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Nitin Gadkari: अतिरिक्त टैक्स पर बयान के कुछ दिनों बाद गडकरी ने कहा- मैं डीजल ईंधन के खिलाफ नहीं हूं
Fri, 15 Sep 2023 06:17 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Fri, 15 Sep 2023 06:17 PM IST
सार
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि वह डीजल ईंधन के खिलाफ नहीं हैं। इस हफ्ते की शुरुआत में, उत्सर्जन में कटौती में मदद के लिए डीजल इंजन से चलने वाले वाहनों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स लगाने के बारे में गडकरी की टिप्पणी ने काफी विवाद पैदा किया था।
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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि वह डीजल ईंधन के खिलाफ नहीं हैं। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, डीजल इंजन से चलने वाले वाहनों पर ए़डिशनल टैक्स (अतिरिक्त कर) पर अपनी टिप्पणी पर सफाई की मांग करते हुए, गडकरी ने कहा कि वह ऑटोमोबाइल निर्माताओं को प्रदूषण कम करने के लिए कदम उठाने के लिए कहना चाहते थे। मंत्री ने कथित तौर पर आगे कहा कि डीजल वाहनों पर टैक्स लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
इस हफ्ते की शुरुआत में, उत्सर्जन में कटौती में मदद के लिए डीजल इंजन से चलने वाले वाहनों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स लगाने के बारे में नितिन गडकरी की टिप्पणी ने काफी विवाद पैदा किया था। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा सक्रिय रूप से विचाराधीन ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। कथित तौर पर मंत्री ने उस टिप्पणी को स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह डीजल ईंधन के खिलाफ नहीं हैं और सरकार डीजल वाहनों पर कोई टैक्स नहीं लगाने जा रही है।
गडकरी ने यह भी कहा है कि प्रदूषण के नजरिए से, डीजल बहुत खतरनाक है और यह वास्तव में भारत में स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन रहा है। उस पर नजर रखते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि ऑटोमोबाइल उद्योग को अपने संबंधित वाहनों में वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। गडकरी ने कथित तौर पर कहा, "उद्योग जगत को मेरा सुझाव है कि प्रदूषण कम करने का सबसे अच्छा तरीका वैकल्पिक ईंधन पर ध्यान केंद्रित करना है।" उन्होंने कथित तौर पर इस बात पर भी जोर दिया कि वह किसी भी उद्योग के खिलाफ नहीं हैं और बताया कि भारत सरकार पहले से ही इलेक्ट्रिक कारों के लिए प्रोत्साहन दे रही है।
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12 सितंबर को ऑटोमोबाइल निर्माताओं के संगठन सियाम के वार्षिक सम्मेलन में बोलते हुए, गडकरी ने कहा कि भारत में प्रदूषण का बढ़ता स्तर एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता है और डीजल वाहनों की बिक्री को रोकने के लिए टैक्स में बढ़ोतरी का मामला है। उन्होंने कथित तौर पर कहा, "मैं वित्त मंत्री से डीजल इंजन/वाहनों पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत जीएसटी लगाने का अनुरोध कर रहा हूं। डीजल वाहनों को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने का यही एकमात्र तरीका है।" हालांकि, इसके तुरंत बाद, उन्होंने सरकार की स्थिति स्पष्ट करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X का सहारा लिया। "यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इस समय सरकार द्वारा इस तरह का कोई प्रस्ताव सक्रिय रूप से विचाराधीन नहीं है," गडकरी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, जिसमें मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए डीजल वाहनों पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत जीएसटी लगाने का सुझाव दिया गया था।
मौजूदा समय में, भारत में ऑटोमोबाइल पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगता है। इसके अलावा, वाहन के प्रकार के आधार पर एक प्रतिशत से 22 प्रतिशत तक सेस (उपकर) लगाया जाता है। एसयूवी और एमपीवी पर 22 फीसदी कंपनशेसन सेस (मुआवजा उपकर) के साथ 28 फीसदी की दर से सबसे ज्यादा जीएसटी लगता है। इससे यूटिलिटी व्हीकल्स पर कुल टैक्स भार 50 प्रतिशत हो जाता है।
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इस हफ्ते की शुरुआत में, उत्सर्जन में कटौती में मदद के लिए डीजल इंजन से चलने वाले वाहनों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स लगाने के बारे में नितिन गडकरी की टिप्पणी ने काफी विवाद पैदा किया था। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा सक्रिय रूप से विचाराधीन ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। कथित तौर पर मंत्री ने उस टिप्पणी को स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह डीजल ईंधन के खिलाफ नहीं हैं और सरकार डीजल वाहनों पर कोई टैक्स नहीं लगाने जा रही है।
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गडकरी ने यह भी कहा है कि प्रदूषण के नजरिए से, डीजल बहुत खतरनाक है और यह वास्तव में भारत में स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन रहा है। उस पर नजर रखते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि ऑटोमोबाइल उद्योग को अपने संबंधित वाहनों में वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। गडकरी ने कथित तौर पर कहा, "उद्योग जगत को मेरा सुझाव है कि प्रदूषण कम करने का सबसे अच्छा तरीका वैकल्पिक ईंधन पर ध्यान केंद्रित करना है।" उन्होंने कथित तौर पर इस बात पर भी जोर दिया कि वह किसी भी उद्योग के खिलाफ नहीं हैं और बताया कि भारत सरकार पहले से ही इलेक्ट्रिक कारों के लिए प्रोत्साहन दे रही है।
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12 सितंबर को ऑटोमोबाइल निर्माताओं के संगठन सियाम के वार्षिक सम्मेलन में बोलते हुए, गडकरी ने कहा कि भारत में प्रदूषण का बढ़ता स्तर एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता है और डीजल वाहनों की बिक्री को रोकने के लिए टैक्स में बढ़ोतरी का मामला है। उन्होंने कथित तौर पर कहा, "मैं वित्त मंत्री से डीजल इंजन/वाहनों पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत जीएसटी लगाने का अनुरोध कर रहा हूं। डीजल वाहनों को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने का यही एकमात्र तरीका है।" हालांकि, इसके तुरंत बाद, उन्होंने सरकार की स्थिति स्पष्ट करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X का सहारा लिया। "यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इस समय सरकार द्वारा इस तरह का कोई प्रस्ताव सक्रिय रूप से विचाराधीन नहीं है," गडकरी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, जिसमें मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए डीजल वाहनों पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत जीएसटी लगाने का सुझाव दिया गया था।
मौजूदा समय में, भारत में ऑटोमोबाइल पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगता है। इसके अलावा, वाहन के प्रकार के आधार पर एक प्रतिशत से 22 प्रतिशत तक सेस (उपकर) लगाया जाता है। एसयूवी और एमपीवी पर 22 फीसदी कंपनशेसन सेस (मुआवजा उपकर) के साथ 28 फीसदी की दर से सबसे ज्यादा जीएसटी लगता है। इससे यूटिलिटी व्हीकल्स पर कुल टैक्स भार 50 प्रतिशत हो जाता है।