EV: भारत-जर्मनी का प्लान, अब देश में दौड़ेंगी हाई-टेक इलेक्ट्रिक गाड़ियां, मेक इन इंडिया को मिलेगी रफ्तार
India Germany EV cooperation: भारत अब इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में वैश्विक साझेदारियों को तेजी से मजबूत कर रहा है। इसी दिशा में भारत और जर्मनी के बीच नई दिल्ली में एक अहम बैठक हुई, जिसमें स्मार्ट फैक्ट्री, EV टेक्नोलॉजी, इंडस्ट्रियल डिजिटलीकरण और कम कार्बन उत्सर्जन वाली तकनीकों पर सहयोग बढ़ाने को लेकर चर्चा हुई।
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Electric Mobility and Decarbonisation: भारत अब इलेक्ट्रिक वाहनों और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी दिशा में भारत और जर्मनी के बीच नई दिल्ली में एक अहम बैठक हुई, जिसमें इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, स्मार्ट फैक्ट्री और आधुनिक औद्योगिक टेक्नोलॉजी को लेकर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की गई। इसमें सरकार का फोकस अब सिर्फ वाहन बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे इंडस्ट्री तैयार करना है जो डिजिटल, स्मार्ट और पर्यावरण के लिए बेहतर हो।
A German delegation led by Mr. Ernst Stoeckl-Pukall, Head of BMWE, German Federal Ministry of Economic Affairs and Energy, along with representatives from the German Embassy, VDMA India and Siemens, met Dr. Hanif Qureshi, Additional Secretary, Ministry of Heavy Industries, along… pic.twitter.com/RK59QhY9Ha
— Ministry of Heavy Industries (@MHI_GoI) May 22, 2026
नई टेक्नोलॉजी पर साथ काम करेंगे भारत और जर्मनी
इस बैठक में भारत के भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) और जर्मनी के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। जर्मन टीम का नेतृत्व अर्न्स्ट स्टॉक्ल-पुकाल ने किया। बैठक में जर्मन दूतावास, VDMA इंडिया और Siemens जैसी कंपनियों के प्रतिनिधि भी शामिल रहे। इसमें भारत की ओर से भारी उद्योग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव हनिफ कुरैशी व अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
बैठक में कई अहम विषयों पर बातचीत हुई। इसमें खासतौर पर स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), इंडस्ट्री 4.0, क्लीन और कम कार्बन टेक्नोलॉजी, स्किल डेवलपमेंट, टेक्नाेलॉजी पार्टनरशिप और जॉइंट वेंचर्स और निवेश पर फोकस किया गया। दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि आने वाले समय में आधुनिक फैक्ट्री और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी दुनिया की सबसे बड़ी जरूरत बनने वाली है।
Manufacturing-X क्या है?
बैठक के दौरान इंटरनेशनल मैन्युफैक्चरिंग-X (IMX) के बारे में भी चर्चा हुई। इसका मकसद फैक्ट्री और उद्योगों को ज्यादा स्मार्ट और डिजिटल बनाना है। इसके जरिए कंपनियां डेटा शेयरिंग, ऑटोमेशन और नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके उत्पादन को तेज और बेहतर बना सकती हैं। इससे भविष्य की स्मार्ट फैक्ट्री तैयार करने में मदद मिलेगी।
EV और क्लीन मोबिलिटी पर बढ़ेगा फोकस
भारत और जर्मनी अब इलेक्ट्रिक वाहनों और पर्यावरण के अनुकूल टेक्नोलॉजी पर साथ मिलकर काम करना चाहते हैं। बैठक में ईवी टेक्नोलॉजी, बैटरी सिस्टम, क्लीन मोबिलिटी और कम कार्बन उत्सर्जन वाली इंडस्ट्री को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। सरकार चाहती है कि भारत में ज्यादा से ज्यादा आधुनिक टेक्नोलॉजी का लोकल मैन्युफैक्चरिंग हो।
यह साझेदारी मेक इन इंडिया और इंडस्ट्री 4.0 मिशन के लिए भी अहम मानी जा रही है। भारत अब ऐसी इंडस्ट्री बनाना चाहता है जो स्मार्ट हो, डिजिटल हो, पर्यावरण के लिए बेहतर हो और दुनिया के साथ मुकाबला कर सके। जर्मनी पहले से ही इंजीनियरिंग और ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी में मजबूत देश माना जाता है। ऐसे में यह सहयोग भारत के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है।
ऑटो सेक्टर को मिल सकती है नई रफ्तार
ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस साझेदारी से भारत के ऑटोमोबाइल और ईवी सेक्टर को बड़ा फायदा मिल सकता है। इससे नई टेक्नोलॉजी, निवेश और स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा। आने वाले समय में भारत में स्मार्ट फैक्ट्री, एडवांस ऑटोमेशन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का विस्तार और तेज हो सकता है।