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पेट्रोल पंप पर नोजल को बार-बार दबाने से क्या पेट्रोल कम मिलता है? जानें इस दावे के पीछे की पूरी सच्चाई
Tue, 29 Sep 2026 10:31 PM IST
Amar Sharma
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amar Sharma
Updated Tue, 29 Sep 2026 10:31 PM IST
सार
पेट्रोल पंप पर ईंधन भरवाते समय आपने अक्सर देखा होगा कि कर्मचारी नोजल के लीवर को लगातार दबाए रखता है। लेकिन क्या बार-बार नोजल दबाने और छोड़ने से आपकी गाड़ी की टंकी में कम पेट्रोल पहुंच सकता है? इसको लेकर कई तरह की बातें कही जाती हैं। जानें इस दावे की हकीकत।
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Fueling Car At Pump
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच आम जनता के लिए वाहन में ईंधन भरवाना एक बड़ा खर्च बन गया है। ऐसे में अगर उपभोक्ता को जाने-अनजाने में चुकाए गए पैसे से कम पेट्रोल मिले, तो यह सीधे तौर पर बड़ा वित्तीय नुकसान है। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर अक्सर पेट्रोल पंप घोटालों से जुड़ी खबरें आती रहती हैं। जिनमें से एक बड़ा दावा पेट्रोल पंप के कर्मचारियों द्वारा नोजल पकड़ने के तरीके को लेकर किया जाता है।
अक्सर देखा जाता है कि पेट्रोल भरते समय अटेंडेंट नोजल के लीवर (ट्रिगर) को बार-बार दबाता और छोड़ता रहता है। आम धारणा है कि ऐसा करने से मीटर में तो रीडिंग तेजी से बढ़ती है, लेकिन गाड़ी के टैंक में हवा या वेपर चली जाती है और पेट्रोल कम आता है। हालांकि, तकनीकी रूप से यह पूरी तरह सच नहीं है। बार-बार ट्रिगर दबाने से मीटर हवा को पेट्रोल के रूप में काउंट नहीं करता, लेकिन इससे ईंधन का प्रवाह असमान हो जाता है। जो वाहन के फ्यूलिंग सिस्टम को प्रभावित कर सकता है।
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अक्सर देखा जाता है कि पेट्रोल भरते समय अटेंडेंट नोजल के लीवर (ट्रिगर) को बार-बार दबाता और छोड़ता रहता है। आम धारणा है कि ऐसा करने से मीटर में तो रीडिंग तेजी से बढ़ती है, लेकिन गाड़ी के टैंक में हवा या वेपर चली जाती है और पेट्रोल कम आता है। हालांकि, तकनीकी रूप से यह पूरी तरह सच नहीं है। बार-बार ट्रिगर दबाने से मीटर हवा को पेट्रोल के रूप में काउंट नहीं करता, लेकिन इससे ईंधन का प्रवाह असमान हो जाता है। जो वाहन के फ्यूलिंग सिस्टम को प्रभावित कर सकता है।
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नोजल का ऑटो-कट सिस्टम कैसे काम करता है?
आधुनिक पेट्रोल पंपों के नोजल में एक विशेष 'ऑटो-कट' सेफ्टी सिस्टम लगा होता है:- ओवरफ्लो से बचाव: इस ऑटो-कट तकनीक का मुख्य काम यह सुनिश्चित करना है कि वाहन की फ्यूल टैंक पूरी तरह से भरने पर पेट्रोल बाहर छलक कर न गिरे। जैसे ही ईंधन का स्तर नोजल के सिरे तक पहुंचता है, सिस्टम अपने आप पेट्रोल के प्रवाह को रोक देता है।
- फ्लो पर असर: जब अटेंडेंट नोजल के लीवर को बार-बार छोड़ता और दबाता है, तो पेट्रोल का प्रवाह निरंतर रहने के बजाय रुक-रुक कर होता है। इससे ऑटो-कट सेंसर भ्रमित हो सकता है और टैंक पूरी भरने से पहले ही कट-ऑफ हो सकता है। इसलिए, ईंधन भरवाते समय हमेशा एक समान गति से पेट्रोल डालने की सलाह दी जाती है।
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पेट्रोल पंप पर धोखाधड़ी से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
ईंधन भरवाते समय उपभोक्ताओं को सतर्क रहना चाहिए और कुछ महत्वपूर्ण सावधानियों का पालन करना चाहिए:- अटेंडेंट को निर्देश दें: पेट्रोल भरवाते समय कर्मचारी से कहें कि वह नोजल को एक निश्चित लॉक पर सेट करके सामान्य रूप से पेट्रोल डाले और ट्रिगर को बार-बार न दबाए।
- जीरो रीडिंग जरूर जांचें: रिफ्यूलिंग शुरू होने से ठीक पहले पेट्रोल पंप के डिजिटल मीटर की रीडिंग को '0' (जीरो) पर देखना न भूलें।
- मीटर और राशि पर नजर रखें: जब गाड़ी में ईंधन भरा जा रहा हो, तो मीटर पर दिख रही लीटर की मात्रा और कुल राशि पर लगातार नजर बनाए रखें।
- संदेह होने पर जांच की मांग करें: अगर आपको पेट्रोल की मात्रा या पंप की कार्यप्रणाली में किसी भी तरह की गड़बड़ी या अनियमितता का संदेह हो, तो तुरंत 5-लीटर मात्रा परीक्षण के लिए कहें।