Car fuel saving tips: क्या AC बंद करने या धीमे चलाने से बढ़ेगा कार का माइलेज? जानें पेट्रोल बचाने का सही तरीका
Car mileage tips: कार चलाने वाला हर व्यक्ति चाहता है कि उसकी गाड़ी कम से कम ईंधन में ज्यादा से ज्यादा दूरी तय करे। फ्यूल बचाने के चक्कर में अक्सर लोग एसी बंद कर देते हैं या बहुत धीमी स्पीड में गाड़ी चलाने लगते हैं और सोचते हैं कि इससे माइलेज बढ़ जाएगा। लेकिन क्या वाकई ऐसा होता है? क्या कार का AC, टायर प्रेशर और Eco जैसे ड्राइविंग मोड्स आपकी कार की फ्यूल एफिशिएंसी पर बड़ा असर डालते हैं? अगर डालते हैं, तो कितना? आइए यहां जानते हैं इससे जुड़ी हर बात।
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How to save car fuel: हर कार मालिक चाहता है कि उसकी गाड़ी कम ईंधन में ज्यादा दूरी तय करे, लेकिन क्या आपको पता है कि माइलेज सिर्फ इंजन या कार के मॉडल पर निर्भर नहीं करता। एसी का इस्तेमाल, टायर प्रेशर, ड्राइविंग मोड और ड्राइविंग की आदतें भी फ्यूल कंजम्पशन पर असर डाल सकती हैं।
अगर आप भी पेट्रोल या ईंधन की बचत करना चाहते हैं, तो कुछ आसान आदतों को अपनाकर आप अपनी कार की फ्यूल एफिशिएंसी बेहतर रखने में मदद कर सकते हैं।
क्या एसी बंद रखने से बचेगा पेट्रोल?
- देखिए कार का एसी इंजन या बैटरी से ऊर्जा लेता है। इसलिए इसका इस्तेमाल फ्यूल कंजम्पशन को प्रभावित कर सकता है। खासकर गर्म मौसम में लगातार एसी चलाने पर ईंधन की खपत बढ़ सकती है।
- हालांकि, माइलेज बढ़ाने के लिए हर समय एसी बंद करके कार चलाना सही तरीका नहीं है। तेज रफ्तार में खिड़कियां खोलकर चलाने से हवा का प्रतिरोध बढ़ सकता है। ऐसे में एसी बंद रखने से मिलने वाला फायदा उतना नहीं हो सकता जितना आप सोच रहे हैं।
- इसलिए एसी को जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करना बेहतर है। कार में बैठते ही एसी को बहुत कम तापमान पर सेट करने के बजाय सामान्य और आरामदायक तापमान रखना बेहतर तरीका है।
किस चीज का ध्यान रखना चाहिए?
- कार के माइलेज में टायर प्रेशर की भी भूमिका बहुत होती है। अगर टायर में हवा कम है, तो सड़क के साथ टायर का संपर्क और रोलिंग रेजिस्टेंस बढ़ सकता है।
- ऐसे में इंजन को कार को आगे बढ़ाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है और ईंधन की खपत बढ़ सकती है।
- इसलिए कार के टायर में वही प्रेशर रखना चाहिए जिसकी सलाह कार निर्माता ने दी है। यह जानकारी आमतौर पर डोर फ्रेम, फ्यूल लिड के पास या ओनर मैनुअल में दी जाती है।
इको मोड से मिल सकती है मदद
- आपने सुना होगा कि आजकल कई कारों में इको, नॉर्मल और स्पोर्ट जैसे अलग-अलग ड्राइविंग मोड दिए जाते हैं। ये मोड कार के थ्रॉटल रिस्पॉन्स, गियर शिफ्टिंग और कुछ मॉडलों में AC या दूसरे सिस्टम के काम करने के तरीके को बदल सकते हैं।
- अगर आपका मकसद ज्यादा माइलेज पाना है और सड़क की स्थिति सामान्य है, तो इको मोड मददगार हो सकता है। इसे कार को ज्यादा एग्रेसिव तरीके से एक्सेलरेट करने से रोकने और शांत ड्राइविंग को बढ़ावा देने के लिए डिजाइन किया जाता है।
- हालांकि, हर परिस्थिति में इको मोड जरूरी नहीं है। जरूरत के अनुसार सही ड्राइविंग मोड चुनना बेहतर है।
स्मूद ड्राइविंग से भी बचता है ईंधन
- माइलेज बेहतर रखने के लिए सिर्फ एसी और इको मोड पर ही निर्भर रहना सही नहीं। आपकी ड्राइविंग स्टाइल भी इसके लिए काफी मायने रखती है।
- बार-बार तेज एक्सेलरेशन और अचानक ब्रेक लगाने से बचें। कोशिश करें कि कार को स्थिर और नियंत्रित गति पर चलाया जाए। इससे अनावश्यक फ्यूल कंजम्पशन को कम करने में मदद मिल सकती है।
कार को लंबे समय तक आइडल न रखें
- अगर कार लंबे समय तक खड़ी है और उसे चलाने की जरूरत नहीं है, तो इंजन को बेवजह चालू रखकर न छोड़ें। लंबे समय तक आइडलिंग से बिना दूरी तय किए ईंधन खर्च होता रहता है।
- इसी तरह कार में जरूरत से ज्यादा भारी सामान रखने से भी बचें। अतिरिक्त वजन को खींचने में कार को ज्यादा ऊर्जा की जरूरत पड़ सकती है।
नियमित सर्विस भी जरूरी
- कार की नियमित सर्विस को नजरअंदाज न करें। इंजन, टायर और दूसरे जरूरी कंपोनेंट्स की सही स्थिति कार की फ्यूल एफिशिएंसी बनाए रखने में मदद करती है।
- इसलिए समय पर सर्विस करवाएं, निर्माता की सलाह के अनुसार मेंटेनेंस करें और कार की तकनीकी स्थिति पर ध्यान दें।