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अगर आपके पास है इस साल से पहले की बाइक या कार, तो जल्द हो सकती है 'कबाड़'

Mon, 30 Sep 2019 02:22 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला
ऑटो डेस्क, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 30 Sep 2019 02:22 PM IST
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If You have a earlier 2005 car or bike, may be scrapped soon, Vehicle scrappage policy on the way
15 years old vehicles scrap - फोटो : Social

कई दिनों से प्रस्तावित वाहन कबाड़ नीति को कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा गया है। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो साल 2005 के पहले के रजिस्टर्ड वाहनों के लिए फिर से रजिस्ट्रेशन और फिटनेस करवाना महंगा पड़ सकता है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक देश में इन दिनों 2005 से पहले के रजिस्टर्ड दो करोड़ से ज्यादा वाहन सड़कों पर हैं।

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कैबिनेट नोट को मंजूरी

सरकार के इस कदम के बाद इन वाहनों का दोबारा से पंजीकरण कराना महंगा साबित हो सकता है। नए उत्सर्जन मानकों के मुताबिक नए वाहनों के मुकाबले ये वाहन 10 से 25 फीसदी तक ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं। पिछले हफ्ते सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया था कि उन्होंने प्रस्तावित निति पर बनाए गए कैबिनेट नोट को मंजूरी दे दी है।

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ठीक रखरखाव के बावजूद प्रदूषण

सूत्रों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में भारत के वाहन बाजार में काफी गति आई है। अगर पुराने प्रदूषण उत्सर्जन मानकों से तुलना करें, तो साल 2005 से पुराने वाहन नए मानकों से 10 से 25 फीसदी तक ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं। यहां तक कि अगर इन वाहनों का रखरखाव सावधानी से भी किया जाए, तो भी वे उत्सर्जन मानकों से ज्यादा प्रदूषण करेंगे। साथ ही सड़क सुरक्षा के लिए भी हानिकारक हैं।

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हर साल फिटनेस सर्टिफिकेशन जरूरी

मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि प्रस्तावित नीति में निजी वाहनों के लिए रजिस्ट्रेशऩ फीस बढ़ाने के साथ ट्रांसपोर्ट वाहनों के लिए फिटनेस सर्टिफिकेशन चार्जेज में बढ़ोतरी की गई है। ऐसे वाहनों को सड़कों से हटाने के लिए प्रस्तावित नीति में और भी कई प्रावधान हो सकते हैं। इनमें ट्रांसपोर्ट वाहनों को हर साल फिटनेस सर्टिफिकेशन जरूरी बनाया जा सकता है।

वाहनों का डाटाबेस भी बनेगा

साथ ही इस नीति में गाड़ी में लगे एयरबैग्स को वैज्ञानिक तरीकों से डिस्पोजल के साथ साइलेंसर में मिलने वाली धातुओं और रबर का इको-फ्रेंडली तरीके से निपटान किया जाएगा। वहीं गाड़ी से निकलने वाले इंजन ऑयल को जमीन पर नहीं फैंका जाएगा, बल्कि वैज्ञानिक तरीकों से निपटा जाएगा। स्टील मंत्रालय ऐसे स्क्रैपिंग सेंटर्स पर काम कर रहा है और सड़ मंत्रालय इन्हें मान्यता देगा। साथ ही, किसी भी तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए ऐसे वाहनों का डाटाबेस भी बनाया जाएगा।

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