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Ford: चेन्नई प्लांट को लेकर फोर्ड ने दोबारा शुरू की तैयारी, 2025 की दूसरी छमाही में हो सकती है शुरुआत
Thu, 01 May 2025 07:48 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 01 May 2025 07:48 PM IST
सार
Ford Motor Company (फोर्ड मोटर कंपनी) ने चेन्नई में अपने प्लांट को दोबारा शुरू करने के पहले चरण की तैयारी शुरू कर दी है। तमिलनाडु के उद्योग मंत्री टीआरबी राजा ने हाल ही में इस बात की जानकारी दी।
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Ford Car
- फोटो : Ford
विस्तार
Ford Motor Company (फोर्ड मोटर कंपनी) ने चेन्नई में अपने प्लांट को दोबारा शुरू करने के पहले चरण की तैयारी शुरू कर दी है। तमिलनाडु के उद्योग मंत्री टीआरबी राजा ने हाल ही में इस बात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अमेरिका में सरकार बदलने के कारण इस प्रक्रिया में थोड़ी रुकावट आई थी, लेकिन अब सब कुछ फिर से पटरी पर लौट रहा है।
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चेन्नई में फिर से बनेगा ऑटो पार्ट्स
मंत्री राजा के मुताबिक, कुछ हफ्ते पहले फोर्ड ने तय कर लिया है कि चेन्नई प्लांट में किन-किन पार्ट्स का निर्माण किया जाएगा। फिलहाल कंपनी इस फैसले को लागू करने के लिए जरूरी तैयारियां कर रही है। हालांकि यह अभी साफ नहीं है कि फोर्ड फिर से पूरी तरह गाड़ियों का निर्माण शुरू करेगी या फिर सिर्फ इंजन और ऑटो पार्ट्स बनाकर विदेश भेजेगी। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने जरूर इतना कहा कि "फोर्ड वापस आ रही है" और प्लांट में मैन्युफैक्चरिंग 2025 की दूसरी छमाही से शुरू हो सकती है।
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मंत्री राजा के मुताबिक, कुछ हफ्ते पहले फोर्ड ने तय कर लिया है कि चेन्नई प्लांट में किन-किन पार्ट्स का निर्माण किया जाएगा। फिलहाल कंपनी इस फैसले को लागू करने के लिए जरूरी तैयारियां कर रही है। हालांकि यह अभी साफ नहीं है कि फोर्ड फिर से पूरी तरह गाड़ियों का निर्माण शुरू करेगी या फिर सिर्फ इंजन और ऑटो पार्ट्स बनाकर विदेश भेजेगी। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने जरूर इतना कहा कि "फोर्ड वापस आ रही है" और प्लांट में मैन्युफैक्चरिंग 2025 की दूसरी छमाही से शुरू हो सकती है।
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अमेरिका की पॉलिसी ने डाला था प्लान पर ब्रेक
फोर्ड की भारत में वापसी को लेकर पिछले कई महीनों से असमंजस बना हुआ था। इसकी एक बड़ी वजह थी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वह नीति, जिसमें उन्होंने अमेरिका में नौकरियां वापस लाने के लिए बाहर से आने वाले ऑटो पार्ट्स और गाड़ियों पर भारी टैक्स लगा दिया था।
सितंबर 2024 में फोर्ड ने तमिलनाडु सरकार के साथ एक 'लेटर ऑफ इंटेंट' (एलओआई) पर हस्ताक्षर किया था, जिसमें मराईमलाई नगर स्थित प्लांट से फिर से वाहन उत्पादन शुरू करने की बात थी, खासकर निर्यात के लिए। लेकिन छह महीने बीत जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई बड़ा काम नहीं हुआ, जिससे यह अटकलें लगने लगीं कि कंपनी भारत में गाड़ियों की उत्पादन की योजना छोड़ सकती है।
बाद में खबर आई कि फोर्ड इस प्लांट का इस्तेमाल सिर्फ इंजन और ऑटो पार्ट्स बनाने के लिए कर सकती है, जो विदेश भेजे जाएंगे।
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फोर्ड की भारत में वापसी को लेकर पिछले कई महीनों से असमंजस बना हुआ था। इसकी एक बड़ी वजह थी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वह नीति, जिसमें उन्होंने अमेरिका में नौकरियां वापस लाने के लिए बाहर से आने वाले ऑटो पार्ट्स और गाड़ियों पर भारी टैक्स लगा दिया था।
सितंबर 2024 में फोर्ड ने तमिलनाडु सरकार के साथ एक 'लेटर ऑफ इंटेंट' (एलओआई) पर हस्ताक्षर किया था, जिसमें मराईमलाई नगर स्थित प्लांट से फिर से वाहन उत्पादन शुरू करने की बात थी, खासकर निर्यात के लिए। लेकिन छह महीने बीत जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई बड़ा काम नहीं हुआ, जिससे यह अटकलें लगने लगीं कि कंपनी भारत में गाड़ियों की उत्पादन की योजना छोड़ सकती है।
बाद में खबर आई कि फोर्ड इस प्लांट का इस्तेमाल सिर्फ इंजन और ऑटो पार्ट्स बनाने के लिए कर सकती है, जो विदेश भेजे जाएंगे।
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टैक्स छूट ने फिर जगाई उम्मीद
फोर्ड की सीमित योजना को भी उस वक्त झटका लगा जब ट्रंप सरकार ने आयातित गाड़ियों (इंपोर्टेड व्हीकल्स) और ऑटो पार्ट्स पर 25 प्रतिशत का भारी टैक्स लगा दिया। इससे भारत जैसे देशों से निर्यात करना महंगा हो गया, और फोर्ड का इंडिया प्लांट बतौर एक्सपोर्ट हब इस्तेमाल करने का गणित बिगड़ गया।
हालांकि अब ट्रंप सरकार ने नीति में कुछ नरमी दिखाई है। उन्होंने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन किया है, जिसमें कहा गया है कि 25 प्रतिशत टैक्स तो बना रहेगा। लेकिन अगर कोई कंपनी गाड़ियों की फाइनल असेंबली अमेरिका में करती है, तो उसे 15 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इसका मतलब यह है कि जो कंपनियां अमेरिका में असेंबली का काम करेंगी, उनके लिए खर्च थोड़ा कम हो जाएगा।
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फोर्ड की सीमित योजना को भी उस वक्त झटका लगा जब ट्रंप सरकार ने आयातित गाड़ियों (इंपोर्टेड व्हीकल्स) और ऑटो पार्ट्स पर 25 प्रतिशत का भारी टैक्स लगा दिया। इससे भारत जैसे देशों से निर्यात करना महंगा हो गया, और फोर्ड का इंडिया प्लांट बतौर एक्सपोर्ट हब इस्तेमाल करने का गणित बिगड़ गया।
हालांकि अब ट्रंप सरकार ने नीति में कुछ नरमी दिखाई है। उन्होंने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन किया है, जिसमें कहा गया है कि 25 प्रतिशत टैक्स तो बना रहेगा। लेकिन अगर कोई कंपनी गाड़ियों की फाइनल असेंबली अमेरिका में करती है, तो उसे 15 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इसका मतलब यह है कि जो कंपनियां अमेरिका में असेंबली का काम करेंगी, उनके लिए खर्च थोड़ा कम हो जाएगा।
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2021 में बंद हुआ था प्लांट, अब फिर दिखी हलचल
फोर्ड ने सितंबर 2021 में भारत में गाड़ियों की मैन्युफैक्चरिंग बंद कर दी थी, जो कंपनी की ग्लोबल स्ट्रैटेजी का हिस्सा था। चेन्नई का 350 एकड़ में फैला मराईमलाई नगर प्लांट बंद कर दिया गया था। उस समय प्लांट की सालाना क्षमता 1.5 लाख गाड़ियों और 3.4 लाख इंजनों की थी।
हालांकि, फोर्ड ने गुजरात के साणंद प्लांट से निर्यात के लिए इंजन बनाना जारी रखा था। बाद में वह प्लांट टाटा मोटर्स को बेच दिया गया। लेकिन फोर्ड ने उसे किराए पर वापस ले लिया ताकि सीमित ऑपरेशंस जारी रखे जा सकें।
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फोर्ड ने सितंबर 2021 में भारत में गाड़ियों की मैन्युफैक्चरिंग बंद कर दी थी, जो कंपनी की ग्लोबल स्ट्रैटेजी का हिस्सा था। चेन्नई का 350 एकड़ में फैला मराईमलाई नगर प्लांट बंद कर दिया गया था। उस समय प्लांट की सालाना क्षमता 1.5 लाख गाड़ियों और 3.4 लाख इंजनों की थी।
हालांकि, फोर्ड ने गुजरात के साणंद प्लांट से निर्यात के लिए इंजन बनाना जारी रखा था। बाद में वह प्लांट टाटा मोटर्स को बेच दिया गया। लेकिन फोर्ड ने उसे किराए पर वापस ले लिया ताकि सीमित ऑपरेशंस जारी रखे जा सकें।
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