सितंबर में ऑटो रिटेल सेल्स ने बनाया रिकॉर्ड: 25.37 लाख यूनिट की बिक्री; क्या अक्तूबर में भी जारी रहेगी रफ्तार?
सितंबर में भारतीय ऑटो बाजार ने बिक्री के रिकॉर्ड तोड़ दिए है। इस बार शोरूम्स से 25.37 लाख गाड़ियां सड़कों पर उतरीं है, लेकिन क्या 45 दिनों का भारी-भरकम गाड़ियों का स्टॉक त्योहारों की इस बड़ी खुशी का रंग फीका कर देगा? आइए जानते हैं बिक्री के आंकड़े, ईवी के उछाल और डीलर्स की चिंता से जुड़ी हर एक बात को विस्तार से...
विस्तार
भारतीय बाजार ने सितंबर में अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन्स यानी फाडा के अनुसार, सितंबर में कुल 25,36,920 वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ, जो पिछले साल की तुलना में 31.82 प्रतिशत ज्यादा है। महीने-दर-महीने भी ऑटो रिटेल सेल्स में 4.69 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, फाडा ने इस तेज ग्रोथ को समझने के लिए पिछले साल के कमजोर बेस को ध्यान में रखने की सलाह दी है। ऐसे में सवाल है कि सितंबर की रिकॉर्ड बिक्री के पीछे सिर्फ बेस इफेक्ट है या बाजार में वाकई मांग मजबूत हुई है? आइए जानते हैं सितंबर के आंकड़ों से लेकर अक्तूबर के फेस्टिव सीजन के आउटलुक तक पूरी जानकारी।
सितंबर में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची ऑटो रिटेल सेल्स
- फाडा की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में देशभर में 25,36,920 यूनिट वाहनों की खुदरा बिक्री हुई। सालाना आधार पर इसमें 31.82% की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, अगस्त के मुकाबले भी बिक्री 4.69% बढ़ी है।
- अप्रैल से सितंबर तक यानी वित्त वर्ष की पहली छमाही में कुल ऑटो रिटेल सेल्स 1,55,12,319 यूनिट रही। यह पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 20.77% ज्यादा है।
- फाडा के रिपोर्ट में उपलब्ध आंकड़ों से भी साफ है कि 2026 में ऑटो रिटेल की पहली छमाही में कई सेगमेंट में मजबूत मांग बनी हुई थी।
फाडा का क्या कहना है?
- सितंबर की 31.82% सालाना ग्रोथ निश्चित तौर पर बड़ी है, लेकिन फाडा ने इसे थोड़ा सावधानी से देखने को कहा है। दरअसल, पिछले साल जीएसटी 2.0 लागू होने से पहले कई ग्राहकों ने वाहन खरीदने का फैसला टाल दिया था। इसकी वजह सितंबर 2025 का बेस कमजोर रहा। ऐसे में इस साल सितंबर की बिक्री की तुलना उस कमजोर बेस से होने के कारण ग्रोथ का आंकड़ा काफी ऊंचा नजर आ रहा है।
- फाडा प्रेसिडेंट साई गिरिधर के अनुसार, सितंबर की 31.82% ग्रोथ साल की सबसे ज्यादा बेस-डिस्टॉर्टेड ग्रोथ है। हालांकि, उनका कहना है कि इससे भी ज्यादा जरूरी बात है कि यह पांच प्रमुख कैटेगरी में सितंबर का प्रदर्शन अब तक का सबसे अच्छा रहा और वित्त वर्ष की पहली छमाही भी रिकॉर्ड स्तर पर रही।
टू-व्हीलर की बिक्री 33 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी
सितंबर में टू-व्हीलर रिटेल सेल्स 33.08% बढ़कर 17,90,188 यूनिट पहुंच गई। यह सितंबर महीने में टू-व्हीलर बिक्री का अब तक का सबसे अच्छा आंकड़ा माना जा रहा है। यानी कुल ऑटो रिटेल ग्रोथ में टू-व्हीलर सेगमेंट का बड़ा योगदान रहा। फेस्टिव सीजन से पहले बढ़ी मांग ने भी इस सेगमेंट को सहारा दिया।
पैसेंजर व्हीकल की बिक्री भी रिकॉर्ड
कारों यानी पैसेंजर व्हीकल की रिटेल बिक्री सितंबर में 32.10 प्रतिशत बढ़कर 4,27,213 यूनिट पहुंच गई। यह भी सितंबर महीने का अब तक का रिकॉर्ड है। पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में मजबूत मांग के बावजूद डीलर इन्वेंटरी का बढ़ना आगे के लिए चिंता का विषय बना हुआ है, जिस पर फाडा ने खास तौर पर ध्यान दिलाया है।
पहली बार सितंबर में एक लाख के पार पहुंची कमर्शियल व्हीकल बिक्री
कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट ने सितंबर में एक अहम रिकॉर्ड बनाया। इसकी रिटेल बिक्री 37.62% बढ़कर 1,03,557 यूनिट पहुंच गई। खास बात है कि यह सितंबर महीने में पहली बार कमर्शियल व्हीकल की बिक्री एक लाख यूनिट के पार गई है।
थ्री-व्हीलर की बिक्री भी रिकॉर्ड स्तर पर
- सितंबर में थ्री-व्हीलर रिटेल सेल्स 22.25% बढ़कर 1,32,570 यूनिट रही। यह सितंबर महीने का रिकॉर्ड है। इससे पता चलता है कि ऑटो बाजार की तेजी सिर्फ कार और बाइक तक सीमित नहीं रही, बल्कि थ्री-व्हीलर जैसे सेगमेंट में भी मजबूत रिटेल डिमांड देखने को मिली।
- इसी के साथ व्हील्ड कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट यानी निर्माण क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले पहिएदार उपकरणों की रिटेल बिक्री भी सितंबर में तेजी से बढ़ी। इस सेगमेंट की बिक्री 38% बढ़कर 6,486 यूनिट पहुंच गई।
ट्रैक्टर की बिक्री महीने-दर-महीने घटी
ट्रैक्टर सेगमेंट का भी प्रदर्शन काफी जोरदार रहा। सितंबर में ट्रैक्टर की रिटेल बिक्री 76,906 यूनिट रही। यह पिछले साल के मुकाबले 13.75% ज्यादा है, लेकिन अगस्त की तुलना में इसमें 12.58% की गिरावट आई है। यानी सालाना आधार पर ट्रैक्टर की मांग मजबूत रही, लेकिन महीने-दर-महीने इसमें कमजोरी देखने को मिली।
ईवी रिटेल भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर
सितंबर में इलेक्ट्रिक व्हीकल की रिटेल बिक्री भी अपने ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गई। इस महीने करीब 3.34 लाख इलेक्ट्रिक व्हीकल बिके। कुल ऑटो रिटेल में EV की हिस्सेदारी यानी ईवी पेनिट्रेशन करीब 13% रही। यह आंकड़ा इशारा करता है कि इलेक्ट्रिक व्हीकल की मांग भी अब भारतीय ऑटो बाजार की कुल ग्रोथ में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
कारों में पेट्रोल और अल्टरनेटिव फ्यूल की हिस्सेदारी लगभग बराबर
- वहीं, पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में फ्यूल के हिसाब से भी दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। सितंबर में पेट्रोल कारों की हिस्सेदारी 41.27 प्रतिशत रही, जबकि अल्टरनेटिव फ्यूल की हिस्सेदारी करीब 41% रही।
- इसके अलावा पैसेंजर व्हीकल रिटेल में सीएनजी की हिस्सेदारी 23.11 प्रतिशत, हाइब्रिड की 9.44 प्रतिशत और ईवी की 8.45 प्रतिशत रही। इससे पता चलता है कि कार खरीदारों के बीच पेट्रोल के अलावा दूसरे पावरट्रेन विकल्पों की मांग भी लगातार बनी हुई है।
अक्तूबर में कैसी बिक्री का अनुमान?
- अब ऑटो बाजार की नजर अक्तूबर के बिक्री आंकड़ें पर है। इस महीने कई बड़े त्योहार जैसे नवरात्रि और दशहरा हैं।ऐसे में वाहन खरीदारी के लिए यह महीना काफी अहम माना जा रहा है।
- फाडा की सर्वे रिपोर्ट कहती है कि 75.57 प्रतिशत डीलर्स को अक्तूबर में ग्रोथ की उम्मीद है। फेस्टिव सीजन के दौरान ग्राहकों की खरीदारी बढ़ने से ऑटो रिटेल को और मजबूती मिलने की संभावना है।
- हालांकि, सितंबर के आंकड़ों को देखते हुए यह भी देखना जरूरी होगा कि अक्तूबर की बिक्री में कितनी तेजी वास्तविक मांग से आती है और कितना असर फेस्टिव सीजन का रहता है।
बढ़ती कीमतें बन सकती हैं चुनौती
अक्तूबर के लिए सबसे बड़ी चिंता अफोर्डेबिलिटी यानी ग्राहकों की खरीद क्षमता को लेकर है। फाडा के अनुसार, गाड़ियों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से GST के फायदे का असर कम हो सकता है। अगर वाहनों की कीमतें बढ़ती रहती हैं, तो ग्राहकों के लिए नई कार या दूसरे वाहन खरीदना महंगा हो सकता है। ऐसे में फेस्टिव सीजन के दौरान मांग मजबूत रहने के बावजूद कीमतों का दबाव बाजार के लिए चुनौती बना रह सकता है।
पैसेंजर व्हीकल की इन्वेंटरी 43-45 दिन पर पहुंची
पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में डीलर्स के पास स्टॉक भी चिंता की वजह है। फिलहाल पैसेंजर व्हीकल इन्वेंटरी 43-45 दिन तक पहुंच गई है। यह फाडा के सुलझाएगए 21 दिन के स्तर से दोगुनी से भी ज्यादा है। यहां पर ज्यादा इन्वेंटरी का मतलब है कि डीलरशिप पर बड़ी संख्या में गाड़ियां लंबे समय तक स्टॉक में रह सकती हैं। ऐसे में कंपनियों और डीलर्स पर डिस्काउंट, ऑफर और दूसरे प्रमोशनल उपायों का दबाव भी बढ़ सकता है।
क्या अक्तूबर में जारी रहेगी ऑटो बाजार की रफ्तार?
- सितंबर के आंकड़ों ने भारतीय ऑटो रिटेल बाजार के लिए एक नया रिकॉर्ड जरूर बनाया है। कुल बिक्री 25.37 लाख यूनिट के पार पहुंची, टू-व्हीलर और पैसेंजर व्हीकल समेत कई सेगमेंट ने सितंबर का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और ईवी रिटेल भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची, लेकिन फाडा की चेतावनी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पिछले साल जीएसटी 2.0 से पहले खरीदारी टलने के कारण सितंबर का बेस कमजोर था, जिससे इस साल की सालाना ग्रोथ काफी ऊंची दिखाई दे रही है।
- अब अक्तूबर का फेस्टिव सीजन ज्यादा स्पष्ट तस्वीर देगा। अगर नवरात्रि और दशहरा के दौरान मांग मजबूत रहती है, तो यह संकेत होगा कि ऑटो बाजार में सिर्फ बेस इफेक्ट नहीं, बल्कि वास्तविक डिमांड भी मजबूत है। दूसरी ओर, बढ़ती कीमतें और 43-45 दिन की पैसेंजर व्हीकल इन्वेंटरी आगे की राह में बड़ी चुनौती बनी रह सकती है।