होंडा एक्टिवा के गलत स्पीडोमीटर बेचने पर डीलर को झटका: उपभोक्ता आयोग ने कितने रुपये का लगाया जुर्माना?
- चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सेवा में कोताही का एक कड़ा उदाहरण पेश करते हुए एक स्थानीय टू-व्हीलर डीलर को भारी झटका दिया है।
- आयोग ने होंडा एक्टिवा के लिए गलत और बेमेल स्पेयर पार्ट बेचने और उसके पैसे वापस न करने पर डीलर को ग्राहक को ₹10,000 का मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
विस्तार
चंडीगढ़ के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने होंडा एक्टिवा (Honda Activa) के लिए गलत स्पीडोमीटर उपलब्ध कराने और ग्राहक को उसकी रकम वापस नहीं करने के मामले में एक दोपहिया वाहन डीलर को ₹10,000 मुआवजा देने का निर्देश दिया है। आयोग ने डीलर को स्पेयर पार्ट के लिए चुकाए गए 1,175 रुपये भी 9 फीसदी सालाना ब्याज के साथ लौटाने और मुकदमेबाजी का खर्च वहन करने का आदेश दिया है।
यह मामला मेसर्स करिश्मा गोल्डव्हील्स, हीरो मोटोकॉर्प, इंडस्ट्रियल एरिया से जुड़ा है। शिकायतकर्ता माम चंद सैनी ने आरोप लगाया था कि डीलर ने उनकी होंडा एक्टिवा के लिए ऐसा स्पीडोमीटर उपलब्ध कराया, जो वाहन के अनुकूल नहीं था। इसके बाद भी डीलर ने न तो सही पार्ट उपलब्ध कराया और न ही पहले भुगतान की गई रकम वापस की।
होंडा एक्टिवा के स्पीडोमीटर को लेकर ग्राहक की शिकायत क्या थी?
शिकायत के मुताबिक, माम चंद सैनी 22 अक्तूबर 2025 को अपनी होंडा एक्टिवा का खराब स्पीडोमीटर बदलवाने के लिए डीलरशिप पहुंचे थे। उन्होंने डीलर की तकनीकी विशेषज्ञता पर भरोसा करते हुए नए स्पीडोमीटर के लिए 1,175 रुपये का भुगतान किया।
सैनी का कहना था कि अगले दिन डीलर ने जो स्पीडोमीटर उपलब्ध कराया, वह आकार में बड़ा था और उनकी गाड़ी के अनुकूल नहीं था। इस वजह से उसे वाहन में लगाया नहीं जा सका।
डीलर ने गलत स्पेयर पार्ट मिलने के बाद क्या किया?
शिकायतकर्ता के अनुसार, गलत स्पीडोमीटर मिलने के बाद डीलर ने गलती सुधारने के बजाय दूसरा स्पीडोमीटर मंगाने के लिए उनसे दोबारा 1,175 रुपये की मांग की। इस दौरान न तो पहले भुगतान की गई रकम लौटाई गई और न ही अनुपयुक्त स्पीडोमीटर वापस लिया गया।
इसके बाद सैनी ने 22 नवंबर 2025 को डीलर को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। अंततः उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग का रुख किया और सेवा में कमी तथा अनुचित व्यापार व्यवहार का आरोप लगाया।
आयोग ने डीलर को सेवा में कमी का दोषी क्यों माना?
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता ने वाहन का सही स्पेयर पार्ट पहचानने में मदद के लिए अपनी गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट भी डीलर को उपलब्ध कराया था। इसके बावजूद डीलर न तो अनुकूल स्पीडोमीटर दे सका और न ही ग्राहक की रकम वापस की।
आयोग ने यह भी गौर किया कि डीलर शिकायत का मुकाबला करने के लिए पेश नहीं हुआ। ऐसे में शिकायतकर्ता की ओर से पेश किए गए दस्तावेजी साक्ष्यों का खंडन नहीं किया गया।
आयोग ने माना कि सेवा में कमी के कारण शिकायतकर्ता को अपेक्षाकृत छोटी रकम वापस पाने के लिए उपभोक्ता आयोग का सहारा लेना पड़ा। सीधे तौर पर समस्या सुलझाने की कोशिश के बावजूद उन्हें हुई असुविधा, मानसिक परेशानी और मुकदमेबाजी के खर्च को देखते हुए मुआवजा देना उचित है।
ग्राहक को कितना रिफंड और मुआवजा मिलेगा?
जिला उपभोक्ता आयोग ने डीलर को निम्नलिखित भुगतान करने का निर्देश दिया है:
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₹1,175 का रिफंड: स्पीडोमीटर के लिए चुकाई गई रकम 9 फीसदी सालाना ब्याज के साथ लौटानी होगी।
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₹10,000 का मुआवजा: मानसिक परेशानी और उत्पीड़न के लिए ग्राहक को भुगतान करना होगा।
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मुकदमेबाजी का खर्च: शिकायतकर्ता के कानूनी मामले से जुड़े खर्च का भुगतान भी डीलर को करना होगा।
आयोग के इस आदेश में स्पष्ट किया गया कि ग्राहक को गलत स्पेयर पार्ट उपलब्ध कराने और भुगतान की गई रकम वापस नहीं करने जैसी परिस्थितियां सेवा में कमी के दायरे में आती हैं।