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सर्विस सेंटर में जमा कराई गई कार सड़क दुर्घटना का कैसे हुई शिकार?: ग्राहक को ₹4.25 लाख मुआवजा
Wed, 30 Sep 2026 10:48 PM IST
Amar Sharma
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amar Sharma
Updated Wed, 30 Sep 2026 10:48 PM IST
सार
सर्विसिंग के लिए डीलर के पास छोड़ी गई एक कार के दुर्घटनाग्रस्त होने के मामले में पश्चिम बंगाल राज्य उपभोक्ता आयोग ने ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया है। जानें क्या है पूरा मामला।
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SUV Crash
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
पश्चिम बंगाल राज्य उपभोक्ता आयोग ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कार डीलर और बीमा कंपनी को ग्राहक को हुए नुकसान का भुगतान करने का कड़ा निर्देश दिया है। यह आदेश 29 सितंबर 2026 को सुनाया गया।
मामला तब सामने आया जब उपभोक्ता की Renault Duster (रेनो डस्टर) कार सर्विसिंग के लिए डीलर की देखरेख में रखी गई थी। लेकिन डीलर उसे बिना ग्राहक की सहमति के दूसरी जगह ले जा रहा था और रास्ते में कार एक भीषण दुर्घटना का शिकार हो गई। आयोग ने डीलर द्वारा बिना अनुमति गाड़ी ले जाने की कोई संतोषजनक वजह न दे पाने पर डीलर को दोषी ठहराया। और इंश्योरेंस क्लेम को खारिज करने वाले बीमा कंपनी के फैसले को रद्द कर दिया।
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मामला तब सामने आया जब उपभोक्ता की Renault Duster (रेनो डस्टर) कार सर्विसिंग के लिए डीलर की देखरेख में रखी गई थी। लेकिन डीलर उसे बिना ग्राहक की सहमति के दूसरी जगह ले जा रहा था और रास्ते में कार एक भीषण दुर्घटना का शिकार हो गई। आयोग ने डीलर द्वारा बिना अनुमति गाड़ी ले जाने की कोई संतोषजनक वजह न दे पाने पर डीलर को दोषी ठहराया। और इंश्योरेंस क्लेम को खारिज करने वाले बीमा कंपनी के फैसले को रद्द कर दिया।
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सर्विस सेंटर में जमा कराई गई कार सड़क दुर्घटना का शिकार कैसे हुई?
मामले की पूरी पृष्ठभूमि इस प्रकार है:- गाड़ी की खरीद और बीमा: शिकायतकर्ता राजेश दुबे ने 27 अप्रैल 2017 को ₹15,23,736 में रेनो डस्टर खरीदी थी, जिसका इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू (IDV) लगभग 12.87 लाख रुपये था।
- सर्विसिंग के लिए सौंपना: 2 मार्च 2018 को उन्होंने नियमित सर्विसिंग और हल्के स्क्रैच ठीक करवाने के लिए कार अधिकृत डीलर को सौंपी थी।
- हादसे की सूचना: 16 मार्च को पुलिस ने राजेश दुबे को सूचित किया कि उनकी कार मेचेदा से हल्दिया के बीच दुर्घटनाग्रस्त हो गई है। एफआईआर के अनुसार कार अचानक रुके एक ट्रॉली/ट्रेलर से टकरा गई थी। जिससे कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और कार चला रहे व्यक्ति की मृत्यु हो गई।
- बिना अनुमति इस्तेमाल: पीड़ित मालिक ने आरोप लगाया कि उन्होंने वाहन को हल्दिया ले जाने की न तो कोई अनुमति दी थी और न ही उन्हें इसकी जानकारी थी। इसके बाद जब उन्होंने बीमा क्लेम किया, तो बीमा कंपनी ने देरी और वर्कशॉप रिकॉर्ड में गड़बड़ी का हवाला देते हुए क्लेम खारिज कर दिया।
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उपभोक्ता आयोग ने कार डीलर को सेवा में कोताही का दोषी क्यों माना?
न्यायिक सदस्य राजेश गुहा राय और सदस्य शांतनु साहा की पीठ ने डीलर के बचाव में पेश बयानों को खारिज करते हुए सख्त टिप्पणियां कीं:- जवाबदेही में विफलता: डीलर ने खुद माना कि मरम्मत के बाद वाहन को उनके खड़गपुर वर्कशॉप से हल्दिया शाखा ले जाया जा रहा था। आयोग ने कहा कि कस्टडी में मौजूद वाहन की उचित देखभाल करना डीलर का कर्तव्य है। और वह मालिक द्वारा अधिकृत उद्देश्य से इतर उसका उपयोग नहीं कर सकता।
- टेस्ट ड्राइव क्लॉज की सीमा: आयोग ने डीलर की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें वर्कशॉप क्लॉज का हवाला देकर 'टेस्ट ड्राइव' की अनुमति की बात कही गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई भी क्लॉज ग्राहक की गाड़ी को बिना बताए किसी अनजान यात्रा पर ले जाने की असीमित छूट नहीं देता।
- सहमति का अभाव: डीलर ऐसा कोई दस्तावेज या सबूत पेश नहीं कर सका जिससे यह साबित हो सके कि कार मालिक ने गाड़ी को दूसरी शाखा ले जाने की सहमति दी थी।
बीमा कंपनी द्वारा क्लेम खारिज करने पर आयोग ने क्या टिप्पणी की?
बीमा कंपनी ने दलील दी थी कि दुर्घटना की सूचना 25 दिन बाद दी गई, जिससे पॉलिसी शर्तों का उल्लंघन हुआ। हालांकि, आयोग ने बीमा कंपनी के रुख को मनमाना और सेवा में कमी माना:- जांच न करने पर फटकार: आयोग ने कहा कि चूंकि घटना की जानकारी पुलिस को तुरंत दी गई थी और दुर्घटनाग्रस्त वाहन निरीक्षण के लिए उपलब्ध था। इसलिए बीमा कंपनी को तुरंत एक सर्वेयर नियुक्त कर पुलिस और वर्कशॉप रिकॉर्ड्स की जांच करनी चाहिए थी।
- सीधा रिजेक्शन गलत: बिना निष्पक्ष मूल्यांकन के क्लेम खारिज करना पूरी तरह से गलत था। जिसके बाद आयोग ने बीमा क्लेम रद्द करने के कंपनी के फैसले को निरस्त कर दिया।
आयोग ने डीलर और बीमा कंपनी पर कितना जुर्माना और मुआवजा लगाया है?
आयोग ने पीड़ित ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कुल 4.25 लाख रुपये का निश्चित मुआवजा और कानूनी खर्च तय किया है। जो कि वाहन के बीमा क्लेम और मूल्यांकित नुकसान से अलग है:- बीमा क्लेम व सर्वे का आदेश: बीमा कंपनी को 15 दिनों के भीतर लाइसेंस प्राप्त सर्वेयर नियुक्त करने का निर्देश दिया गया है। सर्वेयर 45 दिनों में नुकसान का आकलन करेगा। रिपोर्ट मिलने के 30 दिनों के भीतर बीमा कंपनी को 4 अप्रैल 2019 से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ स्वीकृत क्लेम राशि का भुगतान करना होगा।
- डीलर का अतिरिक्त भुगतान: मूल्यांकित कुल नुकसान और बीमा कंपनी द्वारा दिए गए क्लेम के बीच की शेष राशि का भुगतान डीलर को करना होगा।
- डीलर और उसके ब्रांच मैनेजर पर पेनल्टी:
- ₹3,00,000 का मुआवजा (मानसिक उत्पीड़न और वाहन का उपयोग न कर पाने के नुकसान के लिए)।
- ₹50,000 का कानूनी खर्च।
- बीमा कंपनी पर पेनल्टी:
- ₹50,000 का मुआवजा।
- ₹25,000 का कानूनी खर्च।