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Hindi News ›   Automobiles News ›   From Curtiss Autoplane to SpaceX Powered Tesla Roadster 100 Year History of Flying Cars

सड़कों से आसमान तक का सफर: कर्टिस के 'ऑटोप्लेन' से टेस्ला रोडस्टर तक, कब-कब बनाई गई उड़ने वाली कार?

Sat, 17 Oct 2026 01:12 PM IST
कुलदीप शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुलदीप शर्मा Updated Sat, 17 Oct 2026 01:12 PM IST
सार

टेस्ला ने हाल ही में अपनी फ्लाइंग सुपर कार पेश की है। 1917 के 'कर्टिस ऑटोप्लेन' से शुरू हुआ यह सफर स्पेसएक्स थ्रस्टर्स तक पहुंच गया है। आइए जानते हैं कि इस पूरी कल्पना के सच में बदलने का क्या इतिहास रहा है।

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From Curtiss Autoplane to SpaceX Powered Tesla Roadster 100 Year History of Flying Cars
उड़ने वाली कार - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

साइंस की कहानियों और अंतरिक्ष पर बनी फिल्मों में उड़ने वाली कारें हमेशा से इंसानी कल्पना और आकर्षण का केंद्र रही हैं। जब भी दुनिया में कोई बड़ी तकनीकी छलांग लगाती है तो 'फ्लाइंग कार' का सपना फिर से जी उठता है। हाल ही में टेस्ला रोडस्टर के नए मॉडल और स्पेसएक्स थ्रस्टर्स की घोषणा के बाद एक बार फिर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या सचमुच हमारी सड़कें आसमान से जुड़ने वाली हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सपना कोई आज का नहीं है बल्कि इसके पीछे एक सदी से अधिक का संघर्ष, प्रयोग और रोमांचक इतिहास छिपा है। आइए विस्तार से जानते हैं कि उड़ने वाली कारों को लेकर इतिहास में कब-कब और कैसे प्रयास किए गए हैं।

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उड़ने वाली कारों की कैसे हुई शुरूआत?

सन 1917 में विमानन इतिहास के शुरुआती पुरोधा ग्लेन कर्टिस ने दुनिया का पहला 'ऑटोप्लेन' मॉडल दुनिया के सामने पेश किया था. इसमें तीन पंखों वाली एक कार का ढांचा तैयार किया गया था। हालांकि यह मॉडल पूरी तरह से स्वतंत्र उड़ान भरने में सफल नहीं हो सका लेकिन इसने भविष्य के डिजाइनरों की कल्पना को एक नई उड़ान जरूर दी. साथ ही उड़ने वाली कारों की अवधारणा की एक मजबूत नींव रखी।

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हेनरी फोर्ड ने की थी भविष्यवाणी

सन 1940 में ऑटोमोबाइल उद्योग के दिग्गज हेनरी फोर्ड ने एक ऐतिहासिक भविष्यवाणी की थी. उन्होंने कहा था कि एक दिन हवाई जहाज और कार का मेल जरूर बाजार में उतरेगा। उनकी इस बात ने कई इंजीनियरों को प्रेरित किया. जिसकी वजह से आगे चलकर साल 1946 में रॉबर्ट फुलटन ने 'एरोकार' या Airphibian विकसित किया जिसे अमेरिकी अधिकारियों से सड़क और आसमान दोनों जगह चलने की आधिकारिक मंजूरी भी मिली थी।

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1970 का जोखिम भरा प्रयोग

सन 1970 के दशक में इस क्षेत्र में एक काफी अनोखा और जोखिम भरा प्रयोग किया गया जब 1973 में 'एवे-मिजार' नामक हाइब्रिड प्रोजेक्ट ने सुर्खियां बटोरीं। इसमें एक लोकप्रिय कार 'फोर्ड पिंटो' के पिछले हिस्से में सेसना विमान के पंखों और इंजन को जोड़ा गया था लेकिन एक टेस्ट फ्लाइट के दौरान पंख टूट जाने से यह दुर्घटनाग्रस्त हो गई और इस प्रोजेक्ट पर रोक दिया गया।

एवियोनिक्स से कैसे आगे बढ़ी टेक्नोलॉजी?

  1. 2000 के दशक की शुरुआत के साथ ही नए सामानों और आधुनिक एवियोनिक्स के आने से इस तकनीक को नई जिंदगी मिल गई. इसके तहत 2006 में एमआईटी के इंजीनियरों ने 'टेराफुगिया ट्रांजिशन' की नींव रखी। यह एक ऐसी गाड़ी थी जिसके पंख एक बटन दबाकर मोड़े जा सकते थे ताकि इसे सड़क पर भी चलाया जा सके और इसी कड़ी में डच कंपनी 'पाल-वी' ने भी गाइरोकोप्टर जैसे मॉडल पेश किए।

  2. 2010 से 2020 के बीच के दशक में अर्बन एयर मोबिलिटी और इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग यानी eVTOL टेक्नॉलॉजी ने परिवहन के क्षेत्र में पूरी तरह से क्रांति ला दी। उबर एलिवेट और जॉबी एविएशन जैसी कंपनियों ने इलेक्ट्रिक मोटरों पर जोर दिया और दुनिया भर के महानगरों में ट्रैफिक की समस्या से निपटने के लिए फ्लाइंग टैक्सियों के प्रायोगिक परीक्षण शुरू किए गए। इस दौर ने साबित कर दिया कि फ्लाइंग कारें अब केवल मनोरंजन या फिल्मों की चीज नहीं बल्कि आने वाले समय की एक व्यावहारिक और व्यावसायिक जरूरत बनने जा रही हैं।

टेस्ला रोडस्टर और स्पेसएक्स तकनीक क्या है? 

हाल के वर्षों में एलन मस्क के नेतृत्व में टेस्ला रोडस्टर ने इस रेस को एक बिल्कुल नए मुकाम पर पहुंचा दिया है। हाल ही में टेस्ला ने अपनी फ्लाइंग सुपर कार पेश भी कर दी है. अंतरिक्ष तकनीक से प्रेरित होकर इस सुपरकार में 'कोल्ड-गैस थ्रस्टर्स' और अंडरबॉडी सक्शन फैन को शामिल किया गया है। यह तकनीक कार को मात्र कुछ ही सेकंड में असाधारण रफ्तार देने के साथ-साथ सड़कों से कुछ इंच ऊपर 'होवर' करने यानी हवा में तैरने की क्षमता देती करती है। यह ऑटोमोबाइल और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग का अब तक का सबसे अनोखा कोलेब्रेशन माना जा रहा है।

भविष्य का रास्ता कितना साफ? 

हालांकि इस तकनीक का विकास बहुत रोमांचक है लेकिन इसके सामने कई बड़ी चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ा सवाल एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट, सुरक्षा नियमों, ईंधन दक्षता और लाइसेंसिंग का है। यदि लाखों वाहन आसमान में उड़ने लगेंगे, तो उनके लिए ट्रैफिक नियम और एयर-कॉरिडोर्स तय करना सरकारों के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा भारी लागत और मेंटेनेंस भी इसे फिलहाल आम आदमी की पहुंच से दूर रखती है।



ग्लेन कर्टिस के शुरुआती कर्टिस ऑटोप्लेन से लेकर आज के अत्याधुनिक टेस्ला रोडस्टर और स्पेसएक्स थ्रस्टर्स तक का सफर यह तो यह हो जाता है कि इंसान अपनी कल्पनाओं को सच में बदलने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। जो कभी एक असंभव कल्पना लगती थी, वह आज हकीकत की दहलीज पर खड़ी है। आने वाले कुछ वर्षों में जब सड़कों के साथ-साथ आसमान में भी अत्याधुनिक वाहनों की कतारें दिखेंगी, तो यह सदी के सबसे बड़े तकनीकी चमत्कारों में से एक होगा।

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