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ट्रांसपोर्ट गाड़ियों में स्पीड गवर्नर अनिवार्य करने पर SC सख्त: सड़क परिवहन मंत्रालय को क्या निर्देश दिए?

Tue, 15 Sep 2026 08:35 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Tue, 15 Sep 2026 08:35 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि कमर्शियल और ट्रांसपोर्ट वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन किया जाए।

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Supreme Court Directs MoRTH to Ensure Compliance with Speed Governor Rule for Transport Vehicles
Supreme Court On Speed Governor - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सड़क सुरक्षा से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को निर्देश दिया कि परिवहन वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने से संबंधित नियम का उचित तरीके से पालन सुनिश्चित किया जाए। कोर्ट ने कहा कि केंद्रीय मोटर वाहन नियम (CMVR), 1989 के नियम 118 में अधिसूचित परिवहन वाहनों में स्पीड लिमिटिंग डिवाइस (SLD) या स्पीड लिमिटिंग फंक्शन (SLF) लगाने का प्रावधान स्पष्ट रूप से मौजूद है। 

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नियम 118 में क्या प्रावधान है?

जस्टिस जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि CMVR, 1989 का नियम 118 अधिसूचित परिवहन वाहनों में SLD/SLF की फिटमेंट को अनिवार्य करता है।

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कोर्ट ने कहा कि MoRTH को इस नियम का उचित अनुपालन सुनिश्चित करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र के साथ-साथ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था बनानी होगी कि जब कोई परिवहन वाहन डीलर के माध्यम से बेचा जाए, तो उसमें SLD या SLF लगा हुआ हो।

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निर्माताओं के साथ बैठक को लेकर कोर्ट ने क्या कहा?

  • सुप्रीम कोर्ट ने 13 मई को कहा था कि सभी वाहन निर्माता परिवहन वाहनों के निर्माण के समय स्पीड लिमिटिंग डिवाइस लगाने के लिए बाध्य हैं। इसके बाद कोर्ट ने केंद्र सरकार को वाहन निर्माताओं के साथ बैठक कर इस मुद्दे पर चर्चा करने को कहा था।
  • मंगलवार की सुनवाई में पीठ को बताया गया कि केंद्र सरकार ने इस संबंध में हलफनामा दाखिल किया है और जून में निर्माताओं के साथ बैठक आयोजित की गई थी।
  • अब सुप्रीम कोर्ट ने MoRTH को इस बातचीत और परिवहन वाहनों में SLD की प्री-फिटमेंट से जुड़ी कार्रवाई को रिकॉर्ड पर रखने को कहा है।

 

पब्लिक सर्विस वाहनों में ट्रैकिंग डिवाइस को लेकर क्या निर्देश दिए?

  • कोर्ट ने MoRTH को सार्वजनिक सेवा वाहनों में गाड़ी की लोकेशन ट्रैक करने वाला डिवाइस (Vehicle Location Tracking Device) की प्री-फिटमेंट को लेकर वाहन निर्माताओं के साथ हुई बातचीत की रिपोर्ट भी रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया।
  • इसके साथ ही सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को CMVR, 1989 के Rule 125H के अनुपालन और उसके प्रवर्तन की स्थिति बताने वाली रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया।
  • नियम 125H के तहत सभी पब्लिक सर्विस वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस और इमरजेंसी बटन होना जरूरी है।

 

Supreme Court Directs MoRTH to Ensure Compliance with Speed Governor Rule for Transport Vehicles
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

ट्रैकिंग डिवाइस को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले क्या कह चुका है?

  • 13 मई को मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को “परेशान” करने वाला बताया था कि एक प्रतिशत से भी कम परिवहन वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस मौजूद है।
  • कोर्ट ने कहा था कि यह डिवाइस यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेगा, खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से।
  • कोर्ट के सामने यह सुझाव भी दिया गया था कि इस डिवाइस की व्यवस्था वाहन निर्माता की ओर से ही की जानी चाहिए। इसके बाद मई में पीठ ने केंद्र को निर्माताओं के साथ इस विषय पर बातचीत करने का निर्देश दिया था।

 

National Road Safety Board को लेकर कोर्ट ने क्या पूछा?

  • सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया गया कि केंद्र सरकार ने इस साल जून में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड (National Road Safety Board) का गठन किया है।
  • इस पर पीठ ने कहा कि अगली सुनवाई तक उसे बताया जाए कि बोर्ड पूरी तरह कार्यरत है या नहीं।

 

दिल्ली हाई कोर्ट के पास पैदल यात्रियों की सुरक्षा का मुद्दा क्यों उठा?

  • सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के पास पैदल यात्रियों के सड़क पार करने से जुड़े मुद्दे पर भी सुनवाई की।
  • मामले में कोर्ट की सहायता कर रहे अमिकस क्यूरी (अदालत के मित्र) वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल ने बताया कि वहां रेड लाइट को चालू कर दिया गया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि केवल रेड लाइट पर्याप्त नहीं हो सकती। क्योंकि हाई कोर्ट के कर्मचारी और आम लोग सड़क पार कर हाई कोर्ट पहुंचते हैं।
  • उन्होंने सुझाव दिया कि पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए वहां स्पीड ब्रेकर और रंबल स्ट्रिप्स लगाए जा सकते हैं। ताकि वाहनों को उस स्थान पर गति कम करनी पड़े।

इस स्थान पर ट्रैफिक सुधार के लिए क्या सुझाव दिया गया?

  • अमिकस क्यूरी ने सुझाव दिया कि केंद्र एक विशेषज्ञ समिति गठित कर वहां वाहनों की आवाजाही और पैदल यात्रियों के आवागमन का अध्ययन करा सकता है। समिति इसके आधार पर जरूरी सुधारात्मक उपाय सुझा सकती है।
  • पीठ ने केंद्र की ओर से पेश वकील को इस मुद्दे पर ध्यान देने को कहा। केंद्र के वकील ने बताया कि अधिकारी समस्या का समाधान करने की कोशिश कर रहे हैं और बेहतर समाधान सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।
  • इस पर पीठ ने टिप्पणी की, “भारत में समाधान बहुत बेहतर होने चाहिए।”


सड़क सुरक्षा मामले में पहले क्या-क्या निर्देश दिए गए थे?

  • सुप्रीम कोर्ट ने मई में इस मामले की सुनवाई के दौरान व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस, इमरजेंसी बटन, स्पीड गवर्नर और राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड समेत सड़क सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर निर्देश जारी किए थे।
  • मंगलवार की सुनवाई में अदालत ने विशेष रूप से स्पीड गवर्नर से जुड़े मौजूदा नियम के प्रभावी अनुपालन पर जोर दिया।
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