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Mahindra: बिक गई महिंद्रा के स्वामित्व वाली यह कंपनी, दिवालिया होने के लिए दायर किया था आवेदन

Tue, 11 Jan 2022 09:13 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Tue, 11 Jan 2022 09:13 PM IST
सार

दक्षिण कोरिया की SsangYong Motor के एक बार फिर से नए मालिक होंगे। कंपनी ने पुष्टि की है कि एक स्थानीय संघ द्वारा 305 बिलियन वोन या लगभग 254.56 मिलियन डॉलर में इसका अधिग्रहण किया गया है।

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South Korea's SsangYong Motor sold for 255 million dollars was owned by Mahindra and Mahindra
SsangYong Tivoli - फोटो : For Reference Only

विस्तार

दक्षिण कोरिया की SsangYong Motor के एक बार फिर से नए मालिक होंगे। कंपनी ने पुष्टि की है कि एक स्थानीय संघ द्वारा 305 बिलियन वोन या लगभग 254.56 मिलियन डॉलर में इसका अधिग्रहण किया गया है। इसका मेजोरिटी शेयर रखने वाली कंपनी महिंद्रा के एक नया खरीदार खोजने में नाकाम रहने के बाद SsangYong Motor (सैंगयॉन्ग मोटर) कई महीनों से अदालती रिसीवरशिप के अधीन थी।
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कई बार नुकसान हुआ
SsangYong Motor का अतीत काफी खराब रहा है और कंपनी ने कई बार नुकसान झेला है। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने साल 2010 में दक्षिण कोरियाई कंपनी में नियंत्रण हिस्सेदारी हासिल कर ली थी। ऐसी उम्मीद थी कि एसयूवी बॉडी टाइप के निर्माण से इसकी किस्मत एक बार फिर से जाग जाएगी और इसे बाजार में फिर से पकड़ बनाने में मदद मिलेगी। ऐसा नहीं हो सकता था क्योंकि कंपनी भारतीय ऑटो प्रमुख के लिए एक मौके की बजाए दायित्व ज्यादा बन गई थी। 
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दिवालिया के लिए आवेदन
साल 2020 के अप्रैल में, महिंद्रा ने इसमें और ज्यादा पैसा नहीं लगाने का विकल्प चुना और नाकामी के बाद इसके लिए एक खरीदार की तलाश शुरू कर दी। 2020 के आखिर में 100 बिलियन वोन (करीब 6 अरब 19 करोड़ रुपये) का बकाया नहीं चुका पाने पर SsangYong Motor ने दिवालिया होने के लिए आवेदन दायर किया।
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हुआ बड़ा घाटा
सैंगयोंग मोटर के लिए हाल का समय काफी कठिन रहा है और कोविड-19 महामारी ने एक गंभीर झटका दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वाहन निर्माता ने एक नियामक फाइलिंग का हवाला देते हुए बताया कि 2021 में वाहन की बिक्री 84,000 से थोड़ी ज्यादा हो गई थी, जो पिछले वर्ष की तुलना में 21 प्रतिशत कम थी। 2021 के जनवरी और सितंबर के बीच, ऑटो कंपनी को 1.8 ट्रिलियन वोन (करीब 111 अरब 37 करोड़ रुपये) के राजस्व में से 238 बिलियन वोन (करीब 14 अरब 72 करोड़ रुपये) का परिचालन घाटा हुआ था।

ऐसे पहुंची महिंद्रा के पास
SsangYong Motor की जड़ें 1950 के दशक में Dong-A Motor से जुड़ी हुई हैं। साल 1988 में SsangYong Business Group ने इसे अपने कब्जे में ले लिया था। इसके बाद इसे Daewoo Motors (देवू मोटर्स) और SAIC द्वारा अधिग्रहित कर लिया गया। और आखिरकार महिंद्रा एंड महिंद्रा को नियंत्रण हिस्सेदारी के साथ मिल गया। 


थी कई बड़ी योजनाएं
भारतीय कंपनी के नियंत्रण में आने के बाद SsangYong Tivoli इसकी पहली कार थी। इस कंपनी से एसयूवी को बड़ी योजनाएं थी और यहां तक कि इलेक्ट्रिक वाहनों के बड़े पैमाने पर उत्पादन पर विचार किया गया था। लेकिन बिक्री संख्या में लगातार गिरावट के कारण कंपनी में बहुत ज्यादा विश्वास पैदा नहीं हो पाया।
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