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Mercedes-Benz: मर्सिडीज-बेंज ने छोड़ा निसान का साथ, 325 मिलियन डॉलर में बेचा पूरा हिस्सा

Wed, 27 Aug 2025 11:23 AM IST
नीतीश कुमार ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नीतीश कुमार Updated Wed, 27 Aug 2025 11:23 AM IST
सार

Mercedes-Benz Sells Stake In Nissan: जर्मन लग्जरी कार निर्माता मर्सिडीज़-बेंज ने निसान मोटर में अपनी 3.8% हिस्सेदारी बेच दी है। लगभग 325 मिलियन डॉलर की इस डील ने जापानी ऑटोमेकर के शेयरों को 6% तक गिरा दिया और कंपनी की मुश्किलें और बढ़ा दीं।

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mercedes benz sells nissan stake at 325 million us dollars
मर्सिडीज-निसान - फोटो : AI

विस्तार

मर्सिडीज-बेंज ने निसान मोटर में अपनी 3.8% हिस्सेदारी बेच दी है, जिसकी कीमत करीब 325 मिलियन डॉलर आंकी गई। यह बिक्री प्रति शेयर 341.3 येन की दर से हुई, जो निसान के पिछले क्लोजिंग प्राइस से लगभग 6% कम रही। इस कदम से निसान के शेयरों में एक ही दिन में करीब 6% की गिरावट दर्ज हुई, जो हाल के महीनों की सबसे बड़ी गिरावट थी।
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निसान की लंबी मुश्किलें
निसान लंबे समय से संकट झेल रहा है। कभी रेनो-निसान-मित्सुबिशी गठबंधन का अहम हिस्सा रहा यह ब्रांड, कार्लोस घोसन के दौर में वैश्विक विस्तार की ऊंचाइयों पर पहुंचा था। लेकिन 2018 में घोसन पर लगे गंभीर आरोप और उनके पद से हटने के बाद गठबंधन बुरी तरह कमजोर हो गया।
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इसके बाद से निसान लगातार संघर्ष कर रहा है। बिक्री घटी, मार्केट शेयर कम हुआ और कंपनी को बड़े पैमाने पर खर्चों में कटौती करनी पड़ी। इस साल रेनो ने भी निसान में अपनी हिस्सेदारी 15% से घटाकर 10% कर दी, जो विश्वास में कमी का संकेत था। निसान ने अप्रैल-जून 2025 में 535 मिलियन डॉलर का घाटा दर्ज किया। कंपनी का मार्केट कैप अब 10 बिलियन डॉलर से भी कम रह गया है और फ्री कैश फ्लो भी निगेटिव हो गया है।

नए सीईओ इवान एस्पिनोसा ने अप्रैल 2025 में पदभार संभालते हुए बड़े बदलावों की घोषणा की है। कंपनी ने अपनी वार्षिक उत्पादन क्षमता को 3.5 मिलियन से घटाकर 2.5 मिलियन यूनिट करने का ऐलान किया है। वहीं, 2027 तक कंपनी अपने ग्लोबल असेंबली प्लांट की संख्या 17 से घटाकर सिर्फ 10 ग्लोबल करेगी।


मर्सिडीज का कदम और उसका असर
मर्सिडीज-बेंज का कहना है कि यह पोर्टफोलियो मैनेजमेंट का सामान्य हिस्सा है। लेकिन बाजार इसे निसान पर घटते भरोसे के रूप में देख रहा है। हालांकि संस्थागत निवेशकों ने बड़ी संख्या में शेयर खरीदे, फिर भी निवेशकों का भरोसा कमजोर होता दिखा।

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निसान के सामने अब दोहरी चुनौती है – पुरानी गलतियों से उबरना और मौजूदा प्रतिस्पर्धा से लड़ना। चीनी ईवी कंपनियां तेजी से बाजार पर कब्जा कर रही हैं, अमेरिकी कंपनियां मुनाफे पर फोकस कर रही हैं और जापानी प्रतिद्वंद्वी टोयोटा तेजी से आगे निकल चुका है।
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