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Hindi News ›   Automobiles News ›   Double Toll Charge Refund Refused: Haryana Man Wins Rs 6800 Compensation in Consumer Court

टोल प्लाजा पर फास्टैग से दो बार कटा टैक्स, रिफंड देने से किया मना: उपभोक्ता आयोग ने ठोका ₹6,800 का जुर्माना

Mon, 05 Oct 2026 08:37 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Mon, 05 Oct 2026 08:37 PM IST
सार

हरियाणा में एक मोटर चालक से टोल प्लाजा पर एक ही यात्रा के लिए कथित तौर पर दो बार टोल वसूले जाने के मामले में उपभोक्ता आयोग ने टोल प्लाजा और उससे जुड़ी निर्माण कंपनी को कुल ₹6,800 का भुगतान करने का आदेश दिया है।

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Double Toll Charge Refund Refused: Haryana Man Wins Rs 6800 Compensation in Consumer Court
Toll Charge - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

हरियाणा के पानीपत जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां टोल प्लाजा पर एक वाहन चालक से गलत तरीके से दो बार टोल टैक्स वसूल लिया गया।
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जून 2023 में शिकायतकर्ता अपने परिवार के साथ गोहाना की ओर यात्रा कर रहे थे। जब उनकी कार टोल प्लाजा पर पहुंची, तो वहां मौजूद कर्मचारी ने दावा किया कि उनके पेटीएम वॉलेट में पर्याप्त बैलेंस नहीं है। इसके बाद कर्मचारी ने तय टोल दर 65 रुपये की जगह 130 रुपये की डबल पेनल्टी फीस डिजिटल माध्यम से वसूल ली।
शिकायतकर्ता ने अपने वॉलेट में पर्याप्त बैलेंस होने का दावा किया और इस अतिरिक्त चार्ज का विरोध भी किया। इसके ठीक 5 मिनट बाद उनके मोबाइल पर मैसेज आया कि उनके पेटीएम फास्टैग वॉलेट से भी 65 रुपये की राशि कट गई है।
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जब ग्राहक ने अतिरिक्त पैसे वापस मांगे तो टोल कर्मचारियों का क्या रवैया रहा?

वॉलेट से दोबारा पैसे कटने की पुष्टि होने के तुरंत बाद वाहन चालक ने टोल प्लाजा स्टाफ से संपर्क किया। और गलत तरीके से कटे अतिरिक्त पैसे वापस करने का अनुरोध किया। आरोप है कि टोल कर्मचारियों ने पैसे रिफंड करने से साफ मना कर दिया और उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल भी किया।
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इसके बाद शिकायतकर्ता ने टोल प्लाजा और संबंधित कंस्ट्रक्शन कंपनी को कानूनी नोटिस भेजा। जब नोटिस का भी कोई समाधान नहीं निकला, तो उन्होंने सेवाओं में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का आरोप लगाते हुए पानीपत जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का दरवाजा खटखटाया। 
 

टोल ऑपरेटर ने अपने बचाव में क्या दलीलें पेश कीं?

उपभोक्ता आयोग के सामने टोल प्लाजा और संबंधित निर्माण कंपनी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने दलील दी कि वाहन का फास्टैग ठीक से काम नहीं कर रहा था और स्कैनिंग के बाद वॉलेट बैलेंस शो नहीं हो रहा था।
कंपनी का दावा था कि चालक ने खुद इस समस्या की पुष्टि की थी और उसके बाद ही टोल का भुगतान किया था। इसके साथ ही टोल ऑपरेटर ने यह भी कहा कि कंज्यूमर कोर्ट आने से पहले ग्राहक ने रिफंड के लिए उनसे संपर्क ही नहीं किया था।

 

उपभोक्ता आयोग ने सबूतों के आधार पर क्या फैसला सुनाया और कितना जुर्माना लगाया?

पानीपत उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष आर.के. डोगरा, सदस्य रेखा चौधरी और विनीत कौशिक की पीठ ने 29 सितंबर को इस मामले पर अपना फैसला सुनाया। आयोग ने शिकायतकर्ता द्वारा पेश किए गए पेटीएम ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और टोल रसीद की जांच की। जिससे स्पष्ट हुआ कि 5 मिनट के भीतर ही 65 रुपये की राशि दो बार काटी गई थी। 

आयोग ने स्पष्ट टिप्पणी की:
  • सेवाओं में लापरवाही: जब यह साबित हो गया कि गलत कटौती हुई थी, तो अतिरिक्त राशि लौटाना टोल ऑपरेटर की जिम्मेदारी थी।
  • सबूतों की कमी: टोल ऑपरेटर को कई मौके दिए गए, लेकिन वे अपने पक्ष में कोई ठोस सबूत पेश करने में नाकाम रहे।
उपभोक्ता आयोग ने इसे "सेवाओं में स्पष्ट लापरवाही" मानते हुए टोल प्लाजा और कंस्ट्रक्शन कंपनी को कुल 6,800 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया:
  • ₹1,300: काटी गई अतिरिक्त राशि और उससे जुड़े हर्जाने के रूप में।
  • ₹5,500: मानसिक उत्पीड़न, असुविधा और कानूनी खर्च के मुआवजे के रूप में।

 

इस फैसले से आम वाहन चालकों और FASTag यूजर्स को क्या सीख मिलती है?

यह मामला इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट रिकॉर्ड्स और ट्रांजैक्शन रसीदों को संभालकर रखने के महत्व को रेखांकित करता है।
अगर कभी फास्टैग, वॉलेट या बैंक खाते से गलती से दो बार टोल टैक्स कट जाता है, तो इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के आधार पर टोल ऑपरेटर बिना किसी जायज वजह के उस पैसे को अपने पास नहीं रख सकता। अगर टोल कंपनी रिफंड देने से मना करती है, तो आप अपने डिजिटल ट्रांजैक्शन प्रूफ के दम पर कंज्यूमर कोर्ट से न्याय और मुआवजा दोनों हासिल कर सकते हैं। किसी भी शिकायत के लिए आप राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1915 पर भी संपर्क कर सकते हैं।
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