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Hindi News ›   Automobiles News ›   India Proposes BS-VII Emission Norms Starting April 2029: Check Phases, EV Rules, Fuel Limits And Details

भारत में कब से लागू हो सकते हैं बीएस-7 उत्सर्जन मानक?: ईवी बैटरी, प्रदूषण सीमा और तीन चरणों की पूरी जानकारी

Tue, 20 Oct 2026 12:06 AM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Tue, 20 Oct 2026 12:06 AM IST
सार

भारत में वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सरकार एक और बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने यात्री कारों और SUV के लिए भारत स्टेज-VII उत्सर्जन मानक लागू करने का प्रस्ताव रखा है। जानें पूरी डिटेल्स।

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India Proposes BS-VII Emission Norms Starting April 2029: Check Phases, EV Rules, Fuel Limits And Details
BS-7 Emission Norms - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, केंद्र सरकार ने देश में भारत स्टेज 7 (BS-VII) उत्सर्जन मानक को लागू करने का प्रस्ताव रखा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा जारी एक मसौदा अधिसूचना के मुताबिक, ये नए मानक अप्रैल 2029 से मुख्य रूप से एम1 श्रेणी के यात्री वाहनों, यानी कार और एसयूवी पर लागू होंगे। 
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  • जनता का फीडबैक: मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन को अंतिम रूप देने से पहले 30 दिनों के भीतर आम जनता और हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। अप्रैल 2020 में देशव्यापी बीएस-6 लागू होने के बाद यह भारत का अगला बड़ा विनियामक कदम है। 
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BS-VII नियमों का तीन चरणों वाला रोडमैप क्या है?

सरकार ने इस बार प्रदूषण नियंत्रण के नियमों को तीन अलग-अलग चरणों में बांटा है:
  • फेज-1 (1 अप्रैल 2029): इसमें पैसेंजर वाहनों के लिए एग्जॉस्ट एमिशन लिमिट्स के साथ-साथ इवेपोरेटेड एमिशन, फ्यूल कंजम्पशन, इलेक्ट्रिक एनर्जी कंजम्पशन और बैटरी ड्यूरेबिलिटी के नियम शामिल होंगे। वाहनों की जांच लैबोरेटरी और रियल ड्राइविंग एमिशन (RDE) टेस्ट के जरिए होगी। साथ ही खरीदारों के लिए 'एनवायरनमेंटल व्हीकल पासपोर्ट' भी पेश किया जाएगा। जिससे एमिशन और बैटरी हेल्थ की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
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  • फेज-2 (1 अप्रैल 2031): इसमें नॉन-एग्जॉस्ट एमिशन (जैसे ब्रेक-पार्टिकल मास और टायर घिसाव) को भी दायरे में लाया जाएगा। इसके तहत शुद्ध इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए ब्रेक-पार्टिकल मास लिमिट 3 mg/km और अन्य वाहनों के लिए 7 mg/km तय की गई है।
  • फेज-3 (1 अप्रैल 2035): इसके तहत सभी प्रकार के पावरट्रेन के लिए ब्रेक-पार्टिकल मास की सीमा को घटाकर 3 mg/km कर दिया जाएगा और पार्टिकल-नंबर कंट्रोल को और सख्त किया जाएगा।

 

गाड़ियों के लिए प्रदूषण और ईंधन की नई सीमाएं क्या तय की गई हैं?

यह मसौदा पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, एलपीजी, ई20 जैसे इथेनॉल मिश्रण, फ्लेक्स-फ्यूल, हाइड्रोजन, हाइब्रिड और बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों सहित सभी तरह के पावरट्रेन को कवर करता है। एम1 कैटेगरी के वाहनों के लिए प्रस्तावित मुख्य सीमाएं इस प्रकार हैं:
प्रदूषण कारक पेट्रोल इंजन सीमा डीजल इंजन सीमा
कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) 1,000 mg/km 500 mg/km
नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) 60 mg/km 80 mg/km
पार्टिकुलेट मैटर (PM) 4.5 mg/km 4.5 mg/km
  • अन्य नियम: 1 अप्रैल 2030 से टाइप अप्रूवल के लिए RDE टेस्ट अनिवार्य होगा। इसके अलावा, पेट्रोल और डीजल मॉडल जो जियोफेंसिंग क्षमताओं से लैस होंगे, उन्हें 'BS-VII-G' कैटेगरी के तहत प्रमाणित किया जा सकेगा।

 

इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी की ड्यूरेबिलिटी के लिए क्या नियम हैं?

खास बात यह है कि BS-VII नियमों के इतिहास में पहली बार इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को भी दायरे में लाया गया है:
  • बैटरी लाइफ की गारंटी: नए नियमों के तहत, प्योर इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड वाहनों की ट्रैक्शन बैटरी को पहले 5 साल या 100,000 किमी तक कम से कम 75 प्रतिशत और 8 साल या 160,000 किमी तक कम से कम 67 प्रतिशत परफॉर्मेंस (क्षमता) बनाए रखनी होगी।
  • स्मार्ट मॉनिटरिंग: गाड़ियों में एडवांस ऑन-बोर्ड डायग्नोस्टिक्स (OBD) और ऑन-बोर्ड मॉनिटरिंग (OBM) सिस्टम होना अनिवार्य होगा। जो अनुमेय सीमा से 2.5 गुना अधिक एमिशन होने पर तुरंत अलर्ट कर सकें। साथ ही, 1 अप्रैल 2030 से रियल-टाइम फ्यूल कंजम्पशन डेटा और 2032 से OTA (ओवर-द-एयर) ट्रांसमिशन के जरिए डेटा एक्सेस करना अनिवार्य होगा। 
 

नई कार खरीदने वालों को BS-VII नियमों के लिए अभी क्या करना चाहिए?

फिलहाल BS-VII नियमों को लेकर जारी जानकारी एक मसौदा प्रस्ताव पर आधारित है। मंत्रालय ने जनता से 30 दिनों के भीतर सुझाव मांगे हैं, इसलिए अंतिम नियमों और उनकी शर्तों में बदलाव हो सकता है।

यदि आप जल्द नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो केवल प्रस्तावित BS-VII मानकों के कारण खरीदारी टालने या जल्दबाजी में फैसला लेने की जरूरत नहीं है। कार चुनते समय अपनी जरूरत, बजट, ईंधन की लागत और वाहन की तकनीक को प्राथमिकता दें। साथ ही, सरकार की अंतिम अधिसूचना और वाहन निर्माता कंपनियों की आधिकारिक जानकारी पर नजर रखें।

अप्रैल 2029 से BS-VII लागू करने का प्रस्ताव भारत में वाहन प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में एक अहम बदलाव हो सकता है। इसमें एग्जॉस्ट उत्सर्जन के साथ बैटरी की टिकाऊ क्षमता, टायर और ब्रेक से निकलने वाले कणों तथा डिजिटल निगरानी पर भी जोर दिया गया है। हालांकि, इन नियमों की अंतिम समयसीमा और प्रावधानों की पुष्टि सरकार की अंतिम अधिसूचना के बाद ही होगी।

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