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Independence Day: भूटान के तोहफे से भारतीय सेना की शान तक, 59 साल पुरानी Jeep Wagoneer की अनोखी कहानी
Fri, 15 Aug 2025 10:48 AM IST
नीतीश कुमार
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Fri, 15 Aug 2025 10:48 AM IST
सार
Independence Day 2025: दिल्ली के लाल किले पर हर साल इंडिपेंडेंस डे परेड में कई झलकियां ध्यान खींचती हैं, लेकिन इस बार एक विंटेज कार ने सबका मन मोह लिया। यह सिर्फ एक कार नहीं, बल्कि 59 साल पुरानी सैन्य विरासत है।
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परेड में शामिल हुई जीप वैगनीयर कार
- फोटो : ANI
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विस्तार
दिल्ली के लाल किले पर 79वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में जहां गार्ड ऑफ ऑनर और सैनिक बैंड की गूंज ने माहौल को देशभक्ति से भर दिया, वहीं एक विंटेज कार चुपचाप सबका ध्यान अपनी ओर खींच रही थी। यह थी 59 साल पुरानी जीप वैगनीयर (Jeep Wagoneer), जिसने इस बार दिल्ली एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) लेफ्टिनेंट जनरल भावनीश कुमार को मुख्यालय से लाल किले तक पहुंचाया।
भूटान और भारत के रिश्ते की मिसाल
यह सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि दोस्ती, तकनीक और परंपरा का चलता-फिरता प्रतीक है। इस खास वैगनीयर को साल 1965 में भूटान के राजा ने भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को तोहफे में दिया था। यह उपहार भारत और भूटान के बीच मजबूत रिश्तों का प्रतीक था और जल्द ही यह भारत सरकार की शान बन गया।
साल 2000 में इस जीप को आधिकारिक तौर पर भारतीय सेना को सौंप दिया गया। तब से यह दिल्ली एरिया मुख्यालय के सेरेमोनियल बेड़े का हिस्सा है।
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भूटान और भारत के रिश्ते की मिसाल
यह सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि दोस्ती, तकनीक और परंपरा का चलता-फिरता प्रतीक है। इस खास वैगनीयर को साल 1965 में भूटान के राजा ने भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को तोहफे में दिया था। यह उपहार भारत और भूटान के बीच मजबूत रिश्तों का प्रतीक था और जल्द ही यह भारत सरकार की शान बन गया।
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साल 2000 में इस जीप को आधिकारिक तौर पर भारतीय सेना को सौंप दिया गया। तब से यह दिल्ली एरिया मुख्यालय के सेरेमोनियल बेड़े का हिस्सा है।
भारत और भूटान की दोस्ती की मिसाल है कार
- फोटो : ANI
29 साल तक चला प्रोडक्शन
जीप वैगनीयर का इतिहास भी कम दिलचस्प नहीं है। इसे 1962 से 1991 तक लगातार बनाया गया और यह उस दौर की पहली गाड़ियों में से एक थी जिसे बाद में SUV की श्रेणी में रखा गया। असल में, Jeep ने 1974 में चेरोकी लॉन्च करते समय पहली बार "SUV" शब्द का इस्तेमाल किया, लेकिन वैगनीयर ही इस क्लास की शुरुआती मिसाल थी।
कंपनी ने बिना किसी बड़े डिजाइन बदलाव के साथ 29 साल तक इसका प्रोडक्शन जारी रखा, जिसके कारण यह अमेरिकी ऑटोमोबाइल इतिहास की तीसरी सबसे लंबे समय तक बनी एकल-जनरेशन SUV मानी जाती है।
सेना करती है रखरखाव
हालांकि इसका पुराना मॉडल अब बाजार में नहीं है, लेकिन सेना की यह Wagoneer पूरी तरह रिस्टोर की गई है। इसमें अब फोर्ड एंडेवर का 2500cc इंजन लगाया गया है, जिससे यह पूरी तरह चलने योग्य है, जबकि इसका विंटेज लुक बरकरार रखा गया है।
हर साल इंडिपेंडेंस डे पर जनरल ऑफिसर कमांडिंग के मुख्यालय से लाल किले तक का सफर एक खास परंपरा है, जिसमें सैन्य अनुशासन के साथ ऐतिहासिक शान भी झलकती है और इसके केंद्र में हमेशा यह कार रहती है।
तकनीक के लगातार बदलते दौर में भी यह क्लासिक कार अतीत और वर्तमान को जोड़ने वाला एक मजबूत पुल है। यह न सिर्फ एक वाहन है, बल्कि एक चलती-फिरती विरासत है, जिसने दशकों से भारत के स्वतंत्रता दिवस का साक्षी बनने का गौरव हासिल किया है।
जीप वैगनीयर का इतिहास भी कम दिलचस्प नहीं है। इसे 1962 से 1991 तक लगातार बनाया गया और यह उस दौर की पहली गाड़ियों में से एक थी जिसे बाद में SUV की श्रेणी में रखा गया। असल में, Jeep ने 1974 में चेरोकी लॉन्च करते समय पहली बार "SUV" शब्द का इस्तेमाल किया, लेकिन वैगनीयर ही इस क्लास की शुरुआती मिसाल थी।
कंपनी ने बिना किसी बड़े डिजाइन बदलाव के साथ 29 साल तक इसका प्रोडक्शन जारी रखा, जिसके कारण यह अमेरिकी ऑटोमोबाइल इतिहास की तीसरी सबसे लंबे समय तक बनी एकल-जनरेशन SUV मानी जाती है।
सेना करती है रखरखाव
हालांकि इसका पुराना मॉडल अब बाजार में नहीं है, लेकिन सेना की यह Wagoneer पूरी तरह रिस्टोर की गई है। इसमें अब फोर्ड एंडेवर का 2500cc इंजन लगाया गया है, जिससे यह पूरी तरह चलने योग्य है, जबकि इसका विंटेज लुक बरकरार रखा गया है।
हर साल इंडिपेंडेंस डे पर जनरल ऑफिसर कमांडिंग के मुख्यालय से लाल किले तक का सफर एक खास परंपरा है, जिसमें सैन्य अनुशासन के साथ ऐतिहासिक शान भी झलकती है और इसके केंद्र में हमेशा यह कार रहती है।
तकनीक के लगातार बदलते दौर में भी यह क्लासिक कार अतीत और वर्तमान को जोड़ने वाला एक मजबूत पुल है। यह न सिर्फ एक वाहन है, बल्कि एक चलती-फिरती विरासत है, जिसने दशकों से भारत के स्वतंत्रता दिवस का साक्षी बनने का गौरव हासिल किया है।