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Quadricycle: ई-क्वाड्रिसाइकिल के लिए नए नियम तय; 80 किमी की न्यूनतम रेंज और लोकल मैन्युफैक्चरिंग जरूरी

Sat, 17 Jan 2026 09:29 AM IST
सुयश पांडेय ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुयश पांडेय Updated Sat, 17 Jan 2026 09:29 AM IST
सार

केंद्र सरकार ने 25,938 करोड़ रुपये की PLI योजना के तहत इलेक्ट्रिक क्वाड्रिसाइकिल के लिए नए और सख्त नियम लागू किए हैं। अब इंसेंटिव पाने के लिए वाहनों को कम से कम 80 किमी की रेंज और 100 किमी में 12 kWh से कम ऊर्जा खपत जैसे मानकों पर खरा उतरना होगा। इनकी टेस्टिंग ARAI और ICAT जैसी एजेंसियां करेंगी।

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India Tightens PLI Rules for Electric Quadricycles with 80 km Range and Efficiency Norms
Bajaj Qute Electric Quadricycle - फोटो : X

विस्तार

केंद्र सरकार ने 25,938 करोड़ रुपये की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के तहत इलेक्ट्रिक क्वाड्रिसाइकिल के लिए नए और सख्त नियम जारी किए हैं। भारी उद्योग मंत्रालय ने 13 जनवरी को एक अधिसूचना जारी कर इन नए मानकों की घोषणा की। इसका उद्देश्य भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की गुणवत्ता बढ़ाना और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है। नए नियमों के मुताबिक, कंपनियों को प्रोत्साहन प्राप्त करने के लिए कड़े टेस्टिंग और प्रदर्शन मानकों का पालन करना होगा।

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नए प्रदर्शन मानक क्या हैं?

सरकार ने इलेक्ट्रिक क्वाड्रिसाइकिल के लिए दो प्रमुख शर्तें रखी हैं:
न्यूनतम रेंज रेंज: एक बार फुल चार्ज होने पर वाहन को कम से कम 80 किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी।
ऊर्जा खपत: वाहन की ऊर्जा खपत 100 किलोमीटर के लिए 12 किलोवाट-घंटे (kWh) से कम होनी चाहिए। कम ऊर्जा खपत का मतलब है कि वाहन ज्यादा एनर्जी एफिशिएंट है।

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इन मानकों की जांच सरकार की टेस्टिंग एजेंसियां, जैसे कि ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) और इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (ICAT) करेंगी। जो मॉडल इन पैमानों पर खरे उतरेंगे, वे ही PLI स्कीम के तहत लाभ के पात्र होंगे।

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गुणवत्ता और निर्यात पर जोर

टेरी (TERI) के एसोसिएट डायरेक्टर शरीफ कमर के अनुसार, "बैटरी और वाहन के लिए ये मानक बाजार में उतारे जाने वाले उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। पिछले अनुभवों को देखते हुए, जहां खराब गुणवत्ता वाले वाहन लॉन्च किए गए थे, यह कदम बहुत जरूरी है।"


क्वाड्रिसाइकिल छोटे चार-पहिया वाहन होते हैं जो यात्रियों (L7M श्रेणी) और सामान (L7N श्रेणी) ढोने के लिए उपयोग किए जाते हैं। भारत में बनने वाले इन वाहनों का एक बड़ा हिस्सा निर्यात किया जाता है। सियाम (SIAM) के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में भारत में बनी 5,090 क्वाड्रिसाइकिल में से लगभग 98% (4,900 से ज्यादा यूनिट्स) निर्यात की गईं। नए मानकों से भारतीय निर्माताओं को अफ्रीकी, दक्षिण एशियाई और लैटिन अमेरिकी बाजारों में बढ़त मिल सकती है।

बाजार की मौजूदा स्थिति और बजाज की योजना

वाहन (Vahan) पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में भारत में एक भी इलेक्ट्रिक क्वाड्रिसाइकिल नहीं बिकी है। इस सेगमेंट में अभी भी सीएनजी (CNG) वाहनों का दबदबा है। पुणे स्थित बजाज ऑटो इस क्षेत्र में सबसे बड़ी खिलाड़ी है, जिसने पिछले दो वर्षों में 340 क्वाड्रिसाइकिल बेची हैं। बजाज ऑटो के कार्यकारी निदेशक राकेश शर्मा ने अप्रैल 2024 में कहा था कि कंपनी अपने लोकप्रिय मॉडल 'क्यूट' (Qute) के इलेक्ट्रिक वर्जन पर काम कर रही है और वे इसमें निवेश कर रहे हैं।

लोकल मैन्युफैक्चरिंग की शर्त

PLI-ऑटो स्कीम के तहत प्रोत्साहन पाने के लिए एक और महत्वपूर्ण शर्त यह है कि वाहनों में 50% स्थानीयकरण होना चाहिए। इसका मतलब है कि वाहन के कम से कम आधे कल-पुर्जे भारत में ही बने होने चाहिए। सरकार ने इन नए नियमों को 'पीएम ई-ड्राइव' योजना के साथ भी जोड़ा है, जिसने पुरानी FAME-II योजना की जगह ली है।

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