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Satellite Toll System: केंद्र ने नई GNSS-आधारित टोल सिस्टम के डिटेल्स किए पेश, जानें इसके फीचर्स और फायदे

Wed, 24 Jul 2024 07:28 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Wed, 24 Jul 2024 07:28 PM IST
सार

केंद्र सरकार ने बुधवार को संसद के सामने सैटेलाइट-आधारित नेविगेशन सिस्टम की मदद से टोल टैक्स वसूली के लिए किए गए एक पायलट अध्ययन के बारे में जानकारी रखी। जानें इसके फीचर्स और फायदे।

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Road Ministry initiates GNSS-based toll collection pilot, Nitin Gadkari laid out details before Parliament
Nitin Gadkari - फोटो : ANI

विस्तार

केंद्र सरकार ने बुधवार को संसद के सामने सैटेलाइट-आधारित नेविगेशन सिस्टम की मदद से टोल टैक्स वसूली के लिए किए गए एक पायलट अध्ययन के बारे में जानकारी रखी। राज्यसभा में एक लिखित जवाब में, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि इस कॉन्सेप्ट को बंगलूरू-मैसूर खंड राष्ट्रीय राजमार्ग-275 और पानीपत-हिसार खंड राष्ट्रीय राजमार्ग-709 (पुराना राष्ट्रीय राजमार्ग-71ए) पर पायलट आधार पर लागू किया गया था।
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मंत्री ने उच्च सदन को सूचित किया कि केंद्र सरकार ने मौजूदा FASTag (फास्टैग) सुविधा के अलावा नेशनल हाईवे के चुनिंदा सेक्शन पर ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ETC) सिस्टम को शुरू में पायलट आधार पर लागू करने का फैसला किया है। GNSS, GPS (जीपीएस) और GLONASS (ग्लोनास) जैसी उपग्रह-आधारित नेविगेशन प्रणालियों के लिए एकसाथ में इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है।
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गडकरी ने पहले कहा था कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) का फास्टैग इकोसिस्टम के साथ GNSS-आधारित ETC सिस्टम को इंटीग्रेट करने की योजना है। जिसके शुरुआती चरण में एक हाइब्रिड मॉडल का इस्तेमाल किया जाएगा। जिसमें RFID-आधारित ETC और GNSS-आधारित ETC दोनों एक साथ संचालित होंगे।
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उन्होंने संसद को यह भी बताया कि परियोजना में GNSS-आधारित ETC का इस्तेमाल करने वाले वाहनों के लिए स्वतंत्र रूप से गुजरने के लिए डेडिकेटेड लेन का प्रस्ताव है। जैसा कि जीएनएसएस-आधारित ईटीसी ज्यादा व्यापक हो जाता है। सभी लेन आखिरकार जीएनएसएस लेन में परिवर्तित हो जाएंगे। समाचार एजेंसी एएनआई ने एक रिपोर्ट में इसका जिक्र किया गया है।

GPS-आधारित टोल कलेक्शन के फायदे
  1. GNSS-आधारित टोल कलेक्शन एक बाधा रहित तरीका है। जिससे यात्रियों से उस विशेष हाईवे सेक्शन पर तय की गई दूरी के आधार पर शुल्क लिए जाने की उम्मीद है।
  2. भारत में GNSS-आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह के कार्यान्वयन से नेशनल हाईवे पर वाहनों के सुगम आवागमन की सुविधा होने की उम्मीद है। इसमें हाईवे यूजर्स को कई फायदे देने की योजना बनाई गई है। जिसमें बाधा रहित, फ्री-फो टोलिंग शामिल है, जो दूरी-आधारित होगा।
  3. GNSS-आधारित टोल संग्रह से लीकेज को कम करने और टोल चोरी करने वालों की जांच करने की भी उम्मीद है।
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