड और सर्विस रिकॉर्ड की जांच की। फोरम ने पाया कि खरीदार ने खरीदारी के कुछ दिनों के भीतर ही स्मार्ट-की और सेंट्रल-लॉकिंग की समस्याओं की सूचना दे दी थी और डीलर ने भी इन्हें स्वीकार किया था।
आयोग ने टिप्पणी की:
"रिकॉर्ड के अवलोकन से स्पष्ट है कि 21 अगस्त के जवाब (Ex.A6) के अनुसार शिकायतकर्ता ने वाहन खरीदने के कुछ ही दिनों के भीतर स्मार्ट की 'आउट ऑफ रेंज' और सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम के खराब होने की शिकायत की थी, जिसे विपक्षी पार्टी के कर्मचारियों ने स्वीकार किया था। दोनों पक्षों के बीच चैट (Ex.A5 और Ex.A6) से यह भी साबित होता है कि वाहन बीच रास्ते में रुक गया था और शिकायतकर्ता ने इसकी रिपोर्ट की थी।"
सर्विस हिस्ट्री से पता चला कि वाहन के लॉक न होने, अनलॉक न होने और स्टार्ट न होने की शिकायतें बार-बार दर्ज की गईं। आयोग ने कहा कि डीलर इन समस्याओं का सही कारण बताने में विफल रहा और मरम्मत के बाद भी दिक्कतें बनी रहीं।
आयोग ने आगे कहा:
"निर्माता से डीलर को वाहन सौंपने की तारीख का कोई सबूत पेश नहीं किया गया है। साक्ष्यों के अभाव में, यह नहीं कहा जा सकता कि यदि ग्राहक को खराब वाहन डिलीवर किया गया है तो डीलर जिम्मेदार नहीं है। इस मामले में विशेषज्ञ साक्ष्य का सवाल ही नहीं उठता क्योंकि जॉब कार्ड से साफ जाहिर है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी स्मार्ट-की और सेंट्रल लॉकिंग की समस्या बनी हुई है।"

आयोग ने कितना मुआवजा तय किया और डीलर को क्या निर्देश दिए?

आयोग ने माना कि सबूतों से सेवा में कमी की पुष्टि होती है, इसलिए बिक्री करने वाला डीलर 10 प्रतिशत मूल्यह्रास काटकर वाहन की कीमत लौटाने के लिए उत्तरदायी है। चूंकि वाहन लोन पर लिया गया था, इसलिए ग्राहक उचित मुआवजे का हकदार है।
हालांकि, मानसिक परेशानी के लिए मांगी गई 10 लाख रुपये की बड़ी राशि को खारिज करते हुए आयोग ने कहा कि मुआवजा न्यायसंगत और तर्कसंगत होना चाहिए, यह "कोई बड़ा लाभ या मुनाफे का साधन नहीं हो सकता।"
 

आयोग का अंतिम फैसला:

  1. डीलर को निर्देश दिया गया कि वह 26,64,761.90 रुपये में से 10 प्रतिशत मूल्यह्रास काटकर राशि ग्राहक को लौटाए और बदले में वाहन वापस ले।
  2. ग्राहक को 50,000 रुपये मुआवजा और 15,000 रुपये कानूनी खर्च का भुगतान किया जाए।
  3. इस आदेश का पालन 45 दिनों के भीतर करना होगा। तय समय पर भुगतान न करने पर रिफंड राशि पर आदेश की तारीख से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।
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